राजस्थान
जयपुर में तीन दिन तक चला धरना रितु बराला मामले में अब कोर्ट जाने की तैयारी
Ratna Netam
21 Oct 2026 4:02 PM IST

x
जयपुर। राजस्थान में एनएसयूआई नेता रितु बराला के साथ कथित मारपीट के मामले को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि पार्टी अब इस मामले में अदालत का दरवाजा खटखटाएगी। कांग्रेस दिल्ली पुलिस के उन कर्मचारियों के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रही है, जिन पर एनएसयूआई की राष्ट्रीय पदाधिकारी रितु बराला के साथ मारपीट करने का आरोप है। जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में लगातार करीब 43 घंटे तक चले धरने को बुधवार को समाप्त कर दिया गया। इस प्रदर्शन में राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
डोटासरा बोले- न्याय के लिए अदालत जाना ही विकल्प
जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि पार्टी रितु बराला को न्याय दिलाने और एफआईआर दर्ज कराने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेगी।डोटासरा ने सवाल उठाया कि जब देश में एक ही कानून लागू है, तो उसके पालन को लेकर अलग-अलग राज्यों में अलग परिस्थितियां क्यों सामने आ रही हैं।उन्होंने कहा कि अदालत यह तय करेगी कि जिस कानून का पालन केरल में किया जा रहा है, उसका राजस्थान में पालन क्यों नहीं हो रहा है।डोटासरा ने आरोप लगाया कि राजस्थान और दिल्ली, दोनों जगह एफआईआर दर्ज करने की मांग पूरी नहीं होने के कारण कांग्रेस के पास अदालत जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।
तीन दिन तक पुलिस कमिश्नरेट में चला धरना
रितु बराला के मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर कांग्रेस नेताओं ने सोमवार को जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में धरना शुरू किया था।इस प्रदर्शन में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, पार्टी विधायक और कई वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए।प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और मामले में कार्रवाई की मांग की। मंगलवार को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की घटनाएं भी सामने आई थीं।कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि पुलिस उनकी शिकायत दर्ज करने से इनकार कर रही है। बुधवार को पुलिस की ओर से लिखित जवाब मिलने के बाद पार्टी ने धरना समाप्त करने और न्यायिक रास्ता अपनाने का फैसला किया।
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान कथित मारपीट
मामले की शुरुआत 13 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन से हुई थी। रितु बराला ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद दिल्ली पुलिस की महिला कर्मचारियों ने उनके साथ मारपीट की।बराला के अनुसार, पुलिस बस में उनके बाल खींचे गए, गला दबाया गया और थप्पड़ मारे गए। उन्होंने पुलिस थाने में भी मारपीट किए जाने का आरोप लगाया था।घटना के बाद कांग्रेस और एनएसयूआई नेताओं ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। हालांकि, ये आरोप हैं और संबंधित पुलिसकर्मियों के दोषी होने का कोई न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
जीरो एफआईआर को लेकर क्या है विवाद?
जीरो एफआईआर ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत संज्ञेय अपराध की सूचना घटना के क्षेत्राधिकार से बाहर के पुलिस थाने में भी दर्ज कराई जा सकती है। बाद में मामला संबंधित थाने को भेजा जा सकता है।कांग्रेस का कहना है कि रितु बराला की शिकायत पर जयपुर पुलिस को जीरो एफआईआर दर्ज करनी चाहिए थी।वहीं, जयपुर पुलिस का तर्क है कि घटना से संबंधित शिकायत दिल्ली के कनॉट प्लेस थाने में पहले ही दी जा चुकी है। पुलिस के अनुसार, संबंधित प्रकरण की जांच दिल्ली में चल रही है, इसलिए उसी घटनाक्रम पर अलग जीरो एफआईआर दर्ज करने का आधार नहीं बनता।डोटासरा ने पुलिस की इस व्याख्या को गलत बताते हुए अदालत से कानूनी स्थिति स्पष्ट कराने की बात कही है।
कांग्रेस ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन मामले में उचित कानूनी प्रक्रिया नहीं अपना रहा है। उन्होंने कहा कि यदि किसी महिला के साथ मारपीट की शिकायत सामने आती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।दूसरी ओर, राजस्थान सरकार के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कांग्रेस के प्रदर्शन की आलोचना करते हुए कहा कि एक ही मामले में दूसरी एफआईआर की मांग उचित नहीं है। उन्होंने कांग्रेस पर इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप भी लगाया था।
अब अदालत के फैसले पर रहेंगी नजरें
करीब तीन दिन तक चले धरने के बाद कांग्रेस ने अब इस मामले को कानूनी स्तर पर आगे बढ़ाने का फैसला किया है।पार्टी अदालत से जीरो एफआईआर दर्ज करने के मुद्दे पर हस्तक्षेप की मांग करेगी। हालांकि, अदालत में याचिका दाखिल होने और उस पर सुनवाई के बाद ही आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।फिलहाल रितु बराला के साथ कथित मारपीट और एफआईआर दर्ज करने के विवाद ने राजस्थान की राजनीति में एक नया मुद्दा खड़ा कर दिया है।
Next Story





