
Tamil Nadu तमिलनाडु: श्रीलंका की हिरासत से रिहा किए गए तमिलनाडु के 15 मछुआरे बुधवार सुबह भारत लौट आए। ये सभी मछुआरे रामेश्वरम के रहने वाले हैं, जिन्हें इस साल की शुरुआत में श्रीलंकाई नौसेना ने समुद्री सीमा पार कर गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
मछुआरों की रिहाई हाल ही में कोलंबो में हुई उच्चस्तरीय बातचीत के बाद संभव हो सकी। इस बातचीत में भारत के उपराष्ट्रपति के. एस. राधाकृष्णन और श्रीलंका के मंत्रियों के बीच मुद्दे पर चर्चा की गई थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच समझौते और कूटनीतिक प्रयासों के परिणामस्वरूप मछुआरों को रिहा किया गया और उन्हें भारत वापस भेजा गया।
बुधवार सुबह सभी 15 मछुआरे सुरक्षित रूप से तमिलनाडु पहुंचे, जहां उनके परिजनों ने राहत की सांस ली और उनका स्वागत किया। लंबे समय तक हिरासत में रहने के कारण परिवारों में चिंता का माहौल था, जो अब उनकी वापसी के बाद खत्म हुआ।
तमिलनाडु मत्स्य विभाग ने मछुआरों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए विशेष परिवहन व्यवस्था की है। विभाग के अधिकारियों ने कहा कि सभी मछुआरों को सुरक्षित उनके गांवों तक भेजा जा रहा है और उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम को दोनों देशों के बीच मछुआरों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है। भारत और श्रीलंका के बीच अक्सर समुद्री सीमा उल्लंघन को लेकर मछुआरों की गिरफ्तारी के मामले सामने आते रहे हैं, जिससे द्विपक्षीय संबंधों पर भी असर पड़ता है।
उप राष्ट्रपति के. एस. राधाकृष्णन का दो दिवसीय श्रीलंका दौरा किसी भारतीय उपराष्ट्रपति की ओर से इस द्वीप राष्ट्र का पहला द्विपक्षीय (बाइलेटरल) दौरा बताया गया है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच मछुआरों की सुरक्षा, समुद्री सीमाओं और सहयोग से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कूटनीतिक बातचीत से भविष्य में मछुआरों की गिरफ्तारी की घटनाओं में कमी आ सकती है और दोनों देशों के बीच सहयोग को मजबूती मिलेगी।
मछुआरों की वापसी से रामेश्वरम और आसपास के क्षेत्रों में खुशी का माहौल है, वहीं प्रशासन ने भी इस मामले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने को एक सकारात्मक कदम बताया है।





