तमिलनाडू

बिना इंजन 6 किलोमीटर दौड़ गए 7 रेलवे कोच, पटरी से उतरते ही मचा हड़कंप

Kavita2
2 Nov 2026 10:16 AM IST
बिना इंजन 6 किलोमीटर दौड़ गए 7 रेलवे कोच, पटरी से उतरते ही मचा हड़कंप
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तिरुपत्तूर। तमिलनाडु के तिरुपत्तूर जिले में रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। जोलारपेट्टई जंक्शन के रेलवे यार्ड में खड़े सात खाली रेलवे कोच अचानक बिना इंजन के लुढ़कने लगे। ये कोच लगभग छह किलोमीटर तक रेलवे ट्रैक पर चलते रहे और थामलेरी मुथुर के पास पटरी से उतर गए। इस घटना के कारण बेंगलुरु और चेन्नई के बीच रेल यातायात प्रभावित हुआ। रेलवे अधिकारियों को संभावित टक्कर रोकने के लिए तत्काल आपातकालीन कदम उठाने पड़े। राहत की बात यह रही कि ड्यूटी पर तैनात एक गेटकीपर की सतर्कता से रेलवे प्रशासन को समय रहते घटना की जानकारी मिल गई और एक बड़ी दुर्घटना की आशंका टल गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना तमिलनाडु के महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शनों में शामिल जोलारपेट्टई के रेलवे यार्ड में हुई। यहां सात खाली रेलवे कोच खड़े थे। अचानक ये कोच बिना किसी इंजन के अपने स्थान से लुढ़कने लगे। बताया जा रहा है कि कोचों की गति धीरे-धीरे बढ़ती गई और वे रेलवे ट्रैक पर लगभग छह किलोमीटर की दूरी तय कर गए।

बिना इंजन के रेलवे कोचों का इतनी लंबी दूरी तक चलना सुरक्षा की दृष्टि से बेहद गंभीर घटना मानी जा रही है। सामान्य परिस्थितियों में रेलवे यार्ड में खड़े कोचों को सुरक्षित रखने के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर सात कोच अपने स्थान से कैसे लुढ़क गए और उन्हें समय रहते क्यों नहीं रोका जा सका।

जोलारपेट्टई जंक्शन से लुढ़कने के बाद ये कोच थामलेरी मुथुर के पास पहुंचकर पटरी से उतर गए। घटना के बाद रेलवे ट्रैक पर रेल परिचालन प्रभावित हुआ। बेंगलुरु और चेन्नई के बीच चलने वाली ट्रेनों की आवाजाही पर इसका असर पड़ा और रेलवे अधिकारियों को तत्काल सुरक्षा संबंधी निर्णय लेने पड़े।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि घटना के दौरान ड्यूटी पर मौजूद एक गेटकीपर ने असामान्य आवाज सुनकर खतरे को भांप लिया। बताया जा रहा है कि पटरी से उतरते कोचों की आवाज सुनने के बाद गेटकीपर ने तत्काल रेलवे अधिकारियों को सूचना दी। इस सतर्कता ने रेलवे प्रशासन को संभावित खतरे के बारे में समय रहते सचेत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सूचना मिलते ही रेलवे अधिकारियों ने आपातकालीन कार्रवाई शुरू की। बेंगलुरु से जोलारपेट्टई की ओर आने वाली ट्रेनों को अलग-अलग स्थानों पर रोकने के निर्देश जारी किए गए। इस कदम का उद्देश्य प्रभावित रेलवे ट्रैक पर किसी अन्य ट्रेन के पहुंचने और संभावित टक्कर की स्थिति पैदा होने से रोकना था।

रेलवे अधिकारियों की ओर से ट्रेनों को रोकने का निर्णय यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया। रेलवे ट्रैक पर बिना नियंत्रण के चल रहे कोचों या पटरी से उतरे डिब्बों की मौजूदगी अन्य ट्रेनों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। ऐसी परिस्थितियों में रेल परिचालन को अस्थायी रूप से रोकना एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय होता है।

इस घटना ने रेलवे यार्ड में खड़े कोचों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सामान्य तौर पर रेलवे यार्ड में खड़े डिब्बों को अनियंत्रित गति से चलने से रोकने के लिए ब्रेक और अन्य निर्धारित सुरक्षा उपाय अपनाए जाते हैं। इसके बावजूद सात कोचों का लगभग छह किलोमीटर तक लुढ़क जाना जांच का महत्वपूर्ण विषय हो सकता है।

