राजस्थान

रक्षाबंधन पर बदली परंपरा 31 बहनों ने अंगदान कर बचाई भाइयों की जिंदगी

nidhi
28 Aug 2026 12:47 PM IST
रक्षाबंधन पर बदली परंपरा 31 बहनों ने अंगदान कर बचाई भाइयों की जिंदगी
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रक्षाबंधन पर बहनों का बड़ा त्याग अंगदान

जयपुर : रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा के वचन का प्रतीक माना जाता है। राजस्थान में इस बार इस रिश्ते ने एक नई मिसाल पेश की है। यहां 31 बहनों ने अंगदान का संकल्प लेकर अपने भाइयों को नई जिंदगी देने का संदेश दिया। इन बहनों का यह कदम रक्षाबंधन के असली भाव यानी जीवन की रक्षा और रिश्तों की मजबूती को दर्शाता है। राखी के पवित्र अवसर पर बहनों ने केवल रक्षा का वचन नहीं लिया, बल्कि जरूरत पड़ने पर जीवन बचाने का संकल्प भी लिया। उनके इस फैसले की समाज में सराहना हो रही है।

अंगदान बना रक्षाबंधन का नया संदेश
रक्षाबंधन पर आमतौर पर भाई बहन की रक्षा का वादा करते हैं, लेकिन राजस्थान की इन बहनों ने इस परंपरा को एक नई दिशा दी है। उन्होंने अंगदान के जरिए जरूरतमंद लोगों को जीवन देने का संकल्प लिया।
उनका मानना है कि शरीर के अंग किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में नई उम्मीद ला सकते हैं।
31 बहनों ने लिया जीवन बचाने का संकल्प
कार्यक्रम के दौरान 31 बहनों ने अंगदान की शपथ ली। उन्होंने संदेश दिया कि मृत्यु के बाद भी उनका शरीर किसी के काम आ सके, यही सबसे बड़ा मानव धर्म है। इस पहल का उद्देश्य लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक करना और समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना है।
भाई-बहन के रिश्ते को मिली नई परिभाषा
रक्षाबंधन पर बहनें भाइयों की लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती हैं। राजस्थान की इन बहनों ने इस भावना को और व्यापक बनाते हुए मानव जीवन की रक्षा का संदेश दिया। उनका यह कदम दिखाता है कि प्रेम और सेवा की भावना केवल परिवार तक सीमित नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए हो सकती है।
अंगदान को लेकर जागरूकता जरूरी
भारत में हर साल बड़ी संख्या में मरीज अंग प्रत्यारोपण का इंतजार करते हैं, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण जरूरत के अनुसार अंग उपलब्ध नहीं हो पाते। विशेषज्ञों का कहना है कि अंगदान को लेकर लोगों में सही जानकारी और जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
रक्षाबंधन पर मिला प्रेरणादायक संदेश
इन 31 बहनों की पहल ने रक्षाबंधन के पर्व को एक अलग पहचान दी है। यह संदेश दिया गया कि असली रक्षा केवल सुरक्षा देने तक सीमित नहीं, बल्कि किसी का जीवन बचाने में भी है। उनका यह संकल्प समाज के लिए प्रेरणा बन गया है और रक्षाबंधन के मायने को एक नई ऊंचाई देता है।
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