सिक्किम

तीस्ता नदी पर हाइड्रो प्रोजेक्ट रद्द करने की मांग, ACT की चार दिवसीय पदयात्रा कालिम्पोंग में समाप्त

Saba Naaz
27 July 2026 7:43 PM IST
तीस्ता नदी पर हाइड्रो प्रोजेक्ट रद्द करने की मांग, ACT की चार दिवसीय पदयात्रा कालिम्पोंग में समाप्त
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कालिम्पोंग। सिक्किम स्थित पर्यावरण संगठन अफेक्टेड सिटिजंस ऑफ तीस्ता (ACT) की ओर से शुरू की गई चार दिवसीय पदयात्रा सोमवार को पश्चिम बंगाल के कालिम्पोंग में समाप्त हुई। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने तीस्ता नदी पर प्रस्तावित और निर्माणाधीन कई जलविद्युत परियोजनाओं को रद्द करने की मांग उठाई। “तीस्ता मैटर्स टू मी” नाम से आयोजित इस अभियान में पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय समुदायों के अधिकार और नदी की प्राकृतिक संरचना को बचाने की अपील की गई।

यह पदयात्रा 24 जुलाई को उत्तरी सिक्किम के जोंगू क्षेत्र स्थित फिदांग गांव से शुरू हुई थी। जोंगू क्षेत्र लेपचा समुदाय की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यात्रा के दौरान पर्यावरण कार्यकर्ताओं, स्थानीय लोगों और समर्थकों ने तीस्ता नदी के संरक्षण को लेकर जागरूकता फैलाने का प्रयास किया।

चार दिनों तक चली इस पदयात्रा का समापन तीस्ता और रंगीत नदियों के संगम स्थल पर हुआ। यहां लेपचा समुदाय के शमनों ने पारंपरिक प्रार्थना और अनुष्ठान किए। कार्यक्रम में नदी और प्रकृति के संरक्षण के लिए स्थानीय परंपराओं के अनुसार प्रार्थना की गई। आयोजकों ने कहा कि तीस्ता केवल जल स्रोत नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की संस्कृति, जीवनशैली और पारिस्थितिकी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

ACT से जुड़े लोगों का कहना है कि तीस्ता नदी पर बड़ी संख्या में जलविद्युत परियोजनाएं बनने से पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो सकता है। संगठन ने दावा किया कि पहाड़ी क्षेत्रों में बड़े बांध और अन्य निर्माण कार्यों से भूस्खलन, जैव विविधता को नुकसान और स्थानीय समुदायों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

पर्यावरण समूह ने सरकार से मांग की है कि तीस्ता नदी पर चल रही और प्रस्तावित परियोजनाओं की दोबारा समीक्षा की जाए। उनका कहना है कि विकास योजनाओं में स्थानीय लोगों की चिंताओं और पर्यावरणीय प्रभावों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। संगठन का तर्क है कि प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से पहले दीर्घकालिक प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है।

तीस्ता नदी सिक्किम और पश्चिम बंगाल के लिए आर्थिक और पर्यावरणीय रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। यह नदी क्षेत्र की कृषि, पर्यटन और स्थानीय आजीविका से जुड़ी हुई है। पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले कई समुदाय अपनी दैनिक जरूरतों और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए नदी पर निर्भर हैं।

ACT के सदस्यों ने पदयात्रा के दौरान लोगों से अपील की कि वे तीस्ता नदी के संरक्षण के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि नदी की सुरक्षा केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा विषय है।

हाल के वर्षों में हिमालयी क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में किसी भी बड़े निर्माण कार्य से पहले भूगर्भीय स्थिति, जल प्रवाह और पर्यावरणीय प्रभावों का गहन अध्ययन किया जाना चाहिए।

ACT की इस पदयात्रा ने एक बार फिर तीस्ता नदी और उससे जुड़े पर्यावरणीय मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि वह नदी संरक्षण और स्थानीय समुदायों की आवाज को लेकर अपना अभियान आगे भी जारी रखेगा। वहीं, परियोजनाओं से जुड़े पक्ष विकास, ऊर्जा जरूरतों और क्षेत्रीय प्रगति के महत्व पर जोर देते हैं।

फिलहाल तीस्ता नदी पर जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर बहस जारी है। पर्यावरण संगठनों और स्थानीय समुदायों की मांग है कि विकास के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को भी समान महत्व दिया जाए।

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