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Sikkim सिक्किम। राज्य के सामाजिक कल्याण विभाग (Social Welfare Department) ने पिछले तीन वर्षों में प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए छात्रों द्वारा किए जा रहे आवेदनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की है। विभाग के अनुसार, विभिन्न श्रेणियों — अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदायों — के छात्रों में छात्रवृत्ति योजनाओं के प्रति जागरूकता और भागीदारी तेजी से बढ़ी है। हालांकि, विभाग यह भी मानता है कि समय पर फंड रिलीज़ न होने और सख्त आय सीमा के कारण पात्र छात्र भी योजना का पूरा लाभ नहीं ले पा रहे हैं। विभाग की अतिरिक्त सचिव (छात्रवृत्ति) बандना छेत्री ने बताया, “मुझे लगता है कि एक बड़ी वजह यह है कि कई छात्र आय सीमा के कारण पात्र नहीं ठहराए जाते। कई परिवारों की आय तकनीकी रूप से तय सीमा से थोड़ी अधिक होती है, लेकिन वास्तविक आर्थिक स्थिति में वे अब भी सहायता के जरूरतमंद हैं। इसलिए वे आवेदन करने से भी हिचकिचाते हैं।”
सिक्किम में छात्रवृत्ति आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल हो चुकी है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और आवेदन प्रक्रिया आसान हुई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में लगभग 8,500 छात्रों ने प्री- और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्तियों के लिए आवेदन किया था, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 13,000 से अधिक हो गया है। इस वृद्धि को सरकार ने ‘सकारात्मक संकेत’ बताया है, लेकिन साथ ही यह स्वीकार किया गया है कि आवंटन राशि और वास्तविक भुगतान के बीच का अंतर अभी भी एक प्रमुख समस्या है। अधिकारियों का कहना है कि केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर फंड रिलीज़ में देरी होने से छात्रवृत्तियों का समय पर भुगतान नहीं हो पाता। कई बार छात्रों को सेमेस्टर समाप्त होने तक राशि नहीं मिलती, जिससे उनकी पढ़ाई और फीस जमा करने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इस समस्या को दूर करने के लिए विभाग ने वित्त विभाग और शिक्षा मंत्रालय के साथ समन्वय बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, भविष्य में छात्रवृत्ति वितरण को समयबद्ध करने के लिए “डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT)” प्रणाली को और प्रभावी बनाया जा रहा है। साथ ही, आय सीमा को लेकर पुनर्मूल्यांकन का प्रस्ताव भी सरकार को भेजा गया है ताकि अधिक से अधिक योग्य छात्र योजना के दायरे में आ सकें। स्थानीय शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सिक्किम में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ने के बावजूद आर्थिक असमानता अभी भी एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में छात्रवृत्ति योजनाओं का समय पर और व्यापक रूप से लागू होना राज्य के शैक्षणिक विकास के लिए अनिवार्य है। विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि आगामी वित्तीय वर्ष से नई श्रेणियों में दिव्यांग और एकल माता-पिता वाले परिवारों के बच्चों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसका उद्देश्य शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करना और हर वर्ग के छात्र को वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराना है।
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