तमिलनाडू

समुद्र की तलहटी में मिला प्राचीन इतिहास, पूमपुहार तट के पास पश्चिम एशियाई सिरेमिक की खोज

Kavita2
24 Sept 2026 11:00 AM IST
समुद्र की तलहटी में मिला प्राचीन इतिहास, पूमपुहार तट के पास पश्चिम एशियाई सिरेमिक की खोज
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चेन्नई। तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग (TNSDA) को प्राचीन बंदरगाह शहर पूमपुहार की खोज के लिए चलाए जा रहे पानी के नीचे पुरातात्विक अभियान में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। पूमपुहार तट के पास समुद्र की तलहटी से पहली बार पश्चिम एशिया से जुड़े सिरेमिक और मिट्टी के बर्तनों के अवशेष मिले हैं। इस खोज को प्राचीन पूमपुहार के इतिहास और उसके दूसरे देशों के साथ व्यापारिक संबंधों को समझने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

पूमपुहार को प्राचीन काल का महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर माना जाता है। ऐतिहासिक और साहित्यिक स्रोतों में इसके समुद्री व्यापार से जुड़े होने के उल्लेख मिलते हैं। माना जाता है कि समय के साथ समुद्र के बढ़ते प्रभाव और तटीय बदलावों के कारण प्राचीन शहर का एक हिस्सा समुद्र में समा गया था। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग समुद्र के भीतर खोज अभियान चला रहा है।

चल रहे अभियान के दौरान समुद्र की तलहटी से मिले सिरेमिक और मिट्टी के बर्तनों ने पुरातत्व विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया है। शुरुआती तौर पर इन्हें पश्चिम एशियाई क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। यदि आगे वैज्ञानिक परीक्षण और विस्तृत अध्ययन से इनकी उत्पत्ति और काल की पुष्टि होती है, तो यह खोज प्राचीन पूमपुहार के अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार नेटवर्क से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य उपलब्ध करा सकती है।

इस खोज की खास बात यह है कि मौजूदा अंडरवाटर प्रोजेक्ट में पहली बार पश्चिम एशियाई सिरेमिक मिले हैं। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि प्राचीन समय में पूमपुहार का संपर्क किन क्षेत्रों के व्यापारियों और बंदरगाहों से था। मिट्टी के बर्तन और सिरेमिक पुरातात्विक अध्ययन में बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि इनके निर्माण की शैली, सामग्री और डिजाइन के आधार पर इनके संभावित मूल स्थान और समय के बारे में जानकारी जुटाई जा सकती है।

पूमपुहार तमिलनाडु के वर्तमान मयिलादुथुराई जिले के तटीय क्षेत्र से जुड़ा है। प्राचीन तमिल साहित्य में इसे कावेरीपूमपट्टिनम के नाम से भी जाना जाता है। कावेरी नदी के समुद्र से मिलने वाले क्षेत्र के पास स्थित होने के कारण प्राचीन काल में इसकी भौगोलिक स्थिति समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण रही होगी।

अब समुद्र की तलहटी से पश्चिम एशियाई मूल से जुड़े सिरेमिक मिलने से प्राचीन व्यापारिक गतिविधियों को लेकर नए सवाल और संभावनाएं सामने आई हैं। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि क्या पूमपुहार से पश्चिम एशिया के बंदरगाहों तक प्रत्यक्ष समुद्री व्यापार होता था या वस्तुएं अन्य व्यापारिक केंद्रों के माध्यम से यहां पहुंचती थीं।

पुरातत्व विभाग के लिए अगला महत्वपूर्ण चरण इन वस्तुओं का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन होगा। सिरेमिक की संरचना, निर्माण तकनीक, आकार और अन्य विशेषताओं की जांच से इनके इतिहास के बारे में ज्यादा स्पष्ट जानकारी सामने आ सकती है। इसके साथ ही उसी क्षेत्र में अन्य पुरातात्विक अवशेष मिलने की संभावना को देखते हुए पानी के नीचे खोज का दायरा भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

समुद्र के भीतर पुरातात्विक खोज सामान्य उत्खनन की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होती है। समुद्री धाराएं, पानी के भीतर दृश्यता, तलहटी पर जमा रेत और गाद जैसी परिस्थितियां खोज कार्य को कठिन बनाती हैं। ऐसे अभियानों में समुद्र की तलहटी का सर्वेक्षण करने और संदिग्ध स्थानों की पहचान करने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जाता है।

पूमपुहार से जुड़ी खोजों में सबसे बड़ी दिलचस्पी इस बात को लेकर है कि प्राचीन बंदरगाह शहर का कितना हिस्सा समुद्र के भीतर मौजूद हो सकता है। वर्षों से इस क्षेत्र में तटीय बदलाव और समुद्र में डूबे संभावित पुरातात्विक अवशेषों को लेकर अध्ययन होते रहे हैं। वर्तमान परियोजना का उद्देश्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्राचीन पूमपुहार की स्थिति और विस्तार को बेहतर तरीके से समझना है।

पश्चिम एशियाई सिरेमिक की खोज इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि इससे केवल एक प्राचीन शहर की कहानी नहीं, बल्कि उस दौर के समुद्री व्यापार की व्यापक तस्वीर समझने में मदद मिल सकती है। भारत के पूर्वी तट से प्राचीन काल में विभिन्न क्षेत्रों के साथ समुद्री संपर्क रहे हैं। यदि पूमपुहार से मिले नए अवशेषों का काल और स्रोत वैज्ञानिक रूप से स्थापित होता है, तो व्यापार मार्गों और सांस्कृतिक संपर्कों पर नई जानकारी सामने आ सकती है।

सिरेमिक और मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े पुरातत्वविदों के लिए प्राचीन समाज के दैनिक जीवन और व्यापार दोनों की जानकारी के महत्वपूर्ण स्रोत होते हैं। बाहर से आए बर्तनों की मौजूदगी यह संकेत दे सकती है कि किसी बंदरगाह पर विदेशी वस्तुओं की आवाजाही होती थी। हालांकि केवल सिरेमिक मिलने के आधार पर पूरे व्यापार नेटवर्क के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले विस्तृत अध्ययन जरूरी होगा।

प्राचीन पूमपुहार के समुद्र में डूबने से जुड़े सवालों के जवाब तलाशना भी इस परियोजना का एक प्रमुख हिस्सा है। समुद्र के नीचे यदि संरचनाओं, बंदरगाह से जुड़े अवशेषों या बड़ी मात्रा में व्यापारिक वस्तुओं के प्रमाण मिलते हैं, तो शहर के इतिहास को ज्यादा स्पष्ट रूप से समझा जा सकेगा।

फिलहाल पश्चिम एशियाई सिरेमिक और मिट्टी के बर्तनों की खोज ने पूमपुहार के अंडरवाटर पुरातात्विक अभियान को नई दिशा दी है। आगे होने वाली जांच से इन अवशेषों की उम्र, उत्पत्ति और उपयोग के बारे में अधिक जानकारी मिलने की उम्मीद है। यह खोज प्राचीन पूमपुहार के समुद्री व्यापार और दुनिया के दूसरे हिस्सों से उसके संपर्क की कहानी को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है।

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