राजस्थान

1.75 करोड़ के टेंडर निरस्त, अब दोबारा होगी प्रक्रिया

Rajeshwari Nishad
4 Nov 2026 5:30 PM IST
1.75 करोड़ के टेंडर निरस्त, अब दोबारा होगी प्रक्रिया
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जयपुर। राजस्थान के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) में ट्यूबवेल और पंप हाउसों की मरम्मत से जुड़े करीब 1 करोड़ 75 लाख रुपये के टेंडर निरस्त कर दिए गए हैं। ज़ी मीडिया की खबर और जलदाय विभाग के प्रमुख सचिव हेमंत गेरा के हस्तक्षेप के बाद विभाग ने यह फैसला लिया है। अब इन कार्यों के लिए डिवीजन स्तर की जगह सब डिवीजन स्तर पर नए टेंडर जारी किए जाएंगे। इस बदलाव को विभागीय निविदा प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
टेंडर निरस्त होने के बाद विभाग में नई निविदाएं जारी करने की तैयारियां शुरू होने की बात सामने आई है। नए प्रस्तावों में कार्यक्षेत्र को छोटे हिस्सों में बांटकर ठेके देने की व्यवस्था अपनाई जाएगी। इससे स्थानीय स्तर पर मरम्मत और रखरखाव के काम को व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
प्रमुख सचिव के हस्तक्षेप के बाद लिया फैसला
मिली जानकारी के अनुसार, जलदाय विभाग में ट्यूबवेल और पंप हाउसों की मरम्मत के लिए करीब 1.75 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए गए थे। इन निविदाओं को डिवीजन स्तर पर जारी करने के तरीके को लेकर सवाल उठे थे।
ज़ी मीडिया की ओर से मामला उठाए जाने के बाद विभागीय स्तर पर इसका संज्ञान लिया गया। इसके बाद प्रमुख सचिव हेमंत गेरा के हस्तक्षेप से पुराने टेंडर निरस्त करने और नई प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया गया।इस फैसले के बाद अब संबंधित कार्यों के लिए नए सिरे से निविदाएं आमंत्रित की जाएंगी। हालांकि, टेंडर निरस्त करने के विस्तृत प्रशासनिक कारणों और संबंधित विभागीय आदेश की पूरी जानकारी सामने आना बाकी है।
डिवीजन की जगह सब डिवीजन स्तर पर होंगे टेंडर
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव टेंडर जारी करने के स्तर को लेकर किया गया है। पहले मरम्मत और रखरखाव के कार्यों के लिए डिवीजन स्तर पर निविदाएं जारी की गई थीं। अब सब डिवीजन के आधार पर अलग-अलग टेंडर जारी किए जाने की बात कही गई है।
डिवीजन स्तर पर जारी होने वाले टेंडर में अपेक्षाकृत बड़े क्षेत्र के कार्य शामिल हो सकते हैं। वहीं, सब डिवीजन स्तर पर निविदाएं जारी होने से कार्यों का दायरा सीमित और अधिक स्पष्ट बनाया जा सकता है।इस व्यवस्था का एक संभावित लाभ यह है कि संबंधित क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुसार मरम्मत कार्यों की प्राथमिकता तय करना आसान हो सकता है। स्थानीय अधिकारी ट्यूबवेल, मोटर और पंप हाउसों की स्थिति को ध्यान में रखकर कार्यों की निगरानी कर सकेंगे।हालांकि, छोटे स्तर पर टेंडर जारी करने से वास्तविक प्रतिस्पर्धा कितनी बढ़ेगी, यह नई निविदाओं की शर्तों और उनमें भाग लेने वाली एजेंसियों की संख्या पर निर्भर करेगा।
पेयजल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण हैं मरम्मत कार्य
