सिक्किम

गंगटोक में मानसिक स्वास्थ्य और नशे की लत पर बड़ा मंथन

nidhi
11 Oct 2026 4:33 PM IST
गंगटोक में मानसिक स्वास्थ्य और नशे की लत पर बड़ा मंथन
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मानसिक स्वास्थ्य को दें प्राथमिकता
गंगटोक: सिक्किम की राजधानी गंगटोक में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मानसिक स्वास्थ्य और नशे की लत जैसे संवेदनशील विषयों पर खुलकर बातचीत करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में इस बात को प्रमुखता से सामने रखा गया कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और नशे पर निर्भरता को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। इन विषयों पर चुप्पी साधने के बजाय लोगों को अपनी समस्याएं साझा करने और जरूरत पड़ने पर सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
मानसिक स्वास्थ्य व्यक्ति के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह केवल मानसिक बीमारी की अनुपस्थिति तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्ति की भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक स्थिति से भी जुड़ा होता है। तनाव, चिंता और अन्य मानसिक परेशानियां व्यक्ति के दैनिक जीवन, कामकाज और रिश्तों को प्रभावित कर सकती हैं।
गंगटोक में हुए कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर खुलकर संवाद होना चाहिए। साथ ही नशे की लत से जूझ रहे लोगों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता भी महत्वपूर्ण है। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर 10 अक्टूबर को गंगटोक के एमजी मार्ग में यह जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका आयोजन लेट्स टॉक मेंटल हेल्थ फाउंडेशन ने इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी की सिक्किम शाखा और सेंटर फॉर एडिक्शन मेडिसिन, चुवाटार के सहयोग से किया। कार्यक्रम की थीम थी, 'लोगों के अनुभव सुनें, वास्तविक आवाजें, वास्तविक बदलाव'।
युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सिमफेड के अध्यक्ष तेनजिंग दोरजी भूटिया शामिल हुए। डॉ. सीएल प्रधान विशिष्ट अतिथि रहे, जबकि सेंटर फॉर एडिक्शन मेडिसिन के मनोचिकित्सक डॉ. राजीव गुरुंग ने विशेषज्ञ वक्ता के रूप में हिस्सा लिया। डॉ. प्रधान ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचना जरूरी है। उन्होंने लोगों के अनुभवों को सुनने, उनसे संवाद करने और जरूरत पड़ने पर उपचार उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों पर ध्यान देने की बात कही। उनका कहना था कि भावनात्मक परेशानियों का सामना कर रहे लोगों को समझना और समय रहते सहायता देना महत्वपूर्ण है।
तनाव और नशे की लत के संबंध पर चर्चा
कार्यक्रम में डॉ. राजीव गुरुंग ने 'तनाव से नशे की लत तक' विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि कुछ लोग भावनात्मक परेशानियों और तनाव से राहत पाने के लिए नशीले पदार्थों का सहारा लेने लगते हैं। ऐसी स्थिति आगे चलकर निर्भरता का कारण बन सकती है। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या को केवल गलत व्यवहार के रूप में देखने के बजाय संवेदनशीलता से समझना चाहिए। मानसिक परेशानियां, सामाजिक दबाव, पर्याप्त सहयोग का अभाव और जिज्ञासा जैसे कारक नशे की शुरुआत में भूमिका निभा सकते हैं। विशेषज्ञ ने तनाव प्रबंधन, बेहतर संवाद और भावनात्मक स्वास्थ्य की समझ विकसित करने पर जोर दिया।
नुक्कड़ नाटक से दिया जागरूकता का संदेश
कार्यक्रम में सिक्किम मणिपाल कॉलेज ऑफ नर्सिंग के विद्यार्थियों ने 'थिएटर बियॉन्ड वॉल्स' नामक नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। इसके माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। इसके अलावा एरेनलिला जमीर ने मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य से जुड़ी गतिविधि कराई। सिक्किम विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने समूह गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील समाज बनाने का संकल्प भी दिलाया गया। फाउंडेशन की सह-संस्थापक भावना लामिछाने ने इस सामुदायिक संकल्प का संचालन किया।
अपनी परेशानियों पर खुलकर बात करने की अपील
मुख्य अतिथि तेनजिंग दोरजी भूटिया ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को छिपाने के बजाय उन पर बातचीत होनी चाहिए। उन्होंने चिंता से जुड़े अपने व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किए और बताया कि मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए सहायता लेना महत्वपूर्ण है। उन्होंने लोगों से फाउंडेशन की ओर से प्रत्येक रविवार को सोमानी वेलनेस क्लिनिक में आयोजित मानसिक स्वास्थ्य कार्यशालाओं में भाग लेने की अपील की।
अनुभव साझा करने के लिए मिला मंच
औपचारिक कार्यक्रम के बाद भावना लामिछाने और संतोषी खनाल के मार्गदर्शन में एक विशेष संवाद सत्र आयोजित किया गया। इसमें प्रतिभागियों को अपने विचार और अनुभव साझा करने का अवसर दिया गया। इस सत्र का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना था, जहां लोग बिना आलोचना या भेदभाव के डर के अपनी बात रख सकें। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। परिवार, शिक्षण संस्थानों और समुदायों में लगातार संवाद और सहयोग की आवश्यकता है। गंगटोक में आयोजित इस कार्यक्रम ने मानसिक स्वास्थ्य और नशे की लत को लेकर समाज में मौजूद झिझक कम करने तथा जरूरतमंद लोगों को सहयोग और उपचार के लिए प्रोत्साहित करने का संदेश दिया।
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