
उदयपुर | उदयपुर में महाराणा प्रताप की वंश परंपरा से जुड़े लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के ‘गद्दी उत्सव’ पर विवाद गहराने लगा है। राजस्थान क्षत्रिय महासभा ने इस आयोजन पर सवाल उठाते हुए इसे 'गद्दी उत्सव' या 'पगड़ी दस्तूर' कहे जाने को लेकर आपत्ति जताई है। महासभा के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह आयोजन मेवाड़ राजघराने की परंपराओं का उल्लंघन है और इसकी ऐतिहासिक प्रामाणिकता पर भी सवाल उठाए जा सकते हैं।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ को हाल ही में उनके समर्थकों द्वारा ‘गद्दी उत्सव’ के रूप में सम्मानित किया गया था, जिसे मेवाड़ की परंपराओं से जोड़कर देखा जा रहा है। लेकिन क्षत्रिय महासभा के पदाधिकारियों का कहना है कि मेवाड़ राजपरिवार में 'पगड़ी दस्तूर' नामक परंपरा होती है, जो किसी राजा या प्रमुख व्यक्ति के निधन के बाद उत्तराधिकारी को दी जाती है। महासभा के अनुसार, जब कोई शासक या परिवार प्रमुख जीवित होता है, तब 'गद्दी उत्सव' मनाने का कोई औचित्य नहीं है।
इस विवाद के बाद सियासी गलियारों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ संगठनों ने इसे मेवाड़ राजघराने की गरिमा से जुड़ा मामला बताया है, तो वहीं कुछ लोग इसे व्यक्तिगत सम्मान के रूप में देख रहे हैं। इस बीच लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने इस विवाद पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
इस पूरे मामले को लेकर मेवाड़ की जनता में भी मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे परंपरा के खिलाफ मानते हैं, तो कुछ इसे आधुनिक समय के अनुसार अनुकूल बदलाव बता रहे हैं।