राजस्थान के शहरी और ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति के लिए ट्यूबवेल और पंप हाउस महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कई क्षेत्रों में भूमिगत जल को मोटर और पंप की सहायता से निकालकर पाइपलाइन के माध्यम से घरों तक पहुंचाया जाता है।ऐसे में पंप हाउस में तकनीकी खराबी आने, मोटर जलने या ट्यूबवेल बंद होने से संबंधित क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
ट्यूबवेल और पंप हाउसों के रखरखाव में मोटर की मरम्मत, खराब उपकरण बदलना, विद्युत संबंधी समस्याएं दूर करना और आवश्यक तकनीकी सुधार करना शामिल हो सकता है। समय पर मरम्मत होने से उपकरणों को लंबे समय तक चालू रखने और अचानक होने वाली खराबियों को कम करने में मदद मिलती है।इसलिए विभाग की नई टेंडर प्रक्रिया में कार्यों की गुणवत्ता के साथ उनकी समयबद्धता भी महत्वपूर्ण रहेगी।
स्थानीय ठेकेदारों को मिल सकते हैं अवसर
सब डिवीजन स्तर पर टेंडर जारी करने के फैसले से स्थानीय ठेकेदारों और तकनीकी एजेंसियों के लिए अवसर बढ़ने की संभावना जताई जा सकती है।बड़े कार्यक्षेत्र वाले टेंडरों में निविदा की कुल राशि, तकनीकी योग्यता और संसाधनों की आवश्यकताएं अधिक हो सकती हैं। ऐसे में छोटे ठेकेदारों के लिए प्रतिस्पर्धा करना चुनौतीपूर्ण होता है।यदि नई निविदाओं में कार्यक्षेत्र के अनुरूप पात्रता संबंधी शर्तें निर्धारित की जाती हैं, तो छोटे और मध्यम स्तर की योग्य एजेंसियां भी भाग ले सकेंगी।हालांकि, विभाग की ओर से जारी होने वाले नए टेंडरों की शर्तें सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन श्रेणियों के ठेकेदार आवेदन कर सकेंगे।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर रहेगा जोर
राजस्थान में सरकारी निर्माण और रखरखाव कार्यों की निविदा प्रक्रिया को लेकर समय-समय पर पारदर्शिता और जवाबदेही के सवाल उठते रहे हैं।जलदाय विभाग की निविदाएं भी इस लिहाज से महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनका सीधा संबंध आम नागरिकों को मिलने वाली पेयजल सुविधाओं से है।राजस्थान सरकार के ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर PHED के ट्यूबवेल और पंप हाउसों की मरम्मत तथा संचालन से संबंधित निविदाओं की जानकारी उपलब्ध रहती है। पोर्टल पर निविदाओं की स्थिति और निरस्तीकरण संबंधी विवरण देखने की व्यवस्था भी है।
नई प्रक्रिया में निविदा की शर्तों, पात्रता मानदंडों, अनुमानित लागत और कार्य पूरा करने की समयसीमा को स्पष्ट रखना जरूरी होगा। इससे निविदा में भाग लेने वाली एजेंसियों के बीच प्रतिस्पर्धा और कार्यों की निगरानी को बेहतर बनाया जा सकेगा।
अब नई निविदाओं और कार्यादेश पर नजर
करीब 1.75 करोड़ रुपये के टेंडर निरस्त होने के बाद अगला महत्वपूर्ण कदम नए टेंडर जारी करना होगा। विभाग को अब यह तय करना होगा कि किन-किन सब डिवीजन में कितने कार्य प्रस्तावित हैं और उनके लिए कितनी राशि निर्धारित की जाएगी।इसके साथ ही नई निविदाओं के प्रकाशन, आवेदन की अंतिम तिथि, तकनीकी और वित्तीय बोलियों के मूल्यांकन तथा कार्यादेश जारी करने की प्रक्रिया पर भी नजर रहेगी।
निविदाएं दोबारा जारी करने के दौरान मरम्मत कार्यों में अनावश्यक देरी न हो, यह भी विभाग के सामने महत्वपूर्ण चुनौती होगी। विशेष रूप से जिन स्थानों पर पेयजल आपूर्ति ट्यूबवेल और पंप हाउसों पर निर्भर है, वहां रखरखाव की निरंतरता बनाए रखना आवश्यक है।
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