
चेन्नई Chennai: तमिलनाडु में पक्षी-निरीक्षकों का समुदाय एक दुर्लभ और महत्वपूर्ण पारिस्थितिक घटना का जश्न मना रहा है, क्योंकि राज्य के समुद्र तट पर 'रेड-बैक्ड श्राइक' (Red-backed Shrike) पक्षी को देखा गया है। यह पक्षी आमतौर पर दक्षिण भारत में एक "भटकने वाला" (vagrant) पक्षी माना जाता है, क्योंकि इसका सामान्य प्रवास मार्ग और प्रजनन स्थल यूरोप और उत्तर-पश्चिमी भारत के कुछ हिस्सों में, काफी उत्तर की ओर स्थित हैं। इस पक्षी के देखे जाने को राज्य के पूर्वी तटों पर पाए जाने वाले विविध आवासों का एक प्रमाण माना जा रहा है।
इस पक्षी को सबसे पहले चेन्नई के अड्यार क्षेत्र में देखा गया था, जिसके बाद थूथुकुडी जिले में पेरियासामी पुरम के नमक के मैदानों (salt pans) के पास भी इसके देखे जाने की पुष्टि हुई। वन्यजीव संरक्षण विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी दुर्लभ प्रजातियों की उपस्थिति तटीय आर्द्रभूमियों और नमक के मैदानों को संरक्षित करने के महत्व को उजागर करती है; ये स्थान लंबी दूरी तय करने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए उनकी थका देने वाली यात्राओं के दौरान आराम करने और भोजन प्राप्त करने के महत्वपूर्ण पड़ावों के रूप में काम करते हैं।
बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) के विशेषज्ञ और स्थानीय पक्षी-विज्ञान समूह अब इन क्षेत्रों की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं, ताकि यह देखा जा सके कि इस प्रवास के मौसम में कोई अन्य असामान्य प्रजाति तो दिखाई नहीं देती। वे आम लोगों को भी 'नागरिक विज्ञान' (citizen science) में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, जिसके तहत लोग पक्षियों के देखे जाने की जानकारी दे सकते हैं; ये आंकड़े शोधकर्ताओं को यह समझने में मदद करते हैं कि बदलते वैश्विक मौसम के पैटर्न किस तरह पक्षियों के पारंपरिक प्रवास मार्गों में बदलाव ला रहे हैं।





