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GLOF पर CS ने अधिकारियों संग किया मंथन
GANGTOK: ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF के संभावित खतरे से निपटने की तैयारियों को लेकर मुख्य सचिव (CS) की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल, पूर्व चेतावनी व्यवस्था, संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की तैयारियों की समीक्षा की गई।
GLOF ऐसी प्राकृतिक आपदा है, जिसमें ग्लेशियर के पास बनी झील से अचानक बड़ी मात्रा में पानी बाहर निकल सकता है। इससे निचले इलाकों में तेज बाढ़ आने का खतरा रहता है। पहाड़ी क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं सड़क, पुल, बिजली परियोजनाओं, संचार नेटवर्क और आबादी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं।
संवेदनशील इलाकों की निगरानी पर जोर
बैठक में संभावित खतरे वाले क्षेत्रों की पहचान और नियमित निगरानी को महत्वपूर्ण बताया गया। संबंधित विभागों को उपलब्ध तकनीकी सूचनाओं और मौसम संबंधी आंकड़ों का समय पर विश्लेषण करने पर जोर दिया गया।
अधिकारियों के बीच सूचनाओं के तेज आदान-प्रदान की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण मानी गई, ताकि किसी असामान्य स्थिति के संकेत मिलने पर स्थानीय प्रशासन और लोगों तक चेतावनी जल्द पहुंच सके।
Early Warning System होगा अहम
GLOF जैसी अचानक आने वाली आपदाओं में पूर्व चेतावनी प्रणाली जान-माल का नुकसान कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। बैठक में अर्ली वार्निंग सिस्टम को मजबूत करने, संचार व्यवस्था की जांच करने और चेतावनी मिलने के बाद अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को स्पष्ट रखने पर चर्चा की गई।
दूरदराज के इलाकों में मोबाइल नेटवर्क या सामान्य संचार व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति के लिए वैकल्पिक माध्यम तैयार रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
विभागों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी
आपदा की स्थिति में प्रशासन, आपदा प्रबंधन बल, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, अग्निशमन सेवा और अन्य एजेंसियों को एक साथ काम करना पड़ता है। इसलिए बैठक का प्रमुख उद्देश्य अलग-अलग विभागों के बीच जिम्मेदारियों और समन्वय को मजबूत करना रहा।
आपात स्थिति में बचाव दलों की तैनाती, चिकित्सा सुविधाओं, राहत शिविरों और आवश्यक सामग्री की उपलब्धता जैसी तैयारियों की समीक्षा भी आपदा प्रबंधन रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
निकासी योजना तैयार रखने पर फोकस
संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए स्पष्ट निकासी मार्ग होना जरूरी है। प्रशासन को ऐसे क्षेत्रों में संभावित सुरक्षित स्थानों की पहचान और स्थानीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने पर ध्यान देना होगा।
मॉक ड्रिल के जरिए भी यह जांचा जा सकता है कि चेतावनी जारी होने के बाद विभिन्न एजेंसियां कितनी तेजी से प्रतिक्रिया देती हैं और लोगों को सुरक्षित निकालने में कितना समय लगता है।
आपदा से पहले तैयारी पर जोर
उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य संदेश संभावित आपदा आने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले से तैयार रहने पर केंद्रित रहा। GLOF जैसी घटनाओं को पूरी तरह रोकना संभव नहीं होता, लेकिन प्रभावी निगरानी, समय पर चेतावनी और बेहतर निकासी व्यवस्था से जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को तैयारियों में किसी तरह की कमी न रखने और आपसी समन्वय मजबूत बनाए रखने पर जोर दिया। आने वाले समय में तैयारियों की नियमित समीक्षा भी महत्वपूर्ण रहेगी।
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