राजस्थान

रंधावा का BJP पर आरोप नगर निकाय चुनाव में प्रशासनिक दबाव का दावा

Ratna Netam
7 Oct 2026 4:26 PM IST
रंधावा का BJP पर आरोप नगर निकाय चुनाव में प्रशासनिक दबाव का दावा
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जयपुर। कांग्रेस के राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी पर पिछले नगर निकाय चुनावों के दौरान पुलिस और प्रशासन के जरिए दबाव बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि यदि सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल नहीं किया गया होता तो सत्तारूढ़ भाजपा को चुनाव में और बड़ी हार का सामना करना पड़ता। रंधावा ने आगामी पंचायती राज चुनावों से पहले राज्य में लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज और प्रशासन की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठाए। रंधावा ने कहा कि पिछले नगर निकाय चुनावों के नतीजों में कांग्रेस का वोट शेयर मजबूत रहा और भाजपा को अपेक्षित बढ़त नहीं मिल सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद भाजपा ने पुलिस, प्रशासन और नौकरशाही के जरिए दबाव बनाकर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की। हालांकि ये कांग्रेस नेता के राजनीतिक आरोप हैं और भाजपा ने ऐसे आरोपों को पहले भी खारिज किया है।
रंधावा ने कहा, “पहले हुए नगर निकाय चुनावों में देखिए कि हमारा वोट शेयर कितना ज्यादा था। अगर उन्होंने पुलिस या प्रशासन के जरिए दबाव न बनाया होता, तो भाजपा का पूरी तरह सफाया हो जाता।” उन्होंने कहा कि चुनावों में प्रशासनिक मशीनरी को राजनीतिक रूप से तटस्थ रहना चाहिए और किसी भी दल के पक्ष में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।राजस्थान में हाल में हुए शहरी निकाय चुनावों के बाद से कांग्रेस लगातार भाजपा सरकार पर सरकारी मशीनरी के कथित दुरुपयोग का आरोप लगा रही है। कांग्रेस नेताओं ने मतगणना, निकाय प्रमुखों के चुनाव और पार्षदों पर कथित दबाव जैसे मुद्दे उठाए हैं। दूसरी ओर भाजपा का कहना रहा है कि चुनाव निर्धारित नियमों के तहत हुए और विपक्ष अपनी चुनावी कमियों को छिपाने के लिए ऐसे आरोप लगा रहा है।
रंधावा का ताजा बयान ऐसे समय आया है जब राजस्थान में पंचायती राज चुनावों की तैयारी चल रही है। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव चार चरणों में कराने का कार्यक्रम जारी किया है। मतदान 23 अक्टूबर से 16 नवंबर के बीच अलग-अलग चरणों में होना है। इसके बाद आगे की चुनावी प्रक्रिया और परिणामों से जुड़े चरण पूरे किए जाएंगे।कांग्रेस ने पंचायती राज चुनावों के लिए अपनी रणनीति पर भी काम तेज कर दिया है। शहरी निकाय चुनावों के अनुभव के बाद पार्टी स्थानीय स्तर पर मजबूत उम्मीदवारों, संगठनात्मक समन्वय और समय पर टिकट वितरण पर जोर दे रही है। पार्टी का प्रयास है कि ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद स्तर पर स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखकर उम्मीदवार उतारे जाएं।
पिछले नगर निकाय चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के बीच कई क्षेत्रों में कड़ा मुकाबला देखने को मिला था। उपलब्ध चुनावी रिपोर्टों के मुताबिक भाजपा ने 309 शहरी निकायों के 10,120 वार्डों में 4,132 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को 3,568 वार्डों में जीत मिली। निर्दलीय और छोटे दलों ने भी बड़ी संख्या में सीटें हासिल कीं। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया था कि दोनों प्रमुख दलों के वोट शेयर में अंतर बहुत कम रहा।इन चुनावों के बाद कांग्रेस के भीतर भी अपने प्रदर्शन की समीक्षा शुरू हुई है। पार्टी ने क्रॉस-वोटिंग, बगावत और संगठनात्मक कमजोरियों की जांच के लिए एक समिति गठित की है। नौ सदस्यीय समिति को स्थानीय निकाय चुनावों में सामने आई शिकायतों और पार्टी नेताओं की भूमिका की समीक्षा करने का जिम्मा दिया गया है।
यानी एक तरफ कांग्रेस भाजपा पर प्रशासनिक दबाव का आरोप लगा रही है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी अपने अंदर की खामियों और अनुशासन से जुड़े मामलों की भी जांच कर रही है। इससे स्पष्ट है कि पंचायती राज चुनावों से पहले दोनों दल संगठन और चुनावी रणनीति के स्तर पर सक्रिय हो गए हैं।रंधावा ने अपने बयान में नौकरशाहों और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों ने निष्पक्ष रहने के बजाय सत्तारूढ़ दल का समर्थन किया। कांग्रेस नेताओं की ओर से इससे पहले भी इसी तरह के आरोप लगाए जा चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी सितंबर में आरोप लगाया था कि निकाय चुनावों में पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल कुछ उम्मीदवारों और पार्षदों पर दबाव बनाने के लिए किया गया। भाजपा ने इन आरोपों को राजनीतिक बताया था।
आगामी पंचायती राज चुनावों को लेकर रंधावा ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया जमीनी स्तर पर निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। उनका कहना है कि पंचायत चुनाव केवल स्थानीय प्रतिनिधियों के चुनाव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण लोकतंत्र और स्थानीय स्वशासन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।राजस्थान में पंचायत चुनावों का राजनीतिक महत्व भी काफी बड़ा है। ग्राम पंचायत से लेकर जिला परिषद तक इन चुनावों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक दलों की संगठनात्मक ताकत का आकलन होता है। यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों इन चुनावों को गंभीरता से ले रही हैं।फिलहाल रंधावा के आरोपों ने पंचायत चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। कांग्रेस जहां प्रशासन की निष्पक्षता को बड़ा मुद्दा बना रही है, वहीं भाजपा अपने प्रदर्शन और संगठन के आधार पर चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। आने वाले दिनों में पंचायत चुनावों के प्रचार के साथ पुलिस-प्रशासन की भूमिका, निष्पक्ष चुनाव और स्थानीय लोकतंत्र जैसे मुद्दे और प्रमुखता से सामने आ सकते हैं।
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