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चेन्नई। तमिल सिनेमा के सुपरस्टार से राजनेता और फिर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने थलपति विजय ने सत्ता में अपने पहले 100 दिन पूरे कर लिए हैं। पर्दे पर भ्रष्टाचार और व्यवस्था से लड़ने वाले नायक की भूमिका निभाने वाले विजय के सामने अब असली परीक्षा सरकार चलाने की है। 17 अगस्त 2026 को उनकी सरकार के 100 दिन पूरे होने के साथ ही सवाल उठ रहा है कि फिल्मों के ‘हीरो’ विजय वास्तविक राजनीति में कितने सफल रहे और इन 100 दिनों में तमिलनाडु की जनता को आखिर क्या मिला?
तमिलगा वेत्री कझगम यानी TVK की सरकार ने अपने 100 दिनों का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए कल्याणकारी योजनाओं, किसानों को राहत, महिला सुरक्षा, रोजगार और निवेश को अपनी प्रमुख उपलब्धियों के रूप में गिनाया है। सरकार ने अपने 100 दिनों की उपलब्धियों को लेकर विशेष वीडियो भी जारी किया है।
पहली बार चुनाव और सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी
विजय ने फरवरी 2024 में तमिलगा वेत्री कझगम का गठन कर सक्रिय राजनीति में कदम रखा था। 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने पहली बार चुनावी मैदान में उतरकर बड़ा उलटफेर किया। TVK 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी और कांग्रेस के समर्थन के बाद विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश किया। 10 मई को नई सरकार का गठन हुआ।
तमिलनाडु की राजनीति के लिहाज से यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण रहा। दशकों से राज्य की राजनीति मुख्य रूप से DMK और AIADMK के आसपास घूमती रही थी। विजय की जीत ने इस पारंपरिक राजनीतिक मुकाबले को बदल दिया और पहली बार सरकार चलाने वाले TVK के सामने चुनावी वादों को धरातल पर उतारने की चुनौती आ गई।
₹67,542 करोड़ के निवेश समझौते
विजय सरकार अपने शुरुआती 100 दिनों की सबसे बड़ी उपलब्धियों में निवेश को गिना रही है। राज्य में आयोजित निवेश पहल के तहत 97 समझौतों के जरिए ₹67,542 करोड़ के निवेश से जुड़े करार हुए हैं। इन परियोजनाओं से एक लाख से अधिक रोजगार पैदा होने का अनुमान है। सरकार का व्यापक लक्ष्य ₹1 लाख करोड़ के निवेश को आकर्षित करने का है।
इन समझौतों में मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस और अन्य क्षेत्रों से जुड़े निवेश शामिल हैं। विदेशी कंपनियों से जुड़े 16 प्रोजेक्ट के लिए करीब ₹15,050 करोड़ के समझौते भी हुए हैं। इनमें Saint-Gobain, Super Micro Computer और Daimler India Commercial Vehicles जैसी कंपनियों के प्रोजेक्ट शामिल हैं।
हालांकि निवेश समझौते और वास्तविक निवेश में अंतर होता है। विजय सरकार की असली परीक्षा यह होगी कि इन समझौतों में से कितनी परियोजनाएं जमीन पर उतरती हैं और उनसे कितने वास्तविक रोजगार पैदा होते हैं।
किसानों के लिए कर्जमाफी बड़ा फैसला
किसानों को राहत देना विजय सरकार के शुरुआती एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। सरकार ने सहकारी बैंकों से लिए गए फसल ऋण को लेकर कर्जमाफी की योजना आगे बढ़ाई है। 100 दिन पूरे होने पर सरकार ने ₹75 हजार तक की सीमा वाले फसल ऋण की राहत का दायरा बढ़ाने का फैसला किया। नई घोषणा से करीब 1.38 लाख अतिरिक्त किसानों को लाभ मिलने और लगभग ₹953 करोड़ की राहत दिए जाने की बात कही गई है।
इससे पहले सरकार 14 लाख से ज्यादा किसानों को शामिल करने वाले सहकारी ऋण राहत कार्यक्रम को अपनी प्रमुख उपलब्धियों में गिना चुकी थी।
कृषि प्रधान इलाकों में सरकार के इस फैसले का राजनीतिक महत्व भी है। हालांकि इसका दीर्घकालिक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कर्ज राहत के साथ किसानों की आय, सिंचाई, बाजार और कृषि लागत से जुड़ी समस्याओं पर सरकार कितना काम करती है।
717 शराब दुकानों और बार पर कार्रवाई
विजय सरकार ने शराब नीति को लेकर भी शुरुआती दिनों में बड़ा संदेश देने की कोशिश की। सरकार के मुताबिक स्कूलों और धार्मिक स्थलों के आसपास स्थित 717 शराब बिक्री केंद्रों या बार को बंद किया गया है। इसे महिलाओं और परिवारों से जुड़े सामाजिक मुद्दों पर सरकार के कदम के रूप में पेश किया गया।
