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सिक्किम में सीवेज निपटान पर हाईकोर्ट का आदेश, तीन महीने में तैयार हों नियम

nidhi
31 Oct 2026 11:43 AM IST
सिक्किम में सीवेज निपटान पर हाईकोर्ट का आदेश, तीन महीने में तैयार हों नियम
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गंगटोक: सिक्किम उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह तीन महीने के भीतर 'सिक्किम सीवरेज एंड सीवेज डिस्पोजल एक्ट, 2025' को लागू करने के लिए नियम बनाए। अदालत ने कहा कि राज्य भर में कचरा प्रबंधन (वेस्ट मैनेजमेंट) से जुड़ी समस्याओं को हल करने के लिए इस कानून को बिना किसी देरी के लागू किया जाना चाहिए।
यह निर्देश 28 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश ए. मुहम्मद मुस्ताक और न्यायमूर्ति भास्कर राज प्रधान की खंडपीठ ने एक स्वतः संज्ञान (suo moto) जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान दिया।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि हालांकि राज्य सरकार ने 'सिक्किम सीवरेज एंड सीवेज डिस्पोजल एक्ट, 2025' पारित कर दिया था और जनवरी 2026 में इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी थी, लेकिन इससे जुड़े नियम अभी तक नहीं बनाए गए हैं। अदालत को बताया गया कि इस कानून और इसके नियमों को लागू करने से राज्य भर में कचरा प्रबंधन से जुड़ी कई समस्याओं का प्रभावी ढंग से समाधान हो सकेगा।
खंडपीठ ने निर्देश दिया, "राज्य में कचरा प्रबंधन के व्यापक मुद्दे को ध्यान में रखते हुए, और 'भोपाल नगर निगम बनाम डॉ. सुभाष सी. पांडे व अन्य' (सिविल अपील संख्या 6174/2023) मामले में सर्वोच्च न्यायालय के 19.02.2026 के आदेश को देखते हुए, हम यह उचित समझते हैं कि राज्य सरकार 'सिक्किम सीवरेज एंड सीवेज डिस्पोजल एक्ट, 2025' को लागू करने के लिए नियम बनाए। ये नियम आज से तीन महीने के भीतर बिना किसी देरी के तैयार हो जाने चाहिए।"
एक अन्य महत्वपूर्ण टिप्पणी में, सिक्किम उच्च न्यायालय ने 'जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974' का उल्लेख किया। विशेष रूप से, अधिनियम की धारा 24, जो जलधाराओं या कुओं में प्रदूषण फैलाने वाले पदार्थों को डालने पर रोक लगाती है, और धारा 43, जो धारा 24 का उल्लंघन करने पर दंड का प्रावधान करती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस अधिनियम के तहत उल्लंघन के मामलों में कार्रवाई शुरू करने का अधिकार केवल राज्य सरकार के सचिव के पास है। अदालत ने टिप्पणी की, “इस तरह के ढांचे में काम करने के दौरान स्पष्ट चुनौतियां आती हैं। चूंकि इस प्रावधान का उद्देश्य नदियों, धाराओं और अन्य जल निकायों में होने वाले प्रदूषण को तुरंत रोकना है, जिसके लिए तत्काल कार्रवाई की जरूरत होती है, ऐसे में केवल राज्य सरकार के सचिव पर निर्भर रहने से नियमित रूप से कानून लागू करने में बड़ी प्रशासनिक और व्यावहारिक मुश्किलें आती हैं।”
अदालत ने कहा, “ऊपर बताई गई व्यावहारिक बातों को देखते हुए, केंद्र सरकार के लिए यह उचित होगा कि वह इस प्रावधान पर फिर से विचार करे और जिला कलेक्टर को ‘जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974’ के उल्लंघन के मामलों में कार्रवाई करने का अधिकार दे।”
सिक्किम उच्च न्यायालय ने भारत के डिप्टी सॉलिसिटर जनरल को निर्देश दिया कि वे इस मामले पर विचार करने के लिए केंद्र सरकार को आदेश की एक प्रति भेजें।
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