राजस्थान

जैसलमेर में राजनाथ सिंह की अहम बैठक

Kavita2
3 Nov 2026 12:45 PM IST
जैसलमेर में राजनाथ सिंह की अहम बैठक
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जैसलमेर। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार (3 नवंबर 2026) को राजस्थान के सीमावर्ती जिले जैसलमेर में रक्षा मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण, रक्षा तैयारियों को मजबूत करने, उन्नत सैन्य तकनीकों के इस्तेमाल और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। रक्षा मंत्री ने आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए सेना को अत्याधुनिक उपकरणों और तकनीकों से सुसज्जित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने समिति के सदस्यों को सशस्त्र बलों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने और रक्षा क्षमताओं को मजबूत बनाने के लिए सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों की जानकारी भी दी।

रक्षा मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की बैठक जैसलमेर में आयोजित की गई। इसमें लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों के साथ रक्षा मंत्रालय तथा सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी रही। बैठक का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श करना और रक्षा क्षेत्र की मौजूदा आवश्यकताओं के संबंध में समिति के सदस्यों को जानकारी देना था।

राजनाथ सिंह ने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण को देश की सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति और नई तकनीकों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए सैन्य क्षमताओं को लगातार बेहतर बनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

भारत की थल सेना, नौसेना और वायुसेना के सामने अलग-अलग प्रकार की परिचालन चुनौतियां हैं। ऐसे में तीनों सेनाओं के लिए आधुनिक हथियार, प्रभावी संचार व्यवस्था, बेहतर निगरानी प्रणाली और तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता महत्वपूर्ण मानी जाती है।

बैठक में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और स्वदेशी रक्षा उपकरणों के उपयोग को प्रोत्साहित करने जैसे मुद्दे भी प्रमुख रहे। सरकार पिछले कुछ वर्षों से घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत बनाने और भारत में विकसित सैन्य उपकरणों की खरीद को प्राथमिकता देने की दिशा में काम कर रही है।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का उद्देश्य केवल विदेशों से हथियारों की खरीद पर निर्भरता कम करना नहीं है, बल्कि देश के भीतर नई तकनीकों के विकास, निर्माण और अनुसंधान को भी बढ़ावा देना है।

भारतीय रक्षा उद्योग में सरकारी संस्थानों के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी भी लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। रक्षा उपकरणों का स्वदेशी उत्पादन बढ़ने से घरेलू उद्योगों को नए अवसर मिल सकते हैं और सैन्य आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकों के विकास को गति मिल सकती है।

रक्षा मंत्री ने सैन्य आधुनिकीकरण के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधनों के महत्व पर भी जोर दिया। किसी भी आधुनिक सैन्य व्यवस्था के लिए केवल उपकरणों की खरीद पर्याप्त नहीं होती। उनके रखरखाव, प्रशिक्षण, तकनीकी उन्नयन और दीर्घकालिक परिचालन जरूरतों के लिए भी पर्याप्त संसाधनों की आवश्यकता होती है।

ऐसे में रक्षा मंत्रालय के सामने उपलब्ध बजट का प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करने और प्राथमिकताओं के अनुसार सैन्य आवश्यकताओं को पूरा करने की चुनौती रहती है।

रक्षा मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति का उद्देश्य विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों को मंत्रालय की नीतियों, योजनाओं और गतिविधियों से संबंधित जानकारी देना भी है। इस मंच पर सदस्य रक्षा क्षेत्र की जरूरतों और चुनौतियों को लेकर अपने सुझाव रख सकते हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर संसदीय प्रतिनिधियों के बीच विचार-विमर्श से नीतिगत प्राथमिकताओं को लेकर व्यापक चर्चा का अवसर मिलता है।

जैसलमेर में इस बैठक का आयोजन सामरिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजस्थान का यह जिला भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक स्थित है। यहां का विशाल रेगिस्तानी क्षेत्र और सीमावर्ती भूगोल रक्षा तैयारियों के लिहाज से विशेष महत्व रखता है।

पश्चिमी सीमा पर सैन्य तैयारियों को मजबूत बनाए रखने के लिए आधुनिक निगरानी व्यवस्था, बेहतर संचार प्रणाली और आवश्यक बुनियादी ढांचे की भूमिका अहम होती है।

इस क्षेत्र में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सुरक्षा बलों को अलग-अलग प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में अत्याधुनिक तकनीक और बेहतर संसाधनों की उपलब्धता परिचालन क्षमता बढ़ाने में सहायक होती है।

बैठक के संभावित विषयों में पश्चिमी सीमा की सुरक्षा तैयारियां और सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के प्रयास भी शामिल थे। हालांकि, इन विषयों पर हुए विस्तृत विचार-विमर्श और किसी विशेष निर्णय की आधिकारिक जानकारी अलग से सामने आने पर ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार (2 नवंबर) को दो दिवसीय दौरे पर जैसलमेर पहुंचे थे। उनके दौरे के दौरान रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और समिति के सदस्यों की उपस्थिति रही।

सोमवार को राजनाथ सिंह ने जैसलमेर स्थित 'शौर्य वन' युद्ध संग्रहालय में आयोजित विशेष लाइट एंड साउंड शो में भी हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में भारतीय सैनिकों के साहस, बलिदान और सैन्य इतिहास को प्रदर्शित किया गया।

इस दौरान रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और परामर्शदात्री समिति के सदस्य भी मौजूद थे।

राजनाथ सिंह इससे पहले भी विभिन्न मंचों पर भारतीय सशस्त्र बलों में आधुनिक तकनीकों के उपयोग और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दे चुके हैं।

अक्टूबर 2026 में आयोजित सेना कमांडरों के सम्मेलन में उन्होंने भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता बताई थी।

उन्होंने सेना में ड्रोन और अन्य आधुनिक तकनीकों के उपयोग को महत्वपूर्ण बताते हुए बदलती परिस्थितियों के अनुरूप तैयारियां करने पर जोर दिया था।

आधुनिक युद्ध के क्षेत्र में ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और साइबर सुरक्षा जैसी तकनीकों का महत्व बढ़ रहा है। ये तकनीकें निगरानी, सूचना संग्रह, संचार और सैन्य संचालन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित कर रही हैं।

ऐसे में रक्षा अनुसंधान और तकनीकी विकास को बढ़ावा देना भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

रक्षा मंत्रालय स्वदेशी अनुसंधान संस्थानों, रक्षा उत्पादन कंपनियों और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े अन्य संस्थानों के सहयोग से नई क्षमताओं के विकास पर काम कर रहा है।

राजनाथ सिंह ने हाल ही में रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भरता 2.0' की आवश्यकता पर भी जोर दिया था। उनका कहना था कि भारत को अब ऐसी उन्नत तकनीकों के विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, जिनसे भविष्य की रक्षा आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।

जैसलमेर में आयोजित बैठक को इसी व्यापक रक्षा आधुनिकीकरण प्रक्रिया के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

देश की सुरक्षा जरूरतों में लगातार बदलाव को देखते हुए सैन्य संसाधनों का आधुनिकीकरण, समय पर वित्तीय सहायता और घरेलू तकनीकी क्षमताओं का विकास सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं।

रक्षा मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की इस बैठक से राष्ट्रीय सुरक्षा और सशस्त्र बलों की भविष्य की आवश्यकताओं पर विचार-विमर्श को आगे बढ़ाने का अवसर मिला है।

हालांकि, बैठक में लिए गए किसी विशेष नीतिगत निर्णय, वित्तीय स्वीकृति या नई रक्षा खरीद की घोषणा का विस्तृत आधिकारिक विवरण सामने आना बाकी है।

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