
चेन्नई: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के हालिया आदेश के बावजूद, जिसमें अधिकारियों को पेरुम्बक्कम के पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों से ठोस कचरे को दूर रखने का निर्देश दिया गया था, स्थानीय पंचायत कथित तौर पर 2,500 साल से भी पुरानी संरक्षित महापाषाण (मेगालिथिक) साइट और पेरुम्बक्कम रिज़र्व फ़ॉरेस्ट के पास नगरपालिका का कचरा फेंक रही है और उसे जला रही है। इससे पुरातात्विक अवशेषों को नुकसान पहुँचने और जंगल में आग लगने का खतरा पैदा हो गया है।
स्थानीय निवासियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि पेरुम्बक्कम पंचायत जंगल और पुरातात्विक स्थल के पास खुली जगहों का इस्तेमाल कचरा फेंकने के लिए कर रही है और समय-समय पर कचरे में आग भी लगा दी जाती है। पेड़-पौधों के पास कचरा जलाने से आग के रिज़र्व फ़ॉरेस्ट में फैलने का डर भी पैदा हो गया है, खासकर सूखे मौसम में।
NGT की दक्षिणी बेंच ने 22 सितंबर के अपने आदेश में यह स्पष्ट कर दिया था कि पेरुम्बक्कम में संरक्षित महापाषाणकालीन सिस्ट (cists) और केर्न्स (cairns) के पास कचरा प्रबंधन या कानून के खिलाफ़ अन्य गतिविधियाँ नहीं की जा सकतीं।





