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मनोनीत राज्यपाल का शपथ ग्रहण टालने की मांग
गुवाहाटी: सिक्किम बार एसोसिएशन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से आग्रह किया है कि वे राज्यपाल के रूप में नामित दुष्यंत कुमार गौतम के शपथ ग्रहण समारोह को तब तक टाल दें, जब तक कि उत्तराखंड में अंकिता भंडारी की 2022 में हुई हत्या से जुड़ी चिंताओं का समाधान नहीं हो जाता।
नामित राज्यपाल का शपथ ग्रहण 19 अक्टूबर को होना है।
एसोसिएशन ने 18 अक्टूबर को राष्ट्रपति भवन को एक अनुरोध भेजा है। इसमें मांग की गई है कि जब तक आरोपों की जांच नहीं हो जाती, जांच की मांगों पर विचार नहीं हो जाता और संबंधित अधिकारी मामले का निपटारा नहीं कर देते, तब तक नियुक्ति प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया जाए।
एसोसिएशन के महासचिव द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में कहा गया है कि यह मामला संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर असर डाल सकता है। इसमें यह भी कहा गया है कि उच्च सार्वजनिक पदों पर नियुक्त होने वाले व्यक्तियों को ईमानदारी के कड़े मानकों का पालन करना चाहिए।
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि वह नामित राज्यपाल को दोषी नहीं ठहरा रहा है। चूंकि यह मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है, इसलिए उनके इस कदम को आरोपों पर कोई फैसला नहीं माना जाना चाहिए।
एसोसिएशन का तर्क है कि इस नियुक्ति को लेकर खड़े हुए विवाद के कारण शपथ ग्रहण की तारीख पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
पत्र में दो संवैधानिक प्रावधानों की ओर ध्यान दिलाया गया है। अनुच्छेद 159 में उस शपथ का उल्लेख है जो राज्यपाल को पद संभालने से पहले लेनी होती है, जबकि अनुच्छेद 361 राष्ट्रपति और राज्यपालों को कुछ विशेष छूट देता है—जिसमें पद पर रहते हुए आपराधिक कार्यवाही से सुरक्षा भी शामिल है।
एसोसिएशन का तर्क है कि यदि आरोपों का समाधान होने से पहले ही नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है, तो इससे जांच कार्य में बाधा आ सकती है और जांच की निष्पक्षता व पारदर्शिता पर सवाल उठ सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इस विवाद से राज्यपाल के कार्यालय (जिसे 'लोक भवन' कहा जाएगा) की निष्पक्षता पर जनता का भरोसा कम हो सकता है।
एसोसिएशन ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि वे 19 अक्टूबर के शपथ ग्रहण समारोह को रोक दें और नियुक्ति वारंट को तब तक अपने पास रखें, जब तक कि संबंधित जांच एजेंसियां नामित राज्यपाल को आरोपों से मुक्त नहीं कर देतीं।
एसोसिएशन के अनुसार, ऐसा करने से संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनी रहेगी और सिक्किम की शासन व्यवस्था में जनता का भरोसा कायम रहेगा।
एसोसिएशन ने अपने इस पत्र की प्रतियां सिक्किम के मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय गृह मंत्री और सिक्किम के मुख्य सचिव को भी भेजी हैं।
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