तमिलनाडू

मेकेदातु बांध मुद्दे पर कर्नाटक न जाएं मुख्यमंत्री, अंबुमणि रामदास की अपील

Kavita2
25 July 2026 9:33 AM IST
मेकेदातु बांध मुद्दे पर कर्नाटक न जाएं मुख्यमंत्री, अंबुमणि रामदास की अपील
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चेन्नई : पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के नेता अंबुमणि रामदास ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय से कर्नाटक नहीं जाने और मेकेदातु बांध परियोजना के मुद्दे पर वहां के मुख्यमंत्री से किसी भी प्रकार की बातचीत नहीं करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि यह मामला तमिलनाडु के किसानों, पेयजल सुरक्षा और राज्य के जल अधिकारों से जुड़ा हुआ है, इसलिए सरकार को इस पर बेहद सतर्क और दृढ़ रुख अपनाना चाहिए।

शुक्रवार को चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए अंबुमणि रामदास ने कहा कि मेकेदातु बांध परियोजना लंबे समय से तमिलनाडु के लिए चिंता का विषय रही है। उनका कहना था कि यदि इस परियोजना को आगे बढ़ाया गया तो इसका असर कावेरी नदी के जल प्रवाह पर पड़ सकता है, जिससे तमिलनाडु के कई जिलों में सिंचाई और पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है।

उन्होंने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय से अपील करते हुए कहा कि कर्नाटक जाकर इस मुद्दे पर बातचीत करने से पहले तमिलनाडु के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनके अनुसार, राज्य सरकार को ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे यह संदेश जाए कि तमिलनाडु मेकेदातु परियोजना के प्रति नरम रुख अपना रहा है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर राज्य की सभी राजनीतिक पार्टियों और किसानों की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

अंबुमणि रामदास ने कहा कि मेकेदातु बांध केवल एक विकास परियोजना का विषय नहीं है, बल्कि यह अंतरराज्यीय नदी जल बंटवारे से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है। उनका मानना है कि कावेरी नदी पर किसी भी नई परियोजना का सीधा प्रभाव तमिलनाडु के किसानों की आजीविका और राज्य की जल आवश्यकताओं पर पड़ सकता है। इसलिए इस मामले में कोई भी निर्णय व्यापक विचार-विमर्श और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप ही होना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु सरकार को इस मुद्दे पर अपना विरोध पहले की तरह स्पष्ट रूप से जारी रखना चाहिए। यदि आवश्यकता पड़े तो राज्य सरकार को कानूनी और संवैधानिक माध्यमों से अपने अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कावेरी जल विवाद से जुड़े मामलों में तमिलनाडु का रुख हमेशा राज्य के किसानों और आम जनता के हितों की रक्षा पर आधारित रहा है और भविष्य में भी यही नीति अपनाई जानी चाहिए।

पीएमके नेता ने आरोप लगाया कि मेकेदातु परियोजना को लेकर समय-समय पर विभिन्न स्तरों पर चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन तमिलनाडु की चिंताओं का पूरी तरह समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य के लाखों किसान कावेरी नदी के पानी पर निर्भर हैं और जल प्रवाह में किसी भी प्रकार की कमी से कृषि उत्पादन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसके साथ ही कई शहरों और कस्बों की पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मेकेदातु बांध का मुद्दा तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय रहा है। जब भी इस परियोजना से संबंधित कोई नई पहल या बैठक की चर्चा होती है, तमिलनाडु के राजनीतिक दल आमतौर पर राज्य के जल अधिकारों की रक्षा की मांग को प्रमुखता से उठाते हैं। इसी क्रम में अंबुमणि रामदास का यह बयान भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को राज्य के सभी हितधारकों, विशेषकर किसानों के संगठनों और जल विशेषज्ञों से विचार-विमर्श करने के बाद ही आगे की रणनीति तय करनी चाहिए। उनका कहना था कि राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि तमिलनाडु के हिस्से के पानी पर किसी भी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

अंबुमणि रामदास ने यह भी दोहराया कि उनकी पार्टी हमेशा से तमिलनाडु के जल अधिकारों की रक्षा के पक्ष में रही है और भविष्य में भी इस मुद्दे पर अपना रुख मजबूती से रखेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को केंद्र सरकार के समक्ष भी अपनी चिंताओं को प्रभावी ढंग से रखना चाहिए, ताकि कावेरी बेसिन से जुड़े किसी भी निर्णय में तमिलनाडु के हितों की अनदेखी न हो।

फिलहाल मुख्यमंत्री जोसेफ विजय या राज्य सरकार की ओर से अंबुमणि रामदास की इस अपील पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, उनके बयान के बाद मेकेदातु बांध परियोजना एक बार फिर राज्य की राजनीति और जल प्रबंधन से जुड़े विमर्श के केंद्र में आ गई है। अब राजनीतिक दलों, किसान संगठनों और आम जनता की निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह इस संवेदनशील अंतरराज्यीय मुद्दे पर किस प्रकार की रणनीति अपनाती है।

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