
तमिलनाडु : एकानापुरम गांव के लोगों ने परंदूर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना के रद्द होने के बाद राहत की सांस ली है। करीब चार साल तक इस परियोजना का विरोध करने वाले ग्रामीण अब अपने संघर्ष की सफलता का जश्न मना रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपनी जमीन, आजीविका और गांव के भविष्य को बचाने के लिए लंबे समय तक आंदोलन किया। अब सरकार की ओर से परियोजना रद्द किए जाने के बाद उन्हें अपने प्रयासों की जीत महसूस हो रही है।
चार साल तक चला विरोध प्रदर्शन
परंदूर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना को लेकर एकानापुरम और आसपास के गांवों के लोगों ने लंबे समय तक विरोध किया था। ग्रामीणों को आशंका थी कि परियोजना के कारण बड़ी संख्या में लोगों की जमीन प्रभावित होगी और पारंपरिक जीवनशैली पर असर पड़ेगा।
स्थानीय लोगों ने बैठकों, प्रदर्शन और अन्य माध्यमों से अपनी आपत्तियां सरकार तक पहुंचाईं। उनका कहना था कि विकास जरूरी है, लेकिन ऐसा विकास नहीं होना चाहिए जिससे लोगों को अपनी जमीन और घर छोड़ने पड़ें।
सरकार के फैसले से ग्रामीणों में खुशी
ग्रामीणों के अनुसार, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 2025 में परियोजना को रद्द करने का वादा किया था। अब उस फैसले के बाद गांव में खुशी का माहौल है।
लोगों ने कहा कि लंबे संघर्ष के बाद उनकी मांग सुनी गई है। ग्रामीणों ने आंदोलन के दौरान साथ देने वाले सामाजिक संगठनों और समर्थकों का भी स्वागत किया।
संघर्ष में साथ देने वालों का किया सम्मान
परियोजना विरोधी आंदोलन से जुड़े लोगों ने उन सभी समर्थकों के प्रति आभार जताया, जिन्होंने ग्रामीणों की आवाज को मजबूती दी।
ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक गांव का संघर्ष नहीं था, बल्कि अपनी जमीन और अधिकारों के लिए लोगों की एकजुटता का उदाहरण था। उन्होंने आंदोलन में शामिल सभी लोगों को धन्यवाद दिया।
जमीन और आजीविका को लेकर थी चिंता
ग्रामीणों का सबसे बड़ा मुद्दा जमीन अधिग्रहण और उससे जुड़ी आजीविका को लेकर था। उनका कहना था कि खेती और गांव आधारित जीवन उनके अस्तित्व का हिस्सा है।
उनका मानना था कि बड़े प्रोजेक्ट के कारण केवल जमीन ही नहीं जाएगी, बल्कि वर्षों से जुड़ी सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था भी प्रभावित होगी।
विकास और स्थानीय हितों के बीच संतुलन की मांग
ग्रामीणों ने हमेशा यह कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास योजनाओं में स्थानीय लोगों की भावनाओं और जरूरतों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
उनका कहना था कि किसी भी बड़ी परियोजना को शुरू करने से पहले प्रभावित लोगों से बातचीत और उनकी सहमति जरूरी है।
गांव में लौट रही सामान्य स्थिति
परियोजना रद्द होने की खबर के बाद ग्रामीणों में उत्साह देखने को मिला। लोगों ने अपने संघर्ष की उपलब्धि को याद करते हुए एक-दूसरे का स्वागत किया।
कई ग्रामीणों ने कहा कि अब वे बिना किसी चिंता के अपनी खेती और दैनिक जीवन पर ध्यान दे सकेंगे। लंबे समय से चले आ रहे आंदोलन के कारण गांव में जो तनाव का माहौल था, उसमें भी कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
आंदोलन बना मिसाल
परंदूर एयरपोर्ट परियोजना के विरोध को ग्रामीण आंदोलनों के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को उठाया और लगातार अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया।
ग्रामीणों का कहना है कि उनकी जीत यह संदेश देती है कि लोकतांत्रिक तरीके से उठाई गई आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
फिलहाल एकानापुरम के लोग अपने संघर्ष की सफलता का जश्न मना रहे हैं। चार साल तक चले विरोध के बाद परियोजना रद्द होने से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है और वे इसे अपने धैर्य और एकजुटता की जीत बता रहे हैं।