हालांकि, अभी उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कोचों के लुढ़कने का वास्तविक कारण क्या था। क्या यह तकनीकी खराबी के कारण हुआ, ब्रेक संबंधी समस्या थी या सुरक्षा प्रक्रिया में किसी प्रकार की चूक हुई, इसका निर्धारण आधिकारिक जांच के बाद ही किया जा सकेगा।

रेलवे परिचालन में जोलारपेट्टई जंक्शन का महत्वपूर्ण स्थान है। यह तमिलनाडु के प्रमुख रेल मार्गों में शामिल है और चेन्नई तथा बेंगलुरु के बीच रेल संपर्क में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे व्यस्त रेल मार्ग पर किसी भी प्रकार की बाधा का प्रभाव कई ट्रेनों की आवाजाही पर पड़ सकता है।

घटना के बाद रेलवे प्रशासन के सामने सबसे पहली चुनौती प्रभावित रेल मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करना रही। पटरी से उतरे कोचों की स्थिति का आकलन करना और अन्य ट्रेनों को सुरक्षित दूरी पर रोकना आवश्यक था। इसके बाद ट्रैक को परिचालन के लिए सुरक्षित बनाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है।

रेलवे में ऐसी घटनाओं के दौरान तकनीकी और परिचालन संबंधी जांच की आवश्यकता पड़ सकती है। जांच में यह देखा जा सकता है कि कोचों को किस स्थिति में खड़ा किया गया था, उनकी ब्रेक व्यवस्था कैसी थी और यार्ड में निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन हुआ था या नहीं।

इसके अलावा यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कोचों के लुढ़कने की जानकारी रेलवे नियंत्रण कक्ष तक कब पहुंची और संबंधित अधिकारियों ने किस समय ट्रेनों को रोकने के निर्देश दिए। इन तथ्यों से घटना की पूरी समयरेखा स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है।

इस घटना में गेटकीपर की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। रेलवे सुरक्षा व्यवस्था में ट्रैक पर तैनात कर्मचारियों की सतर्कता कई बार गंभीर दुर्घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण साबित होती है। असामान्य आवाज या गतिविधि की तत्काल सूचना मिलने से परिचालन नियंत्रण कक्ष आवश्यक सुरक्षा कदम उठा सकता है।

रेलवे यार्ड में खड़े खाली कोचों को सामान्य यात्री ट्रेनों की तरह इंजन से नियंत्रित नहीं किया जा रहा था। यही कारण है कि उनका बिना इंजन के आगे बढ़ना गंभीर चिंता का विषय है। यदि ऐसे कोच किसी व्यस्त ट्रैक पर पहुंच जाएं, तो संभावित दुर्घटना का जोखिम बढ़ सकता है।

हालांकि, उपलब्ध विवरण में इस घटना के कारण किसी व्यक्ति के घायल होने या जानमाल के नुकसान की पुष्टि नहीं की गई है। इसी तरह कितनी ट्रेनों को रोका गया, कितनी सेवाएं विलंबित हुईं और रेल यातायात पूरी तरह कब बहाल हुआ, इसकी विस्तृत जानकारी भी सामने नहीं आई है।

रेलवे अधिकारियों के लिए अब इस घटना के कारणों की पहचान करना महत्वपूर्ण होगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। विशेष रूप से रेलवे यार्ड में खड़े कोचों की सुरक्षा, ब्रेक व्यवस्था और कर्मचारियों की निगरानी से संबंधित प्रक्रियाओं की समीक्षा आवश्यक हो सकती है।

फिलहाल तमिलनाडु के जोलारपेट्टई जंक्शन से सात खाली रेलवे कोचों का बिना इंजन के लगभग छह किलोमीटर तक लुढ़कना रेलवे सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बन गया है। थामलेरी मुथुर के पास कोचों के पटरी से उतरने के बाद बेंगलुरु-चेन्नई रेल मार्ग पर सेवाएं प्रभावित हुईं। गेटकीपर की सतर्कता और रेलवे अधिकारियों की तत्काल कार्रवाई से संभावित टक्कर को रोकने में मदद मिली। अब घटना के वास्तविक कारणों और सुरक्षा व्यवस्था में संभावित खामियों का पता आधिकारिक जांच से ही चल सकेगा।

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