
सिक्किम : मंगन जिले में रविवार तड़के एक बड़ा भूस्खलन होने से इलाके में चिंता बढ़ गई है। अधिकारियों के अनुसार, भूस्खलन के कारण दो नदियों का बहाव आंशिक रूप से प्रभावित हुआ है। हालांकि, राहत की बात यह है कि अभी तक किसी के हताहत होने या घायल होने की सूचना नहीं मिली है।
भूस्खलन की घटना चुंगथांग सब-डिविजन क्षेत्र में हुई, जहां पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा अचानक ढह गया। प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमें मौके की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
नागा फॉरेस्ट क्षेत्र में हुआ भूस्खलन
अधिकारियों के मुताबिक, यह घटना चुंगथांग सब-डिविजन में तीस्ता और चयाकुंग नदियों के संगम के पास हुई।
बताया गया कि थेन्ग टनल के सामने नागा फॉरेस्ट एरिया में नागा-टोसा रोड के नए हिस्से के किनारे पहाड़ी का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा।
भूस्खलन इतना बड़ा था कि इसका असर आसपास के क्षेत्र और नदी के प्रवाह पर पड़ा।
तीस्ता और चयाकुंग नदियों का बहाव प्रभावित
भूस्खलन के बाद तीस्ता और चयाकुंग नदियों का बहाव आंशिक रूप से रुक गया। प्रशासन ने स्थिति पर नजर रखने के लिए निगरानी बढ़ा दी है।
अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल नदियों का जलस्तर नियंत्रण में है और किसी तरह की आपात स्थिति सामने नहीं आई है।
हालांकि, नदी का पानी अभी भी मटमैला दिखाई दे रहा है, जिसे भूस्खलन के बाद मिट्टी और मलबे के बहाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
संकलंग और फिडांग चौकियों पर स्थिति सामान्य
अधिकारियों ने बताया कि संकलंग और फिडांग चौकियों पर नदियों का जलस्तर फिलहाल सामान्य है।
प्रशासन लगातार नदी के बहाव और जलस्तर की निगरानी कर रहा है, ताकि किसी भी संभावित खतरे से समय रहते निपटा जा सके।
संपत्ति के नुकसान का आकलन जारी
भूस्खलन के बाद प्रशासन की टीमों ने क्षेत्र का निरीक्षण शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने बताया कि अभी तक किसी जनहानि की सूचना नहीं मिली है।
वहीं, संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। सड़क, आसपास के ढांचे और अन्य प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की जांच की जा रही है।
सड़क संपर्क पर भी नजर
नागा-टोसा रोड के नए हिस्से के पास हुए इस भूस्खलन के बाद सड़क मार्ग की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है।
पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन के कारण अक्सर सड़कें बाधित हो जाती हैं, जिससे स्थानीय लोगों और वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है।
प्रशासन की टीम यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि यातायात व्यवस्था सुरक्षित बनी रहे।
मानसून में बढ़ जाता है भूस्खलन का खतरा
सिक्किम जैसे पहाड़ी राज्यों में मानसून के दौरान भूस्खलन की घटनाएं बढ़ जाती हैं। लगातार बारिश के कारण पहाड़ कमजोर हो जाते हैं और कई बार बड़े हिस्से टूटकर नीचे गिर जाते हैं।
प्रशासन ऐसे क्षेत्रों में पहले से निगरानी रखता है, लेकिन अचानक होने वाली घटनाओं से चुनौती बढ़ जाती है।
राहत और सुरक्षा व्यवस्था पर जोर
अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। संबंधित विभागों को सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
स्थानीय प्रशासन नदी के जलस्तर, सड़क की स्थिति और आसपास के इलाकों की लगातार निगरानी कर रहा है।
सिक्किम के मंगन जिले में हुए इस भूस्खलन ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को सामने ला दिया है। हालांकि अभी तक किसी नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रशासन एहतियात के तौर पर पूरी तरह सतर्क है।





