राजस्थान

सोनिया गांधी की किताब पर घमासान, गहलोत बोले- प्रकाशन पर हो सकता है दबाव

SHIDDHANT
28 Aug 2026 9:19 PM IST
सोनिया गांधी की किताब पर घमासान, गहलोत बोले- प्रकाशन पर हो सकता है दबाव
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Jaipur जयपुर: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोनिया गांधी की आगामी पुस्तक को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुस्तक के प्रकाशन में किसी तरह का दबाव हो सकता है, जिसके कारण भारत में इसकी छपाई नहीं हो पा रही है। गहलोत ने इसे लोकतंत्र से जुड़ा सवाल बताते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान अशोक गहलोत ने कहा कि सोनिया गांधी की पुस्तक ‘पेंगुइन इंडिया’ के प्रकाशन की घोषणा के बाद देशभर में लोगों में इसे लेकर उत्सुकता थी। उन्होंने कहा कि सभी इंतजार कर रहे थे कि यह किताब कब सामने आएगी।
गहलोत ने दावा किया कि पहले खबर आई थी कि कंपनी पुस्तक छापने के लिए तैयार है, लेकिन बाद में स्थिति बदल गई। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा क्या कारण है कि भारत में इसकी छपाई नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसके पीछे कोई न कोई दबाव जरूर हो सकता है। कांग्रेस नेता ने कहा कि सोनिया गांधी से पुस्तक के कुछ अंश हटाने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। गहलोत ने आरोप लगाया कि किताब में चीन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े कुछ विषय हो सकते हैं, जिनको लेकर आपत्ति जताई जा रही है।
उन्होंने कहा कि किसी लेखक की पुस्तक को प्रकाशित होने से रोकना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा है। गहलोत ने सवाल किया कि लोकतंत्र में इस तरह की स्थिति क्यों बन रही है। अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए विचारों की स्वतंत्रता जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी भी लेखक को अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए और प्रकाशन प्रक्रिया में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।
हालांकि, इस मामले को लेकर अभी तक पुस्तक प्रकाशक या संबंधित पक्षों की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, कांग्रेस नेता के बयान के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
गहलोत ने कहा कि देश में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर किसी पुस्तक के प्रकाशन पर दबाव बनाया जाता है तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
सोनिया गांधी की इस पुस्तक को लेकर राजनीतिक हलकों में पहले से ही चर्चा रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह पुस्तक कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर प्रकाश डाल सकती है।
वहीं, भाजपा की ओर से इस बयान पर प्रतिक्रिया आने के बाद ही मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल अशोक गहलोत के बयान ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक बहस को केंद्र में ला दिया है।
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