
x
जयपुर : पब्लिक अकाउंट्स कमिटी (PAC) ने राजस्थान से जुड़े तीन अहम मुद्दों पर चर्चा की है। कांग्रेस सांसद और महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने मंगलवार को बताया कि समिति की बैठक में आयुष्मान भारत योजना के क्रियान्वयन, छोटे और मध्यम उद्यमों यानी MSME को बैंकों से मिलने वाले कर्ज और SC/ST छात्रों की छात्रवृत्ति में देरी से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।वेणुगोपाल के मुताबिक, समिति ने आयुष्मान भारत योजना को लागू करने के तरीके में कुछ कमियों पर चर्चा की। इसके अलावा छोटे MSME को बैंक लोन देने में प्राथमिकता के मुद्दे को भी बैठक में उठाया गया। तीसरा मुद्दा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजना में कथित देरी से जुड़ा था।
आयुष्मान भारत के क्रियान्वयन पर चर्चा
बैठक में आयुष्मान भारत योजना को राजस्थान में लागू किए जाने के तरीके से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। वेणुगोपाल ने कहा कि समिति ने योजना और उसके क्रियान्वयन में कई कमियां पाए जाने की बात सामने रखी।आयुष्मान भारत देश की प्रमुख स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं में शामिल है। इसका उद्देश्य पात्र परिवारों को सूचीबद्ध स्वास्थ्य सेवाओं के लिए वित्तीय सुरक्षा उपलब्ध कराना है। राजस्थान में भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयुष्मान मॉडल सीएससी समेत योजना से संबंधित गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।PAC की चर्चा के संदर्भ में अब योजना के क्रियान्वयन से जुड़े प्रशासनिक और वित्तीय पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है। समिति का काम सरकारी खर्च और खातों की जांच करना है, इसलिए योजनाओं में खर्च किए गए सार्वजनिक धन और उसके इस्तेमाल से जुड़े रिकॉर्ड भी उसके दायरे में आते हैं।
छोटे MSME को लोन देने पर सवाल
PAC की बैठक में बैंकों द्वारा छोटे MSME को लोन देने का मुद्दा भी उठाया गया। वेणुगोपाल ने कहा कि छोटे और मध्यम उद्यमों को कर्ज देने में बैंकों की प्राथमिकता दिखाई नहीं दे रही है।उन्होंने MSME को ज्यादा प्राथमिकता देने की जरूरत बताई। छोटे कारोबारियों के लिए बैंक लोन कारोबार शुरू करने, उत्पादन बढ़ाने, मशीनरी खरीदने और कार्यशील पूंजी की जरूरत पूरी करने का महत्वपूर्ण साधन हो सकता है।केंद्र के MSME डैशबोर्ड के अनुसार विभिन्न सरकारी ऋण योजनाओं के तहत बड़ी संख्या में परियोजनाओं के लिए बैंक लोन मंजूर किए जा रहे हैं। ऐसे में PAC की चर्चा का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उपलब्ध ऋण सुविधाओं का लाभ जमीनी स्तर पर छोटे उद्यमों तक किस तरह पहुंच रहा है।राजस्थान सरकार के स्तर पर भी उद्यमों के लिए अलग-अलग ऋण और प्रोत्साहन योजनाएं संचालित हैं। राज्य के आधिकारिक पोर्टल पर महिला उद्यमियों के लिए विनिर्माण, सेवा और व्यापार आधारित उद्यमों के लिए बैंक और वित्तीय संस्थानों के माध्यम से ऋण की व्यवस्था का उल्लेख है।
SC/ST छात्रों की छात्रवृत्ति में देरी
बैठक में सबसे अहम मुद्दों में से एक SC/ST छात्रों की छात्रवृत्ति योजना से जुड़ा रहा। वेणुगोपाल ने दावा किया कि छात्रवृत्ति में **89 महीने की देरी** हुई है। यह आंकड़ा उनके बैठक के बाद दिए गए बयान पर आधारित है।छात्रवृत्ति योजनाएं आर्थिक रूप से कमजोर और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के छात्रों की शिक्षा जारी रखने में सहायता करती हैं। राजस्थान में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के माध्यम से विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए ऑनलाइन पोर्टल संचालित किया जाता है। राज्य के आधिकारिक पोर्टल पर छात्रवृत्ति आवेदन और भुगतान की स्थिति देखने की सुविधा भी उपलब्ध है।राजस्थान में SC/ST छात्रों के लिए विशेष छात्रवृत्ति योजनाएं भी संचालित हैं। शिक्षा विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर 2026-27 सत्र के लिए SC/ST छात्रों की विशेष प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना का उल्लेख किया गया है।
PAC क्या करती है?
पब्लिक अकाउंट्स कमिटी संसद की महत्वपूर्ण वित्तीय समितियों में से एक है। इसका प्रमुख काम सरकार के खर्च और खातों की जांच करना है। समिति विनियोग खातों और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की रिपोर्टों की भी जांच करती है।इसका उद्देश्य यह देखना होता है कि संसद द्वारा स्वीकृत धन का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के लिए किया गया या नहीं। समिति सरकारी खर्च में नियमों के पालन, वित्तीय अनुशासन और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की पड़ताल कर सकती है।इसी वजह से राजस्थान से संबंधित योजनाओं और सरकारी खर्च से जुड़े मामलों पर PAC की चर्चा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समिति के सामने किसी योजना की कार्यप्रणाली, खर्च और उसके परिणामों से जुड़े सवाल आने पर संबंधित विभागों से जानकारी मांगी जा सकती है।
तीनों मुद्दों का सीधा संबंध जनता से
PAC की बैठक में उठाए गए तीनों मुद्दे आम लोगों से सीधे जुड़े हैं। आयुष्मान भारत स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित है, MSME को मिलने वाला कर्ज रोजगार और कारोबार से जुड़ा है, जबकि SC/ST छात्रवृत्ति शिक्षा और आर्थिक सहायता से संबंधित है।आयुष्मान योजना में यदि क्रियान्वयन से जुड़ी कमियां हैं तो उनका असर पात्र लाभार्थियों तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच पर पड़ सकता है। इसी तरह छोटे कारोबारियों को समय पर ऋण नहीं मिलने पर उनके कारोबार के विस्तार और रोजगार सृजन पर असर पड़ सकता है। छात्रवृत्ति में देरी होने से विद्यार्थियों को पढ़ाई से जुड़े खर्चों को पूरा करने में कठिनाई हो सकती है।
आगे रिपोर्ट और जवाब पर नजर
अब इन मुद्दों पर संबंधित विभागों और अधिकारियों से मिलने वाली जानकारी महत्वपूर्ण होगी। खास तौर पर छात्रवृत्ति में बताई गई 89 महीने की देरी, MSME को बैंक ऋण देने की स्थिति और आयुष्मान भारत के क्रियान्वयन में बताई गई कमियों से जुड़े आधिकारिक आंकड़े आगे की तस्वीर स्पष्ट कर सकते हैं।फिलहाल केसी वेणुगोपाल ने PAC की बैठक के बाद इन तीन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। राजस्थान सरकार और संबंधित विभागों की ओर से इन आरोपों या समिति की चर्चा पर विस्तृत प्रतिक्रिया आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
Next Story





