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लाचेन लाचुंग में बढ़ा पर्यटन कचरे की समस्या
गंगटोक: सिक्किम के खूबसूरत पर्यटन स्थलों लाचेन और लाचुंग में पर्यटकों की बढ़ती संख्या ने स्थानीय प्रशासन और लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही पर्यटकों की आवाजाही के कारण अब तरल कचरे (Liquid Waste) के प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
उत्तर सिक्किम के ये दोनों क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऊंचे पहाड़ों, झीलों और हिमालयी नजारों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं। हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं, लेकिन सीमित संसाधनों वाले इन इलाकों में बढ़ता दबाव पर्यावरण के लिए चुनौती बनता जा रहा है।
रोजाना हजारों पर्यटकों की आवाजाही
स्थानीय पर्यटन से जुड़े लोगों के अनुसार, लाचेन और लाचुंग में पीक सीजन के दौरान प्रतिदिन करीब 3 हजार से 4 हजार पर्यटक पहुंच सकते हैं। इतनी बड़ी संख्या में पर्यटकों के आने से होटल, होमस्टे और अन्य सुविधाओं पर दबाव बढ़ जाता है।
इन क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता, सीवेज सिस्टम और कचरा निपटान जैसी सुविधाएं मैदानी इलाकों की तुलना में सीमित हैं। ऐसे में बढ़ता पर्यटन स्थानीय पर्यावरण के लिए चिंता का कारण बन रहा है।
तरल कचरे से पर्यावरण पर खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि ठोस कचरे के साथ-साथ तरल कचरा भी पहाड़ी इलाकों में बड़ी समस्या बन सकता है। होटल और रेस्तरां से निकलने वाला गंदा पानी यदि सही तरीके से साफ नहीं किया गया तो यह नदियों, झरनों और आसपास के प्राकृतिक स्रोतों को प्रभावित कर सकता है।
हिमालयी क्षेत्रों में जल स्रोत बेहद संवेदनशील होते हैं, इसलिए सीवेज प्रबंधन की बेहतर व्यवस्था जरूरी मानी जा रही है।
स्थानीय प्रशासन के सामने चुनौती
बढ़ते पर्यटन को देखते हुए स्थानीय प्रशासन के सामने विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। पर्यटन से रोजगार और आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं, लेकिन इसके साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी जरूरी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ ही कचरा प्रबंधन की सुविधाओं को भी मजबूत किया जाना चाहिए।
प्लास्टिक और कचरे पर पहले से सख्ती
लाचेन समेत उत्तर सिक्किम के कई क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के लिए प्लास्टिक उपयोग को नियंत्रित करने और स्वच्छता नियमों को लागू करने की कोशिशें की जाती रही हैं।
स्थानीय समुदाय भी प्राकृतिक संसाधनों को बचाने के लिए पर्यटकों से जिम्मेदारी के साथ यात्रा करने की अपील करता है।
टिकाऊ पर्यटन पर जोर
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि सिक्किम जैसे संवेदनशील हिमालयी क्षेत्रों में सस्टेनेबल टूरिज्म को बढ़ावा देना जरूरी है। इसके तहत सीमित संख्या में पर्यटकों की अनुमति, बेहतर कचरा प्रबंधन और स्थानीय संसाधनों की सुरक्षा जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
लाचेन और लाचुंग की प्राकृतिक खूबसूरती को बनाए रखने के लिए अब जरूरी है कि पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जाए।
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