तमिलनाडू

एक सप्ताह में 15 पालतू कुत्तों को फेंक दिया गया, आश्रय स्थलों में जगह की कमी है, मालिकों पर जुर्माना लगाया जाएगा

Tulsi Rao
21 Sept 2026 12:57 PM IST
एक सप्ताह में 15 पालतू कुत्तों को फेंक दिया गया, आश्रय स्थलों में जगह की कमी है, मालिकों पर जुर्माना लगाया जाएगा
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चेन्नई: चेन्नई में पालतू कुत्तों को बेसहारा छोड़ने के मामलों में बढ़ोतरी से चिंता बढ़ गई है। जानवरों के अधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं ने शेल्टर में जगह की कमी पर चिंता जताई है।

हाल ही में सामने आए कुछ मामलों में हाईवे पर तेजी से भागता हुआ जर्मन शेफर्ड, सीवेज नाले में बैठा लैब्राडोर और बारिश में छोड़ा गया दिव्यांग स्पिट्ज़ शामिल हैं। कार्यकर्ताओं का अनुमान है कि शहर में हर हफ़्ते कम से कम 15 पालतू कुत्तों (जिनमें माइक्रोचिप लगे कुत्ते भी शामिल हैं) को बेसहारा छोड़ दिया जाता है।

उदाहरण के लिए, पिछले कुछ हफ़्तों में शिह त्ज़ू, टेरियर और हस्की जैसी नस्लों के कुत्तों को बेसहारा छोड़ा गया है। इन मामलों का हवाला देते हुए, कार्यकर्ताओं ने ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) से अपील की है कि वे पालतू जानवरों को छोड़ने वाले मालिकों पर भारी जुर्माना लगाएं। उन्होंने कहा कि अगर इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो सड़क पर घूमने वाले कुत्तों की संख्या बढ़ सकती है, जिससे कुत्तों के काटने की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं।

GCC ने पिछले साल पालतू कुत्तों का रजिस्ट्रेशन और माइक्रोचिपिंग अनिवार्य कर दिया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी पालतू कुत्तों को रेबीज़ का टीका लगे और उन्हें बेसहारा छोड़ने से रोका जा सके। हालांकि, अब तक नगर निकाय ने पालतू जानवरों को छोड़ने वाले मालिकों को केवल कानूनी कार्रवाई की चेतावनी ही दी है।

NGO 'होप फॉर क्रिटर्स' की संस्थापक आर.ए. कीर्तना ने कहा कि उन्हें जानवरों को खाना खिलाने वालों या उन्हें बचाने वालों से रोज़ाना लगभग पांच कॉल आते हैं, जिनमें उनसे बेसहारा कुत्तों को रखने के लिए कहा जाता है। उन्होंने कहा, "हमारे पास जगह की कमी है। मैं अभी उनमें से पांच के लिए जगह बनाने की कोशिश कर रही हूं। फिर भी, और भी अनुरोध आ रहे हैं।" उन्होंने यह भी बताया कि बेसहारा छोड़े गए कुछ कुत्तों में कीड़े पड़ने और त्वचा की गंभीर बीमारियां पाई गईं।

यह दावा करते हुए कि ब्रीडर भी न बिकने वाले कुत्तों को बेसहारा छोड़ देते हैं, उन्होंने GCC से अपील की कि वे 25,000 रुपये से 50,000 रुपये तक का जुर्माना लगाएं और मालिकों पर 'पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960' के तहत मामला दर्ज करें।

बेसंत मेमोरियल एनिमल डिस्पेंसरी के निदेशक श्रवण कृष्णन ने कहा कि GCC को पालतू जानवरों के रजिस्ट्रेशन और जुर्माने से इकट्ठा हुए फंड का इस्तेमाल कुत्तों की भलाई और शेल्टर बनाने के लिए करना चाहिए। माइक्रोचिपिंग जारी रखने, ब्रीडर के लिए नियम बनाने और ज़्यादा जागरूकता फैलाने की मांग करते हुए उन्होंने कहा,

"शेल्टर के माहौल में, जहां कई आवारा कुत्ते होते हैं, पालतू कुत्तों को रखना मुश्किल होता है। उन्हें घरों में पालना सबसे अच्छा होता है।" श्रवण ने यह भी बताया कि कुत्तों को गोद लेने की दर बहुत कम है। उन्होंने कहा, "छोड़ दिए जाने वाले हर 100 कुत्तों में से सिर्फ़ पाँच को ही गोद लिया जाता है।"

ROA शेल्टर चलाने वाले दिनेश बाबा ने माइक्रोचिपिंग के असर पर सवाल उठाया, क्योंकि कुत्ते अभी भी छोड़े जा रहे हैं।

संपर्क करने पर, GCC के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जे. कमल हुसैन ने कहा कि कॉर्पोरेशन 25 सितंबर को होने वाली काउंसिल मीटिंग में कुत्तों को छोड़ने पर जुर्माना लगाने का प्रस्ताव पास करेगा और जुर्माने की रकम उसी दिन तय की जाएगी। उन्होंने कहा, "जुर्माना लागू करने से पहले हमने सभी के रजिस्ट्रेशन का इंतज़ार किया। अब तक 78,000 रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं और बिना लाइसेंस वाले कुत्ते रखने, पट्टा (leash) न बांधने जैसे नियमों के उल्लंघन के लिए लगभग 7 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया है।"

इस बीच, TN एनिमल वेलफेयर बोर्ड के CEO डॉ. पी. चोकलिंगम ने कहा कि बोर्ड ने पिछले हफ़्ते MAWS विभाग को पालतू और आवारा जानवरों से जुड़े नियम (bylaws) सौंपे थे। उन्होंने कहा कि एक बार लागू होने के बाद, स्थानीय निकायों को नियमों के उल्लंघन के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का अधिकार मिल जाएगा।

इस महीने तिरुनेलवेली, सलेम, मदुरै, तिरुचि, चेंगलपट्टू और तिरुवल्लुर में एक-एक शेल्टर शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि सभी 38 ज़िलों में भी शेल्टर बनाए जा रहे हैं, जिनमें से हर एक में 70 कुत्तों को रखने की क्षमता होगी, जबकि स्थानीय निकाय राज्य भर में 72 जगहों पर शेल्टर बना रहे हैं, जिनमें से हर एक में 150 कुत्तों को रखने की क्षमता होगी।

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