राजस्थान

सांवलिया सेठ को चांदी के दो शोरूम की प्रतिकृतियां भेंट, करीब सात लाख रुपये कीमत

nidhi
26 Oct 2026 8:10 AM IST
सांवलिया सेठ को चांदी के दो शोरूम की प्रतिकृतियां भेंट, करीब सात लाख रुपये कीमत
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दिल्ली के कारोबारी परिवार की श्रद्धा
चित्तौड़गढ़: मेवाड़ के प्रसिद्ध श्री सांवलियाजी मंदिर में दिल्ली के एक आभूषण कारोबारी परिवार ने चांदी से बने दो शोरूम की प्रतिकृतियां भेंट की हैं। दोनों मॉडलों में कुल तीन किलो 370 ग्राम चांदी का इस्तेमाल किया गया है। इनमें प्रयुक्त चांदी की कीमत लगभग सात लाख सात हजार रुपये बताई गई है। परिवार ने वाराणसी और रायपुर में अपने नए प्रतिष्ठानों की शुरुआत के अवसर पर यह भेंट अर्पित की। मंदिर में चढ़ाए गए ये वास्तविक शोरूम नहीं, बल्कि उनकी इमारतों के चांदी से तैयार छोटे मॉडल हैं।
कारोबारी परिवार गुरुवार को मंदिर पहुंचा और दर्शन के बाद दोनों प्रतिकृतियां सांवरा सेठ को समर्पित कीं। परिवार लंबे समय से भगवान सांवलिया सेठ के प्रति आस्था रखता है। मंदिर के प्रशासनिक अधिकारी राहुल धाकड़ के अनुसार, नए शोरूम की शुरुआत पर उसकी चांदी की प्रतिकृति बनवाकर भेंट करना परिवार की पुरानी परंपरा है। कारोबार का विस्तार होने पर परिवार इसी तरह मंदिर पहुंचकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करता रहा है। इस बार दो नए प्रतिष्ठानों के लिए अलग-अलग मॉडल तैयार कराए गए।
भेंट किए गए दोनों मॉडल बहुमंजिला शोरूम की इमारतों की तरह बनाए गए हैं। इनमें चार मंजिला संरचना और बारीक कारीगरी दिखाई देती है। संबंधित प्रतिष्ठानों की पहचान के लिए मॉडलों पर उनके नाम भी अंकित किए गए हैं। चांदी में इमारत का स्वरूप तैयार करने के कारण यह भेंट सामान्य आभूषण या बर्तन से अलग है। दोनों प्रतिकृतियों का संयुक्त वजन 3.370 किलोग्राम बताया गया है। परिवार ने अपने नए प्रतिष्ठानों के वास्तविक उद्घाटन से पहले उनकी प्रतिकृतियां भगवान के दरबार में अर्पित कीं।
इनमें एक मॉडल वाराणसी में शुरू होने जा रहे शोरूम से संबंधित है। यह प्रतिष्ठान महमूरगंज क्षेत्र में तैयार किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसका उद्घाटन 26 अक्टूबर को निर्धारित था। दूसरे मॉडल का संबंध छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शुरू होने वाले प्रतिष्ठान से है, जिसके उद्घाटन की तारीख एक नवंबर बताई गई है। दोनों शहरों में कारोबारी विस्तार की खुशी में परिवार ने मंदिर में यह विशेष भेंट चढ़ाई। उद्घाटन से पहले भगवान का आशीर्वाद लेने की भावना इस आयोजन से जुड़ी है।
राजस्थान सर्राफा संघ के प्रदेश महामंत्री किशन पिछोलिया के अनुसार, दोनों मॉडलों में इस्तेमाल चांदी का मूल्य संबंधित बाजार भाव के आधार पर करीब सात लाख सात हजार 700 रुपये है। यह मूल्यांकन चांदी की बताई गई मात्रा और उस समय की दर से संबंधित है। इसे मौजूदा दिन का नया सर्राफा भाव नहीं माना जाना चाहिए। चांदी की कीमत बदलने पर धातु का मूल्य भी बदल सकता है। समाचार में लगभग सात लाख रुपये की कीमत इसी अनुमान के आधार पर बताई गई है।
परिवार की श्रद्धा में सांवरा सेठ को कारोबार का सहभागी मानने की भावना भी शामिल है। रिपोर्टों के अनुसार, कारोबारी अपने व्यवसाय की सफलता और विस्तार को भगवान के आशीर्वाद से जोड़ते हैं। इसी विश्वास के तहत नए प्रतिष्ठान का मॉडल पहले मंदिर में समर्पित किया जाता है। यह परिवार की व्यक्तिगत धार्मिक मान्यता है। चांदी की प्रतिकृति उसके लिए केवल कीमती धातु की वस्तु नहीं, बल्कि अपने कामकाज और नई शुरुआत के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है।
श्री सांवलिया सेठ मंदिर में अनोखे स्वरूप की भेंट अर्पित किए जाने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार विभिन्न वस्तुओं की चांदी की प्रतिकृतियां चढ़ाते हैं। इनमें कार, ट्रैक्टर, पेट्रोल पंप और किताब जैसी वस्तुओं के मॉडल भी शामिल रहे हैं। इस बार शोरूम की इमारतों के मॉडल अर्पित किए जाने से भेंट की अलग पहचान बनी है। इसकी विशेषता चांदी के वजन के साथ उस कारोबारी शुरुआत में भी है, जिसका प्रतीक बनाकर इन्हें तैयार किया गया है।
मंदिर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया गांव में स्थित है। यह चित्तौड़गढ़-उदयपुर मार्ग से जुड़ा प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के विवरण में भी मंडफिया स्थित सांवलियाजी धाम का उल्लेख है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। खबर का उदयपुर से प्रकाशित होना और मंदिर की भौगोलिक स्थिति अलग बातें हैं; यह भेंट चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित मंदिर में अर्पित की गई है। पर्यटन मंत्रालय के विवरण में मंदिर से जुड़ी स्थानीय परंपरा का भी उल्लेख मिलता है। इसके अनुसार, एक चरवाहे के स्वप्न से संबंधित जनमान्यता के आधार पर वर्ष 1840 में तीन प्रतिमाएं मिलने की कथा प्रचलित है। इनसे जुड़े अलग-अलग मंदिरों में मंडफिया का सांवलियाजी धाम भी शामिल है। यह विवरण स्थानीय धार्मिक मान्यता के रूप में प्रस्तुत किया गया है। आज इस धाम में पहुंचने वाले श्रद्धालु दर्शन, प्रार्थना और अपनी श्रद्धानुसार भेंट के माध्यम से भगवान के प्रति विश्वास व्यक्त करते हैं।
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