राजस्थान

राजस्थान में AIMIM के पार्टी लॉन्च करने के क्या हैं सियासी मायने? 36 सीटों पर असर डालती है मुस्लिम आबादी

Gulabi
16 Nov 2021 11:09 AM GMT
राजस्थान में AIMIM के पार्टी लॉन्च करने के क्या हैं सियासी मायने? 36 सीटों पर असर डालती है मुस्लिम आबादी
x
36 सीटों पर असर डालती है मुस्लिम आबादी
राजस्थान में आगामी विधानसभा चुनाव 2023 (Rajasthan Assembly Election 2023) दिलचस्प होने वाले हैं. असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने अपनी पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (AIMIM) को राज्य में लॉन्च करने का ऐलान किया है. औवेसी की इस घोषणा के साथ ही चुनाव पर इसका असर और कांग्रेस (Congress) और बीजेपी (BJP) को होने वाले इसका क्या फायदा और नुकसान हो सकता है?
सोमवार को चुनाव में उतरने के ऐलाने के दौरान औवेसी ने कहा कि राजस्थान में थर्ड फ्रंट का काफी स्कोप है. यहां की जनता बीजेपी-कांग्रेस दोनों से परेशान है. यहां की माइनॉरिटी को एक राजनीतिक आवाज और राजनीतिक प्लेटफॉर्म मिले, यही हमारी कोशिश होगी. औवेसी ने राजस्थान में मुस्लिम विधायकों को शो-पीस भी कहा. इस बात से हर कोई वाकिफ है कि AIMIM का कोर बेस मुस्लिम वोटर है. वह उन्हीं सीटों पर अपने प्रत्याशियों को उतारते हैं जहां मुस्लिम वोट फैक्टर असरदार होता है.
36 सीटों पर असर डालती है मुस्लिम आबादी
अब ऐसे में राजस्थान की बात करें तो यहां पर 9 फीसदी मुस्लिम आबादी है. यह नौ फीसदी मुस्लिम आबादी राजस्थान की 36 सीटों पर असर डालती है. इनमें भी 15 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम मतदाताओं का वर्चस्व है। इसमें भी करीब 8 से 10 सीटों पर मुस्लिम वोटर उम्मीदवारों की हार और जीत तय करने में अहम भूमिका अदा करती है. इन सीटों में टोंक, टोंक नॉर्थ, जयपुर में हवामहल और लक्ष्मणगढ़ में सीकर भी शामिल हैं.
15 में से जीते थे कांग्रेस के 7 उम्मीद्वार
2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कुल 15 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया था. जिनमें से 7 सीट पर जीत हासिल की. हीं एक मुस्लिम उम्मीदवार ने बसपा के टिकट पर चुनाव जीता था. वहीं बीजेपी ने दो उम्मीदवार को टिकट दिया था वह दोनों सीट जीतने में नाकामयाब रहे. अब ऐसा माना जा रहा है कि AIMIM के आने से इसका सबसे ज्यादा असर कांग्रेस पर पड़ेगा. वहीं कांग्रेस को नुकसान होने से बीजपी को इसका सीधा फ्यादा मिलेगा.
वहीं औवेसी ने यह भी कहा कि- 'राजस्थान में मुस्लिम माइनोरिटी की पॉलिटिकल वॉयस नहीं के बराबर है. यहां माइनॉरिटी के आठ-नौ लोग जीत जाते हैं. माइनॉरिटी के विधायक भी अंगड़ाई लेते वक्त ही मुंह खोलते हैं. जब तक माइनॉरिटी की स्वतंत्र आवाज नहीं होगी, तब तक ये शो पीस ही हैं. इनका असेंबली और विकास में क्या योगदान है?
Next Story