
Tamil Nadu तमिलनाडु: AIADMK के जनरल सेक्रेटरी एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने तमिलनाडु में बढ़ती बिजली कटौती को लेकर राज्य सरकार से तत्काल और प्रभावी कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने रविवार को जारी अपने बयान में कहा कि राज्य के कई हिस्सों में लगातार बिजली कटौती से आम जनता परेशान है और सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है।
पलानीस्वामी ने अपने बयान में कहा कि AIADMK के शासनकाल में बिजली की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए समय पर जरूरी कदम उठाए गए थे। उन्होंने दावा किया कि उस समय विंड, सोलर और थर्मल पावर प्लांट्स में उत्पादन बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया था। इसके साथ ही केंद्र सरकार और निजी बिजली उत्पादक कंपनियों से शॉर्ट-टर्म कॉन्ट्रैक्ट के तहत बिजली खरीदकर आपूर्ति को संतुलित रखा गया था।
उन्होंने वर्तमान सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नई सरकार की “अस्थिर और लापरवाह नीतियों” के कारण राज्य में बिजली की गंभीर कमी उत्पन्न हो गई है। पलानीस्वामी के अनुसार, इस स्थिति ने लोगों की दिनचर्या को बुरी तरह प्रभावित किया है और कई क्षेत्रों में रात के समय बार-बार बिजली कटौती की समस्या देखी जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि चेन्नई और पुडुचेरी जैसे क्षेत्रों में हालात अधिक गंभीर हैं, जहां लोगों को लगातार बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर लोग विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं और बिजली विभाग के कार्यालयों का घेराव कर रहे हैं।
AIADMK नेता ने कहा कि बिना पूर्व सूचना के हो रही बिजली कटौती से छोटे और मध्यम उद्योगों (Micro, Small and Medium Enterprises) पर भी बुरा असर पड़ा है। उद्योगों की उत्पादन क्षमता प्रभावित होने से आर्थिक गतिविधियों में बाधा आ रही है, जिससे रोजगार और व्यापार दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
पलानीस्वामी ने राज्य सरकार से मांग की कि वह बिजली आपूर्ति व्यवस्था को तुरंत सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए एक स्पष्ट योजना प्रस्तुत करे। उन्होंने कहा कि जनता को राहत देना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार जनता को सही जानकारी नहीं दे रही है और बिजली संकट को गंभीरता से नहीं ले रही है। उनके अनुसार, यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बयान राज्य में बिजली संकट को लेकर बढ़ती राजनीतिक बहस का हिस्सा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच और तीखी बयानबाज़ी देखने को मिल सकती है।





