सिक्किम

नदियों और मछलियों के संरक्षण के लिए सिक्किम में अनोखा उत्सव

nidhi
11 Oct 2026 4:27 PM IST
नदियों और मछलियों के संरक्षण के लिए सिक्किम में अनोखा उत्सव
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सिक्किम में तीन दिवसीय रिवर फेस्ट
सिक्किम: सिक्किम की नदियों, जल स्रोतों और जलीय जीवों के संरक्षण के उद्देश्य से तीन दिवसीय 'चिरबिरे रिवर फेस्ट' की शुरुआत की गई है। सोरेंग जिले के जोरथांग के पास चिरबिरे में आयोजित इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य लोगों को नदियों की सुरक्षा, जल संरक्षण और जलीय जैव विविधता के महत्व के प्रति जागरूक करना है। सिक्किम एंगलर्स एसोसिएशन और राज्य के मत्स्य विभाग के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण के साथ कला, संस्कृति और पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों को भी शामिल किया गया है।
इस महोत्सव का आयोजन 10 से 12 अक्टूबर 2026 तक रंगीत नदी के किनारे किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्घाटन मत्स्य विभाग के सलाहकार एम प्रसाद शर्मा और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में किया गया। आयोजकों के अनुसार, सिक्किम में अपनी तरह का यह पहला आयोजन है, जिसका उद्देश्य नदियों के संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ना है।
नदियों के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
सिक्किम एंगलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. एसके दीवान ने कहा कि इस वर्ष चिरबिरे रिवर फेस्ट को बड़े स्तर पर आयोजित किया गया है। इसका उद्देश्य सिक्किम की नदियों, छोटी जलधाराओं और उनमें रहने वाले जीवों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
उन्होंने बताया कि एसोसिएशन वर्ष 2002 से राज्य के जल स्रोतों और जलीय जीवों के संरक्षण के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित कर रहा है। संगठन ने पिछले वर्षों में जल स्रोतों और जलीय प्रजातियों पर अध्ययन भी किया है। डॉ. दीवान ने नदियों में जलीय जीवन की बिगड़ती स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जल स्रोतों की सुरक्षा के लिए सभी लोगों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नदियों के संरक्षण के बिना जलीय जीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
सिक्किम में मछलियों की प्रजातियां घटने पर चिंता
कार्यक्रम में मत्स्य विभाग की सचिव रोशनी राय ने राज्य की नदियों में मछलियों की प्रजातियों की घटती संख्या को गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि सिक्किम में पहले मछलियों की 48 प्रजातियां दर्ज की गई थीं, जबकि हाल के अध्ययनों में नदियों में केवल 21 प्रजातियों की पहचान हुई है। उन्होंने इस अंतर को चिंताजनक बताते हुए जलीय प्रजातियों के संरक्षण के लिए तत्काल प्रयासों की आवश्यकता जताई। रोशनी राय ने बताया कि पिछले एक दशक में सिक्किम में मत्स्य पालन के क्षेत्र में सकारात्मक विकास हुआ है। विशेष रूप से ट्राउट मछली पालन और मछली उत्पादन में प्रगति दर्ज की गई है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मछली पालकों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है। इसके अंतर्गत आर्थिक सहायता, ऋण और सब्सिडी जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
मछली पकड़कर वापस छोड़ने की परंपरा को बढ़ावा
महोत्सव में मछली पकड़ने की जिम्मेदार पद्धति को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसे 'कैच एंड रिलीज' कहा जाता है। इस प्रक्रिया में मछली को पकड़ने के बाद आवश्यक अध्ययन और सावधानी के साथ वापस पानी में छोड़ दिया जाता है।
आयोजकों के अनुसार, इस पद्धति का उद्देश्य मछलियों को नुकसान पहुंचाए बिना खेल और अध्ययन से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देना है। महोत्सव में 11 और 12 अक्टूबर को चिरबिरे महाशीर चैलेंज का आयोजन निर्धारित है। इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को मछलियां पकड़ने के बाद उन्हें वापस नदी में छोड़ना होगा। आयोजन के नियमों में नदी को साफ रखने, मछलियों को सावधानी से संभालने और निर्धारित स्थानों पर ही गतिविधियां संचालित करने के निर्देश शामिल हैं।
पर्यटन और स्थानीय संस्कृति को भी मिलेगा मंच
चिरबिरे रिवर फेस्ट में पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय कला, संस्कृति और पर्यटन को भी महत्व दिया गया है। तीन दिवसीय कार्यक्रम में मिट्टी के बर्तन बनाने, चित्रकला, संगीत, स्थानीय भोजन, योग और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा स्थानीय कारीगरों, उत्पादकों और छोटे व्यवसायियों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर दिया जा रहा है।
आयोजकों का उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ जिम्मेदार पर्यटन और स्थानीय आजीविका को प्रोत्साहित करना है। कार्यक्रम में बच्चों और युवाओं के लिए भी गतिविधियां रखी गई हैं, ताकि वे नदियों और जलीय जीवन के महत्व को समझ सकें।
जल संरक्षण के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर
मत्स्य विभाग के सलाहकार एम प्रसाद शर्मा ने कहा कि चिरबिरे रिवर फेस्ट सिक्किम के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से नदियों और जलीय जीवों के संरक्षण के साथ मत्स्य पालन तथा पर्यटन को भी प्रोत्साहित किया जा सकता है।
उन्होंने जिम्मेदार मछली पकड़ने की गतिविधियों और 'कैच एंड रिलीज' पद्धति को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। महोत्सव का संदेश 'फ्लो, कनेक्ट, कंजर्व' रखा गया है, जिसका उद्देश्य नदी, समुदाय और संरक्षण के बीच संबंध को मजबूत करना है। आयोजकों ने बताया कि कार्यक्रम के अंतिम दिन नदी किनारों की सफाई, प्रतियोगिता के अंतिम चरण और समापन समारोह की गतिविधियां निर्धारित हैं। चिरबिरे रिवर फेस्ट के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि नदियां केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि अनेक जलीय प्रजातियों का प्राकृतिक आवास भी हैं। इनके संरक्षण के लिए सरकारी विभागों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय समुदायों की संयुक्त भागीदारी जरूरी है।
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