राजस्थान

Sri Ganganagar: जल संरक्षण-जन अभियान के तहत मीडियाकर्मियों की संगोष्ठी आयोजित

Tara Tandi
14 Jun 2025 4:54 PM IST
Sri Ganganagar: जल संरक्षण-जन अभियान के तहत मीडियाकर्मियों की संगोष्ठी आयोजित
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Sri Ganganagar श्रीगंगानगर । माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में जारी वंदे गंगा, जल संरक्षण-जन अभियान के तहत शनिवार को सूचना एवं जनसम्पर्क कार्यालय श्रीगंगानगर में मीडियाकर्मियों की संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान जल संरक्षण और संग्रहण की दिशा में राज्य सरकार द्वारा करवाए जा रहे विभिन्न विकास कार्यां से अगवत करवाते हुए राजस्थान जैसे प्रदेश में जल संरक्षण का महत्व बताया गया।
इससे पूर्व मां सरस्वती के चित्र के समक्ष अतिथियों द्वारा पुष्प अर्पित कर संगोष्ठी का शुभारंभ किया गया। संगोष्ठी में जल संसाधन विभाग के एसई श्री धीरज चावला ने बताया कि राज्य सरकार किसानों की खुशहाली और कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है ताकि अंतिम छोर पर स्थित खेतों तक भी पर्याप्त नहरी पानी पहुंचा कर किसानों को लाभान्वित किया जा सके। उन्होंने कहा कि श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में नहरी जल पर निर्भरता को देखते हुए राज्य सरकार ने आईजीएनपी, भाखड़ा नहर और गंगनहर प्रणाली के सुदृढ़ीकरण के लिए गत दोनों वार्षिक बजट में कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की हैं।
उन्होंने बताया कि गंगनहर प्रणाली में क्षतिग्रस्त लाइनिंग की मरम्मत, सीसी लाइनिंग, फीडर पुनर्निर्माण, ऑटोमेशन आदि के 1195 करोड़ रुपए के कार्य करवाए जाएंगे। इससे सीपेज लॉस में कमी आएगी और किसानों को उनके हक का पूरा पानी मिल सकेगा। बेहतर जल प्रबंधन की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए श्री चावला ने कहा कि इसके लिए किसानों को भी जागरूक होना होगा। भूमि की उर्वरकता भी महत्वपूर्ण है। इसके बिना पर्याप्त जल उपलब्ध होने पर भी अपेक्षित उत्पादन नहीं मिल पाएगा। कृषि और उससे संबंधित सभी पक्षों की नवीनतम प्रणालियों से किसान जुडें ताकि वे अधिकाधिक उत्पादन प्राप्त कर सकें।
उन्होंने कहा कि कृषि प्रधान जिला होने की वजह से श्रीगंगानगर में अधिकांश सिंचित क्षेत्र नहरी जल की उपलब्धता पर निर्भर है। जिले में गंगनहर, इंदिरा गांधी नहर परियोजना और भाखड़ा नहर से फ्लड इरिगेशन यानि प्रवाह विधि से सिंचाई की जाती है। इसमें फसल हेतु आवश्यकता से अधिक जल भूमि में समा जाता है, जिसके परिणामस्वरूप भूमि की उर्वरकता में कमी आती है। बूंद-बूंद सिंचाई और फव्वारा पद्धति इसके समाधान हैं, जिसे अपनाने के लिये जल संसाधन विभाग के साथ-साथ कृषि विभाग भी किसानों को लगातार प्रोत्साहित कर रहा है।
जल संरक्षण के संकल्प और शपथ के बाद धन्यवाद ज्ञापन से संगोष्ठी का समापन किया गया। इस अवसर पर सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सहायक निदेशक श्री अनिल कुमार शाक्य, सहायक सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी श्री रामकुमार राजपुरोहित, श्रीमती ज्योति सहित मीडियाकर्मी मौजूद रहे।
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