तमिलनाडु में शराब लंबे समय से बड़ा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा रही है। इसलिए सरकार के इस फैसले पर काफी चर्चा हुई। हालांकि विपक्ष और सामाजिक संगठनों की नजर इस बात पर भी रहेगी कि सरकार आने वाले वर्षों में शराब नीति को लेकर कितने व्यापक बदलाव करती है।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष फोर्स
महिला सुरक्षा को विजय सरकार ने अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। सरकार ने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष ‘सिंगापेन’ फोर्स तैयार करने का दावा किया है। इसके अलावा ड्रग्स के खिलाफ अलग-अलग क्षेत्रों में विशेष टीमों के गठन को भी शुरुआती उपलब्धियों में शामिल किया गया है।
महिला सुरक्षा पर विजय ने चुनाव से पहले भी जोर दिया था। ऐसे में विशेष फोर्स का गठन राजनीतिक वादे को प्रशासनिक कार्रवाई में बदलने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। इसका वास्तविक मूल्यांकन अपराध के आंकड़ों और पुलिस की कार्रवाई के आधार पर आने वाले समय में हो सकेगा।
छात्रों को लैपटॉप और मुफ्त बिजली
सरकार के 100 दिन के रिपोर्ट कार्ड में शिक्षा और घरेलू खर्च से जुड़ी योजनाओं को भी प्रमुखता दी गई है। सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए लैपटॉप और साइकिल जैसी सुविधाओं के लिए बड़े बजट का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा सरकार ने 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली से संबंधित फैसले को भी अपनी प्रमुख उपलब्धियों में गिनाया है।
युवाओं के कौशल विकास को लेकर भी सरकार ने कार्यक्रम शुरू किए हैं। 100 दिन की उपलब्धियों में करीब 13 लाख लाभार्थियों को कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने की योजना का उल्लेख किया गया है।
ग्रामीण विकास के लिए ₹6 हजार करोड़ का प्लान
विजय सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए TN-VETTRI कार्यक्रम को भी प्रमुख योजना के रूप में सामने रखा है। सरकार के 100 दिन के रिपोर्ट कार्ड के मुताबिक इसके लिए ₹6,000 करोड़ की योजना तैयार की गई है। वहीं आवास क्षेत्र में ‘वेत्री वीडू’ योजना के लिए करीब ₹3,500 करोड़ का प्रावधान बताया गया है।
सरकार का दावा है कि इन योजनाओं से ग्रामीण बुनियादी ढांचे, गरीब परिवारों के आवास और रोजगार की स्थिति सुधारने में मदद मिलेगी। हालांकि योजनाओं की घोषणा के बाद अब चुनौती इन्हें समय पर पूरा करने और लाभार्थियों तक पहुंचाने की होगी।
विपक्ष बोला, पुरानी योजनाओं पर नया नाम
विजय सरकार अपने 100 दिनों को बदलाव की शुरुआत बता रही है, लेकिन विपक्ष इससे सहमत नहीं है। तमिलनाडु के नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन ने विजय सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि TVK सरकार पिछली DMK सरकार की योजनाओं पर नया नाम और अपना ‘स्टिकर’ लगाकर पेश कर रही है। उन्होंने विजय को ‘डमी CM’ तक कहा।
यही कारण है कि 100 दिनों के रिपोर्ट कार्ड को केवल सरकारी दावों के आधार पर नहीं देखा जा सकता। विपक्ष की चुनौती यह है कि वह यह साबित करे कि किन योजनाओं की शुरुआत पिछली सरकार के दौरान हुई थी, जबकि विजय सरकार के लिए चुनौती नए फैसलों और उनके वास्तविक परिणामों को दिखाने की है।
तो रियल लाइफ में विजय हीरो या जीरो?
100 दिन किसी सरकार के पूरे कार्यकाल का फैसला करने के लिए बहुत छोटा समय होता है। फिर भी इस अवधि से सरकार की दिशा और प्राथमिकताओं का अंदाजा जरूर मिलता है। विजय सरकार ने शुरुआत में कल्याणकारी योजनाओं, किसान राहत, महिला सुरक्षा, शराब नियंत्रण और निवेश पर तेजी दिखाने की कोशिश की है।
सबसे मजबूत दावा निवेश के मोर्चे पर दिखाई देता है, जहां ₹67,542 करोड़ के 97 समझौते और एक लाख से ज्यादा संभावित नौकरियों का आंकड़ा सामने आया है। दूसरी तरफ विपक्ष का आरोप है कि कई योजनाएं नई नहीं बल्कि पिछली सरकार की नीतियों का बदला हुआ रूप हैं।
इसलिए विजय को अभी ‘हीरो’ या ‘जीरो’ घोषित करना जल्दबाजी होगी। फिल्मों में नतीजा तीन घंटे में सामने आ जाता है, लेकिन राजनीति में असली रिपोर्ट कार्ड पांच साल में बनता है। पहले 100 दिनों में विजय ने योजनाओं और बड़े निवेश समझौतों के जरिए अपनी सरकार की दिशा जरूर दिखाई है। अब उनकी असली परीक्षा इन घोषणाओं को जमीन पर उतारने, नौकरियां पैदा करने, कानून-व्यवस्था सुधारने और चुनावी वादों को पूरा करने की होगी।
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