तमिलनाडू

2024 में महिलाओं के खिलाफ 11,363 अपराध दर्ज: NCRB

Ratna Netam
8 May 2026 2:56 PM IST
2024 में महिलाओं के खिलाफ 11,363 अपराध दर्ज: NCRB
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Tamil Nadu.तमिलनाडु: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में महिलाओं के खिलाफ कुल 11,363 अपराध दर्ज किए गए। यह आंकड़ा पिछले वर्षों के मुकाबले एक गंभीर सामाजिक समस्या की ओर संकेत करता है और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर देश में बढ़ती चिंताओं को उजागर करता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि इन मामलों में घरेलू हिंसा, बलात्कार, यौन उत्पीड़न, स्टalking और महिला अपहरण जैसे अपराध शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संख्या केवल आधिकारिक दर्ज मामलों को दर्शाती है, जबकि वास्तविक स्थिति इससे भी अधिक गंभीर हो सकती है, क्योंकि कई पीड़ित अभी भी अपराध की रिपोर्ट दर्ज कराने में हिचकिचाहट महसूस करती हैं।
NCRB के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में सबसे अधिक दर्ज अपराध शहरी क्षेत्रों में हुए, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी गई। रिपोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि युवतियों और लड़कियों के खिलाफ अपराध विशेष रूप से बढ़े हैं, जो समाज में जागरूकता और सुरक्षा की तत्काल आवश्यकता को दर्शाता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों की इतनी बड़ी संख्या समाज में लैंगिक असमानता और सामाजिक संरचनाओं की कमजोरियों को दर्शाती है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सुरक्षा उपायों, जागरूकता अभियानों और कानूनी प्रक्रियाओं को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।
केंद्रीय और राज्य सरकारें महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई योजनाओं और कानूनों को लागू कर रही हैं। इनमें नारी सुरक्षा हेल्पलाइन, महिला थाने, महिला हेल्पलाइन नंबर और सामुदायिक जागरूकता अभियान शामिल हैं। इसके बावजूद, NCRB के आंकड़े यह दिखाते हैं कि इन अपराधों की संख्या अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पुलिस और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रशिक्षण और संसाधनों में सुधार करने की आवश्यकता है, ताकि महिलाओं के खिलाफ अपराधों की जांच और न्याय प्रक्रिया और तेज और प्रभावी हो सके। इसके साथ ही समाज में महिलाओं की भूमिका और उनके अधिकारों के प्रति सम्मान बढ़ाने की भी जरूरत है।
सामाजिक कार्यकर्ता और एनजीओ इस रिपोर्ट को गंभीरता से देख रहे हैं। उनका मानना है कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या को कम करने के लिए केवल कानून ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज में मानसिकता और सांस्कृतिक बदलाव भी जरूरी है।
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