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CM तमांग और सतपाल महाराज ने किया संबोधित
सिक्किम: सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने रंगपो के गोली ग्राउंड में आयोजित सद्भावना सम्मेलन में हिस्सा लिया। मानव उत्थान सेवा समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में आध्यात्मिकता, मानवता, नैतिक मूल्यों और सामाजिक सद्भाव पर विशेष जोर दिया गया। सम्मेलन में उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री एवं आध्यात्मिक गुरु सतपाल महाराज सहित कई जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में शांति, आपसी सम्मान और एकता बनाए रखने के लिए आध्यात्मिक मूल्यों का महत्वपूर्ण योगदान है।
मुख्यमंत्री ने दिया एकता और सद्भाव का संदेश
रंगपो में आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने मानव धर्म के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आध्यात्मिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने चिकित्सा विज्ञान और ध्यान के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि चिकित्सा विज्ञान शारीरिक बीमारियों के उपचार में मदद करता है, जबकि ध्यान मानसिक शांति, एकाग्रता और आध्यात्मिक जागरूकता विकसित करने का माध्यम बन सकता है। उन्होंने राष्ट्रीय एकता और सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश देते हुए 'एक राष्ट्र, एक ध्वज, एक भावना' के विचार पर जोर दिया।
सिक्किम की सांस्कृतिक विविधता का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री तमांग ने कहा कि सिक्किम विभिन्न धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों के लोगों का प्रदेश है। यहां अलग-अलग समुदायों के लोग आपसी सम्मान और सहयोग के साथ रहते हैं। उन्होंने कहा कि मानव धर्म की शिक्षाएं सामाजिक एकता को मजबूत करने में मदद करती हैं। मुख्यमंत्री ने लोगों से धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करने तथा दैनिक जीवन में सेवा, करुणा और सहयोग की भावना अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने मानव उत्थान सेवा समिति की सामाजिक और आध्यात्मिक गतिविधियों की भी सराहना की।
सतपाल महाराज ने बताया मानव सेवा का महत्व
कार्यक्रम में उत्तराखंड के मंत्री और मानव उत्थान सेवा समिति के संस्थापक सतपाल महाराज ने सनातन धर्म और मानव धर्म की शिक्षाओं पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता का वास्तविक उद्देश्य मनुष्य को नैतिक आचरण, सेवा और करुणा के मार्ग पर आगे बढ़ाना है। उन्होंने सिक्किम के साथ अपने लंबे संबंधों का उल्लेख करते हुए प्रदेश की विकास और जनकल्याण संबंधी पहलों की सराहना की। सतपाल महाराज ने कहा कि समाज में प्रेम, सहिष्णुता और परस्पर सम्मान की भावना मजबूत होने से सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा मिलता है।
विभु महाराज ने युवाओं को दिया संदेश
सम्मेलन में विभु महाराज ने भी श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने आध्यात्मिक जागरूकता और नैतिक मूल्यों को व्यक्तिगत चरित्र निर्माण का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसका प्रभाव व्यक्ति के व्यवहार और दैनिक जीवन में दिखाई देना चाहिए। विभु महाराज ने करुणा, आत्मजागरूकता और दूसरों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने पर जोर दिया।
भजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन
सद्भावना सम्मेलन में धार्मिक भजनों, सांस्कृतिक नृत्यों और सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। मानव उत्थान सेवा समिति की सामाजिक, आध्यात्मिक और मानवीय गतिविधियों को दर्शाने वाली प्रस्तुति भी दिखाई गई। समिति के अध्यक्ष पूर्ण योन्जन ने अतिथियों का स्वागत किया और संस्था द्वारा मानव कल्याण तथा आध्यात्मिक जागरूकता के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के सलाहकार बिष्णु कुमार खातीवाड़ा, विधायक संजीत खरेल, मदन सिंचुरी, मुख्य सचिव आर. तेलंग, पाक्योंग की जिलाधिकारी परी बिश्नोई और पुलिस अधीक्षक छेरिंग शेरपा सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने पर जोर
रंगपो में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य मानवता, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव का संदेश देना था। आयोजन में सिक्किम के अलावा अन्य क्षेत्रों से भी श्रद्धालुओं ने भाग लिया। मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने लोगों से अपील की कि वे सम्मेलन में मिली शिक्षाओं को केवल सुनने तक सीमित न रखें, बल्कि अपने व्यवहार में भी उतारें। उन्होंने कहा कि आपसी सम्मान, सहयोग और जिम्मेदारी की भावना से समावेशी समाज के निर्माण में मदद मिलती है।
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