
तिरुवन्नामलाई। तमिलनाडु के प्रसिद्ध अरुणाचलेश्वर मंदिर में 'आदि' महीने की पूर्णिमा के अवसर पर मंगलवार को आस्था का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। अनुमान के अनुसार, 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र गिरिवलम (गिरि प्रदक्षिणा) कर भगवान अरुणाचलेश्वर के दर्शन किए। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन, जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने व्यापक सुरक्षा एवं सुविधाओं के इंतजाम किए थे।
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 'आदि' महीने की पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु पवित्र अरुणाचल पर्वत की परिक्रमा कर भगवान शिव की आराधना करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ गिरिवलम करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। यही कारण है कि तमिलनाडु ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अवसर पर तिरुवन्नामलाई पहुंचते हैं।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, 'आदि' पूर्णिमा मंगलवार शाम 7:32 बजे प्रारंभ हुई और बुधवार रात 8:54 बजे तक रहेगी। प्रशासन ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि इस अवधि में श्रद्धालु गिरिवलम कर सकते हैं। इसके चलते सोमवार रात से ही श्रद्धालुओं का तिरुवन्नामलाई पहुंचना शुरू हो गया था और मंगलवार सुबह से शहर की सड़कों तथा मंदिर परिसर में भारी भीड़ देखने को मिली।
गिरिवलम मार्ग, जिसकी लंबाई लगभग 14 किलोमीटर है, पर श्रद्धालु नंगे पैर भगवान शिव का स्मरण करते हुए परिक्रमा करते नजर आए। श्रद्धालुओं ने मार्ग में स्थित अष्ट लिंगम मंदिरों सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर पूजा-अर्चना की और आध्यात्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। कई श्रद्धालुओं ने परिवार के साथ गिरिवलम किया, जबकि बड़ी संख्या में साधु-संत और भक्ति मंडलियां भी परिक्रमा में शामिल हुईं।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए थे। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष ट्रैफिक योजना लागू की गई। पुलिस अधिकारियों ने भीड़ नियंत्रण के लिए प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की तथा लगातार निगरानी रखी ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न न हो।
मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, चिकित्सा सहायता, विश्राम स्थल और स्वच्छता की विशेष व्यवस्था की। विभिन्न स्थानों पर अस्थायी चिकित्सा शिविर स्थापित किए गए, जहां स्वास्थ्यकर्मी और एम्बुलेंस सेवाएं चौबीसों घंटे उपलब्ध रहीं। गर्म मौसम को देखते हुए स्वयंसेवी संगठनों और धार्मिक संस्थाओं ने भी जगह-जगह पानी, छाछ और भोजन का वितरण किया।
भीड़ को देखते हुए नगर प्रशासन ने साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया। गिरिवलम मार्ग और मंदिर परिसर में अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों की तैनाती की गई। कचरा संग्रहण के लिए विशेष व्यवस्था की गई ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसके अलावा अग्निशमन विभाग और आपदा प्रबंधन की टीमें भी पूरी तरह सतर्क रहीं।
स्थानीय व्यापारियों के लिए भी यह अवसर आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा। फूल, प्रसाद, धार्मिक सामग्री, भोजन और पेय पदार्थों की दुकानों पर दिनभर भारी भीड़ रही। होटल, धर्मशालाएं और लॉज भी लगभग पूरी तरह भरे रहे। व्यापारियों का कहना है कि आदि पूर्णिमा जैसे धार्मिक आयोजनों से स्थानीय कारोबार को काफी बढ़ावा मिलता है और हजारों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है।
श्रद्धालुओं ने बताया कि अरुणाचलेश्वर मंदिर में गिरिवलम करना उनके लिए केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अनुभव भी है। कई श्रद्धालु हर वर्ष आदि पूर्णिमा पर यहां पहुंचकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। उनका विश्वास है कि अरुणाचल पर्वत स्वयं भगवान शिव का स्वरूप है और इसकी परिक्रमा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे निर्धारित मार्गों का ही उपयोग करें, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतें तथा प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। अधिकारियों ने बताया कि पूरे आयोजन के दौरान सीसीटीवी कैमरों और नियंत्रण कक्ष के माध्यम से स्थिति पर लगातार नजर रखी गई। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी संबंधित विभागों को अलर्ट रखा गया था।
आदि पूर्णिमा के अवसर पर तिरुवन्नामलाई में उमड़ी लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ ने एक बार फिर इस ऐतिहासिक तीर्थस्थल की धार्मिक महत्ता को रेखांकित किया। प्रशासन के अनुसार, श्रद्धालुओं के सुरक्षित दर्शन और सुचारु गिरिवलम के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं, जिससे पूरे आयोजन के दौरान भक्तिभाव और अनुशासन का वातावरण बना रहा। अब बुधवार रात पूर्णिमा समाप्त होने तक श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।





