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SPCC ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब
गंगटोक: सिक्किम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (SPCC) ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए जवाबदेही की मांग की है। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। साथ ही भारतीय जनता पार्टी से सिक्किम की विशिष्ट पहचान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा को लेकर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की है।
गंगटोक में आयोजित पत्रकार वार्ता में SPCC अध्यक्ष गोपाल छेत्री ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग जैसे स्वतंत्र संवैधानिक संस्थान की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना लोकतंत्र के लिए आवश्यक है। हालांकि, कांग्रेस के आरोपों को प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
SIR प्रक्रिया पर कांग्रेस ने जताई आपत्ति
गोपाल छेत्री ने सिक्किम में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया और अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया ने कई सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के कुछ फैसलों में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती गई। पार्टी ने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े निर्णयों और मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की व्यवस्था पर विस्तृत स्पष्टीकरण देने की मांग की। छेत्री ने कहा कि मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए चुनाव आयोग को सभी राजनीतिक दलों और नागरिकों की चिंताओं का जवाब देना चाहिए।
मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली पर सवाल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर अन्य चुनाव आयुक्तों से पर्याप्त विचार-विमर्श किए बिना निर्णय लेने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। पार्टी ने इन कथित आपत्तियों की निष्पक्ष समीक्षा और सार्वजनिक जवाबदेही की मांग की। कांग्रेस का कहना है कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है। इसलिए उसके निर्णय राजनीतिक प्रभाव से मुक्त और पारदर्शी होने चाहिए। आयोग के भीतर मतभेद और एकतरफा फैसलों के संबंध में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर भी उठाए सवाल
SPCC ने मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 से जुड़े प्रावधानों पर भी सवाल उठाए। कांग्रेस ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों और प्रक्रियाओं को लेकर पर्याप्त स्पष्टता नहीं थी। पार्टी ने इस विषय पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा। सिक्किम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि SIR के लिए निर्धारित घोषणा-पत्र का इस्तेमाल केवल विशेष पुनरीक्षण अवधि में होगा। सामान्य अवधि में मतदाता पंजीकरण के लिए निर्वाचन पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित फॉर्म लागू होंगे।
BJP से सिक्किम की पहचान पर मांगा जवाब
प्रदेश कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी से सिक्किम की विशिष्ट पहचान और संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण को लेकर भी सवाल पूछे। सिक्किम की राजनीतिक व्यवस्था में राज्य की ऐतिहासिक पहचान और संविधान के अनुच्छेद 371F के तहत प्राप्त विशेष प्रावधानों का महत्वपूर्ण स्थान है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को उठाते हुए भाजपा से राज्य के हितों और संवैधानिक सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता स्पष्ट करने को कहा। पार्टी का कहना है कि सिक्किम की पहचान और स्थानीय लोगों के अधिकारों से जुड़े मामलों पर राजनीतिक दलों को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
भाजपा ने आरोपों को बताया निराधार
इससे पहले सिक्किम भाजपा ने चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया पर विपक्ष के आरोपों को खारिज किया था। 28 सितंबर को भाजपा प्रवक्ता पासांग ग्याली शेरपा ने कहा था कि चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि SIR सहित प्रमुख निर्णय पूर्ण आयोग की सहमति से लिए गए थे। उन्होंने विपक्ष के चुनावी हेरफेर संबंधी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा था कि राजनीतिक दलों को अपने दावों के समर्थन में प्रमाण प्रस्तुत करने चाहिए। भाजपा ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और स्थापित चुनावी प्रक्रियाओं के प्रति सम्मान बनाए रखने की अपील भी की थी।
सिक्किम में 6 सितंबर को प्रकाशित हुई अंतिम मतदाता सूची
सिक्किम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद 6 सितंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी। इसके बाद उन पात्र नागरिकों के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया, जिनके नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके थे। निर्वाचन विभाग ने बताया कि 1 अक्टूबर से मतदाता पंजीकरण की निरंतर अद्यतन प्रक्रिया के तहत आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं। इसके अलावा 11 अक्टूबर को मतदान केंद्रों पर विशेष शिविर आयोजित करने की व्यवस्था की गई थी।
चुनावी पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक बहस तेज
सिक्किम में कांग्रेस और भाजपा के बीच चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर मतभेद सामने आए हैं। एक तरफ कांग्रेस चुनाव आयोग की जवाबदेही और SIR प्रक्रिया की समीक्षा की मांग कर रही है, वहीं भाजपा का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया पर आरोप लगाते समय प्रमाणों और आधिकारिक स्पष्टीकरणों को ध्यान में रखना चाहिए। इस राजनीतिक बहस के बीच मतदाता सूची की शुद्धता, पात्र नागरिकों का पंजीकरण और संवैधानिक संस्थाओं पर जनता का भरोसा महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं।
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