
चेन्नई: मद्रास हाई कोर्ट ने मंगलवार को आदेश दिया कि पूर्व मंत्री और DMK नेता के. पोनमुडी और उनके बेटे गौतम सिगामणि के खिलाफ़ 'प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA) के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग का मामला रद्द किया जाए, क्योंकि उन्हें मुख्य अपराध (प्रेडिकेट ऑफ़ेंस) के मामले में बरी कर दिया गया था।
चीफ जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की बेंच ने पोनमुडी और उनके बेटे की याचिकाओं पर यह आदेश दिया। पोनमुडी और उनके बेटे ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला रद्द करने के लिए कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था। उन्होंने दलील दी थी कि विल्लुपुरम की स्पेशल कोर्ट ने उन्हें मुख्य अपराध के मामले में सभी आरोपों से बरी कर दिया है।
मुख्य अपराध का मामला विल्लुपुरम की ज़िला क्राइम ब्रांच पुलिस ने दर्ज किया था। यह मामला 2007-11 के दौरान पोनमुडी के पास माइंस और मिनरल्स विभाग होने पर उनके करीबी रिश्तेदारों (जिनमें उनके बेटे भी शामिल थे) को लाल रेत (red sand) की खदान का लाइसेंस देने में कथित अनियमितताओं से जुड़ा था।





