
Rajasthan राजस्थान: सरकारी अस्पतालों में मरीज यह उम्मीद लेकर आते हैं कि उन्हें समय पर और सही इलाज मिलेगा, लेकिन जब इलाज से जुड़ी जरूरी व्यवस्थाएं ही लापरवाही की भेंट चढ़ जाएं, तो सवाल केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर ही नहीं, बल्कि पूरी जवाबदेही प्रणाली पर खड़े हो जाते हैं। ऐसा ही एक मामला प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एसएमएस मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक से सामने आया है।
यहां एक वरिष्ठ डॉक्टर के रिटायरमेंट के 27 दिन बाद भी उनका चैंबर अब तक बंद पड़ा है। चैंबर के दरवाजे पर डॉक्टर का नाम अब भी उसी तरह चमक रहा है, जबकि कमरे पर लगा ताला वैसा ही मौजूद है, जैसे उसे खोले जाने का इंतजार अभी भी जारी हो।
स्थानीय लोगों और अस्पताल में आने वाले मरीजों के बीच यह स्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है। मरीजों का कहना है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में पहले से ही भीड़ और संसाधनों की कमी की समस्या रहती है, ऐसे में खाली पड़े कमरे और निष्क्रिय व्यवस्थाएं अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
अस्पताल परिसर में यह चैंबर लंबे समय से उपयोग में नहीं है, लेकिन इसके बावजूद न तो इसे नए उपयोग के लिए पुनः आवंटित किया गया है और न ही नामपट्टिका या व्यवस्थागत बदलाव किया गया है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया धीमी गति से चल रही है।
जानकारी के अनुसार, संबंधित वरिष्ठ डॉक्टर के रिटायर होने के बाद से अब तक इस चैंबर को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसे में महत्वपूर्ण स्थान और संसाधन बिना उपयोग के बंद पड़े हैं, जबकि अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
अस्पताल के अंदर काम करने वाले कुछ कर्मचारियों ने भी नाम न बताने की शर्त पर स्वीकार किया कि कई बार रिटायरमेंट या ट्रांसफर के बाद कमरे और संसाधनों को खाली करने की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो पाती, जिससे व्यवस्थाएं प्रभावित होती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े सरकारी अस्पताल में जगह और संसाधनों का सही उपयोग बेहद जरूरी होता है, क्योंकि यही सीधे तौर पर मरीजों के इलाज की गुणवत्ता से जुड़ा होता है।
इस मामले ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर 27 दिन बीत जाने के बाद भी चैंबर को खाली कर आगे उपयोग में क्यों नहीं लाया गया।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और तेजी लाई जाए, ताकि अस्पतालों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके और मरीजों को किसी तरह की असुविधा न हो।
कुल मिलाकर, एसएमएस मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में बंद पड़ा यह चैंबर न केवल एक प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की कितनी आवश्यकता है।





