राजस्थान

Rajasthan : स्कूली नामांकन में बड़ी गिरावट, लाखों छात्रों ने छोड़ा साथ

Kavita2
14 July 2026 1:11 PM IST
Rajasthan : स्कूली नामांकन में बड़ी गिरावट, लाखों छात्रों ने छोड़ा साथ
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Jaipur जयपुर : राजस्थान में पिछले दो शैक्षणिक वर्षों के दौरान आठ लाख से ज्यादा स्कूली छात्रों की संख्या में कमी दर्ज की गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल बदलते जनसांख्यिकी (डेमोग्राफिक बदलाव) का संकेत नहीं है, बल्कि सरकारी स्कूलों के सामने छात्रों को बनाए रखने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की बड़ी चुनौती भी दिखाता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, राज्य में स्कूली नामांकन में आई गिरावट के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें बदलती जनसंख्या दर, निजी स्कूलों की ओर बढ़ता रुझान, ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन और सरकारी स्कूलों में सुविधाओं को लेकर अभिभावकों की अपेक्षाएं शामिल हैं।

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। कई इलाकों में कम नामांकन के कारण स्कूलों के संचालन, शिक्षकों की तैनाती और संसाधनों के बेहतर उपयोग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान के स्कूलों में लगातार दो शैक्षणिक वर्षों में छात्रों की संख्या में बड़ी गिरावट आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में छात्रों का कम होना केवल किसी एक कारण का परिणाम नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे कई सामाजिक और आर्थिक बदलाव जिम्मेदार हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों ने बताया कि राज्य के कई ग्रामीण इलाकों में परिवार रोजगार और बेहतर अवसरों की तलाश में दूसरे शहरों या राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं। इसका सीधा असर स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या पर पड़ रहा है।

इसके अलावा, कुछ अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजना पसंद कर रहे हैं। उनका मानना है कि निजी स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम, डिजिटल शिक्षा, अतिरिक्त गतिविधियां और अन्य सुविधाएं बेहतर मिलती हैं। हालांकि, सरकारी स्कूलों में भी सुविधाओं के विस्तार के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए केवल बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार भी जरूरी है। बेहतर शिक्षण व्यवस्था, नियमित कक्षाएं, आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल और अभिभावकों का भरोसा बढ़ाना महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।

राजस्थान सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं लागू की जा रही हैं। इनमें स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं का विकास, स्मार्ट क्लास, डिजिटल संसाधन और शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाने जैसे प्रयास शामिल हैं।

हालांकि, शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। उनका मानना है कि जब तक अभिभावकों को सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का भरोसा नहीं मिलेगा, तब तक छात्रों की संख्या में सुधार करना मुश्किल हो सकता है।

विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि छात्रों की घटती संख्या का असर भविष्य में स्कूलों की संरचना पर पड़ सकता है। कम नामांकन वाले स्कूलों को लेकर सरकार को नीति बनानी पड़ सकती है, ताकि शिक्षकों और संसाधनों का सही उपयोग हो सके।

ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष ध्यान देने की जरूरत बताते हुए शिक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि दूरदराज इलाकों में स्कूलों तक पहुंच, शिक्षकों की उपलब्धता और परिवहन जैसी समस्याओं को दूर करना जरूरी है। इससे बच्चों को पढ़ाई से जुड़े रहने में मदद मिलेगी।

वहीं, बाल शिक्षा से जुड़े संगठनों का कहना है कि स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें दोबारा शिक्षा व्यवस्था से जोड़ना भी जरूरी है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर निगरानी और जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।

राजस्थान में छात्रों की संख्या में आई यह गिरावट शिक्षा विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो सरकारी स्कूलों में नामांकन की समस्या और गंभीर हो सकती है।

फिलहाल शिक्षा विभाग के सामने चुनौती है कि वह घटते नामांकन के कारणों को समझे और ऐसी रणनीति तैयार करे, जिससे सरकारी स्कूलों में छात्रों का भरोसा बढ़े और शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिल सके।

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