राजस्थान
जयपुर में 24 करोड़ के क्रिप्टो सिंडिकेट का पर्दाफाश, दुबई तक जुड़े तार
Rajeshwari Nishad
30 Oct 2026 4:26 PM IST

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जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय एक बड़े साइबर अपराध और कथित हवाला नेटवर्क का खुलासा किया है। जयपुर पश्चिम की वैशाली नगर थाना पुलिस ने फर्जी बैंक खातों, मर्चेंट क्यूआर कोड और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से संदिग्ध वित्तीय लेनदेन करने वाले गिरोह के कथित मुख्य सरगना विकास ढाका को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी और उसके सहयोगियों ने पिछले दो वर्षों में करीब 24 करोड़ रुपये के USDT क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन किए हैं। जांच में दुबई से जुड़े कथित हवाला नेटवर्क की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस का आरोप है कि गिरोह गरीब मजदूरों और जरूरतमंद लोगों को पैसों का लालच देकर उनके दस्तावेज हासिल करता था। इसके बाद उनके नाम पर बैंक खाते और मर्चेंट क्यूआर कोड बनवाकर साइबर ठगी तथा ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़ी रकम का लेनदेन किया जाता था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से मोबाइल फोन, डेबिट कार्ड किट और अन्य संदिग्ध सामग्री बरामद की है।
वैशाली नगर में चल रहा था संदिग्ध नेटवर्क
जानकारी के अनुसार, जयपुर पश्चिम पुलिस को सूचना मिली थी कि वैशाली नगर इलाके की नेमी सागर कॉलोनी स्थित एक फ्लैट से संदिग्ध वित्तीय गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। तकनीकी जानकारी और स्थानीय स्तर पर जुटाए गए तथ्यों के आधार पर संबंधित स्थान पर दबिश दी गई।इस कार्रवाई में पुलिस ने सीकर निवासी विकास ढाका को हिरासत में लिया। पूछताछ और प्रारंभिक जांच के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।पुलिस के मुताबिक, आरोपी करीब 20 दिन पहले ही जयपुर आया था। संदेह है कि वह यहां से अपने नेटवर्क का विस्तार करने की तैयारी कर रहा था।पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि जयपुर में उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे और किन बैंक खातों का इस्तेमाल संदिग्ध लेनदेन के लिए किया जा रहा था।
डीसीपी प्रशांत किरण के निर्देशन में कार्रवाई
इस पूरे मामले में जयपुर पश्चिम के पुलिस उपायुक्त प्रशांत किरण के निर्देशन में वैशाली नगर थाना पुलिस और जिला विशेष टीम ने संयुक्त कार्रवाई की।थानाधिकारी अरविंद सिंह और डीएसटी प्रभारी गणेश सैनी की टीम ने संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जुटाने के बाद कार्रवाई को अंजाम दिया।पुलिस को प्रारंभिक जांच में ऐसे दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनसे बड़े स्तर पर वित्तीय लेनदेन के संकेत मिलते हैं।पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के संपर्क केवल राजस्थान तक सीमित नहीं थे। उसके नेटवर्क के तार विदेशों से भी जुड़े होने का संदेह है।अब जांच एजेंसियां बैंकिंग लेनदेन, डिजिटल वॉलेट और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटा रही हैं।
गरीब मजदूरों को बनाते थे निशाना
पुलिस के अनुसार, गिरोह की गतिविधियों में जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करने का आरोप सामने आया है।प्रारंभिक जांच में जानकारी मिली है कि आरोपी जैसलमेर और सीकर के रिसॉर्ट में काम करने वाले कुछ मजदूरों से संपर्क करता था।उन्हें आर्थिक लाभ का लालच देकर उनके पहचान संबंधी दस्तावेज हासिल किए जाते थे।इन दस्तावेजों की मदद से बैंक खाते और मर्चेंट क्यूआर कोड बनवाए जाने का आरोप है।पुलिस को संदेह है कि ऐसे खातों को बाद में साइबर अपराध और ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े अन्य व्यक्तियों को कमीशन के बदले उपलब्ध कराया जाता था।इस तरह के खातों को सामान्यतः म्यूल अकाउंट कहा जाता है। इनमें किसी व्यक्ति के बैंक खाते का इस्तेमाल दूसरे लोग संदिग्ध रकम प्राप्त करने और आगे भेजने के लिए करते हैं।हालांकि, खाताधारकों की जानकारी, सहमति और प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की जांच अलग से की जानी जरूरी है।
USDT क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ा 24 करोड़ का लेनदेन
इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से किया गया कथित वित्तीय लेनदेन है।पुलिस के अनुसार, आरोपी और उसके सहयोगियों ने पिछले दो वर्षों में करीब 24 करोड़ रुपये के बराबर USDT का लेनदेन किया।USDT एक स्टेबलकॉइन है, जिसकी कीमत को अमेरिकी डॉलर के आसपास बनाए रखने के लिए डिजाइन किया गया है।इसका इस्तेमाल डिजिटल संपत्तियों के लेनदेन में किया जाता है। हालांकि, USDT का उपयोग अपने आप में गैरकानूनी गतिविधि का प्रमाण नहीं है।इस मामले में पुलिस का आरोप है कि साइबर ठगी और अवैध सट्टेबाजी से जुड़ी रकम को क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित करके संदिग्ध नेटवर्क के माध्यम से स्थानांतरित किया जाता था।जांच में यह स्पष्ट करना बाकी है कि कुल लेनदेन में कितनी रकम वास्तविक अपराध से प्राप्त हुई थी और क्या एक ही राशि का कई बार हस्तांतरण किया गया था।इसलिए 24 करोड़ रुपये के लेनदेन को 24 करोड़ रुपये की प्रमाणित ठगी या आरोपी की व्यक्तिगत कमाई के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।
दुबई से जुड़े हवाला नेटवर्क की जांच
पुलिस की प्रारंभिक जानकारी में आरोपी के दुबई स्थित कथित हवाला नेटवर्क से संबंध सामने आने का दावा किया गया है।आरोप है कि संदिग्ध रकम को डिजिटल मुद्रा में बदलने के बाद विदेशी संपर्कों के माध्यम से उसका निपटान किया जाता था।पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि डिजिटल वॉलेट का संचालन कौन करता था और किन व्यक्तियों के निर्देश पर रकम एक खाते से दूसरे खाते में भेजी जाती थी।इसके अलावा विदेशी संपर्कों, बैंक खातों और क्रिप्टो वॉलेट से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है।फिलहाल विदेशी नेटवर्क में शामिल अन्य व्यक्तियों की पहचान और भूमिका के संबंध में अंतिम जानकारी सामने नहीं आई है।
9 मोबाइल और डेबिट कार्ड किट बरामद
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान आरोपी के पास से कई महत्वपूर्ण वस्तुएं बरामद करने की जानकारी दी है।बरामद सामग्री में नौ मोबाइल फोन, फिनो पेमेंट्स बैंक की आठ डेबिट कार्ड किट और गूगल पे स्कैनर रोल शामिल हैं।पुलिस का मानना है कि मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड से गिरोह के अन्य सदस्यों तथा वित्तीय लेनदेन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।जब्त उपकरणों का फॉरेंसिक परीक्षण कराया जा रहा है। साथ ही टेलीग्राम चैट, क्रिप्टो वॉलेट और डिजिटल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया जा रहा है।जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि संदिग्ध बैंक खातों में किन स्रोतों से रकम पहुंची थी।
साइबर अपराध में बैंक खातों का बढ़ रहा दुरुपयोग
हाल के समय में जयपुर पुलिस ने म्यूल बैंक खातों से जुड़े कई अन्य मामलों में भी कार्रवाई की है।अक्टूबर के मध्य में जयपुर दक्षिण पुलिस ने एक अलग अभियान में 21 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उस मामले में देशभर की 101 साइबर शिकायतों से जुड़े लगभग 18.60 करोड़ रुपये के संदिग्ध फ्रॉड का पता चला था।पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधी कई बार दूसरे व्यक्तियों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं, ताकि रकम के वास्तविक स्रोत और अंतिम प्राप्तकर्ता की पहचान करना मुश्किल हो सके।हालांकि, उस पुराने मामले और विकास ढाका से जुड़े ताजा प्रकरण के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
लोगों के लिए जरूरी है सतर्कता
पुलिस की इस कार्रवाई से स्पष्ट होता है कि बैंक खाते और पहचान संबंधी दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल गंभीर कानूनी परेशानी पैदा कर सकता है।किसी अनजान व्यक्ति को कमीशन के बदले अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, ओटीपी या डिजिटल वॉलेट उपलब्ध कराना जोखिम भरा हो सकता है।यदि किसी के खाते में संदिग्ध रकम आती है, तो उसे तुरंत अपने बैंक और संबंधित अधिकारियों को जानकारी देनी चाहिए।साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने पर राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत की जा सकती है।
फिलहाल जयपुर पुलिस विकास ढाका से जुड़े वित्तीय लेनदेन और अन्य संदिग्ध व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रही है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
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