राजस्थान
राजस्थान के धौलपुर में कृष्ण जन्माष्टमी की तैयारी पूरी
Ritisha Jaiswal
18 Aug 2022 5:10 PM IST

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भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव नजदीक है और कान्हा को सजाने संवारने और उत्सवी उल्लास में जन्म उत्सव मनाने के लिए ब्रज क्षेत्र में धूम मची हुई है
भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव नजदीक है और कान्हा को सजाने संवारने और उत्सवी उल्लास में जन्म उत्सव मनाने के लिए ब्रज क्षेत्र में धूम मची हुई है. राजस्थान के धौलपुर में कृष्ण जन्माष्टमी की विशेष तैयारी की गई है. मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण ने मचकुंड महाराज की यज्ञ में शामिल होकर कालयवन का वध धौलपुर में ही किया था.
धौलपुर के मचकुंड स्थित श्री लाडली जगमोहन जू सरकार में ठाकुर जी और राधा जी की विशेष पोशाक को वृंदावन में मुस्लिम कारीगरों ने तैयार किया है. इस बार डिजाइनर पोशाक में विशेषता है कि राधारानी और ठाकुर जी मेहरून पूरी पोशाक में गायों और बछड़े को दूध पीता दिखाया गया है, जो पोशाक की सुंदरता को और चार चांद लगा रही है. दरअसल भगवान श्री कृष्ण के 5258 वे अवतार महोत्सव को लेकर मंदिर महंत कृष्ण दास ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं.
तय किया गया कार्यक्रमों का समय
जन्माष्टमी पर 19 अगस्त को भव्य मगला दर्शन, फूल बंगला झांकी, शाम 6 बजे से भजन संध्या, रात 8 बजे महाद्वीप दान महोत्सव, रात 10 बजे श्री कृष्ण जन्म महाभिषेक होगा, रात 12 बजे प्राकट्य महोत्सव एवं सरकार की महाआरती होगी. इस अवसर पर शाम 6 से ही बाल राधा कृष्ण स्वरूप प्रतियोगिताओं का आयोजन भी होगा. बता दें कि कान्हा के जन्म का उत्सव पास आने के साथ पूरा ब्रिज उल्लास में डूब रहा है. इस उल्लास के अवसर को कोई नहीं छोड़ना चाहता है। वृंदावन में कान्हा का श्रृंगार करने में हिंदू ही नहीं मुस्लिम वर्ग की संख्या भी बड़ी संख्या में होती है.वृंदावन और मथुरा के मुस्लिम कारीगर बताते है कि पुश्तैनी काम को ठाकुर जी ने चमका दिया है. इस व्यवसाय से जुड़े लोग मुस्लिम समाज के पुरुष महिलाएं दिन रात एक कर मुकुट, पोशाक, श्रृंगार को बनाने में लगे हुए हैं. हर साल भरतपुर, धौलपुर, करौली समेत जयपुर में ठाकुर जी की पोशाक मथुरा वृंदावन के मुस्लिम कारीगरों द्वारा ही तैयार की जाती है.
वृंदावन के पोशाक कारीगर अशफाक बताते हैं कि पिछले वर्षो की अपेक्षा पोशाक श्रृंगार की मांग विदेशों में बढ़ी है. इस बार जरी, सनील, मोती के अलावा सोने चांदी से निर्मित पोशाकों की अधिक मांग है. ऐसी ही पोशाकों की मांग कनाडा, अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया के भारतीय मूल के लोगों के अलावा विदेशी भी अधिक पसंद करते हैं.
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