राजस्थान
Pratapgarh: पर्यावरण संरक्षण बना जनांदोलन, जिले में 5 लाख से अधिक पौधरोपण
Tara Tandi
23 July 2025 6:36 PM IST

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Pratapgarh प्रतापगढ़। राजस्थान सरकार द्वारा आरंभ किया गया 'हरियालो राजस्थान अभियान' राज्य में पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने की एक अनुकरणीय पहल बन चुका है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में यह अभियान केवल एक वृक्षारोपण कार्यक्रम नहीं रहा बल्कि यह जनमानस के भावनात्मक जुड़ाव और सामूहिक कर्तव्य का पर्याय बनकर उभरा है। 'एक पेड़ मां के नाम' जैसी पहलों से प्रेरित होकर यह अभियान राज्य को हरित भविष्य की ओर अग्रसर कर रहा है।
मुख्यमंत्री श्री शर्मा के स्पष्ट निर्देशों के अनुरूप प्रदेश के सभी जिलों में यह कार्य मिशन मोड में संचालित किया जा रहा है। अभियान की पारदर्शिता और प्रभावशीलता को सुनिश्चित करने हेतु 'हरियालो राजस्थान' मोबाइल एप विकसित किया गया है, जिससे प्रत्येक पौधरोपण की निगरानी डिजिटल रूप से संभव हो पाई है। राज्य सरकार का लक्ष्य इस वर्ष 10 करोड़ पौधे लगाने का है।
प्रतापगढ़ जिले में अभियान की प्रगति उल्लेखनीय रही है। जिला प्रशासन ने विभिन्न विभागों के सहयोग से इसे सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग द्वारा 2,500 पौधे, सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा 12,100 पौधे, पंचायत राज विभाग (मनरेगा) द्वारा 2,75,644 पौधों का रोपण और शिक्षा विभाग द्वारा 2,03,781 पौधे लगाए जा चुके हैं। समग्र रूप से जिले में अब तक कुल 5,37,475 पौधों का वृक्षारोपण किया गया है।
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की दूरदृष्टि के चलते 'हरियालो राजस्थान' अभियान आने वाले समय में न केवल राजस्थान को हरित राज्य के रूप में स्थापित करेगा, बल्कि मानव–प्रकृति प्रेम की पुरातन भारतीय संस्कृति को पुनर्जीवित करेगा।
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कार्यालयों में आधार नामांकन केन्द्र स्थापित किया जाना प्रस्तावित
प्रतापगढ़, 23 जुलाई। जिले की पंचायत समितियों/नगरीय क्षेत्रों के कार्यालयों में आधार नामांकन केन्द्र स्थापित किया जाना प्रस्तावित है।
सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग प्रतापगढ़ के एनालिस्ट-कम-प्रोग्रामर (उपनिदेशक) ने बताया कि इन केन्द्र पर आधार नामांकन एवं अद्यतन का कार्य करने हेतु रजिस्ट्रार (सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग) के अधीन नामांकन ऐजेंसी (राजकॉम्प इन्फो सर्विसेज लिमिटेड) द्वारा एक ऑपरेटर को यूआईडीएआई नई दिल्ली से आधार (पंजीकरण एवं अपडेट) विनियम 2016 अनुसार कार्य हेतु आईडी/क्रिडेंशियल जारी कराया जाना भी प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि जो भी पात्र व्यक्ति नामांकन ऑपरेटर के रूप में यूआईडीएआई नई दिल्ली एवं सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग, राजस्थान द्वारा निर्धारित निर्बन्धनों एवं शर्तों अनुसार कार्य करने का इच्छुक है वह 24.07.2025 से दिनांक 30.07.2025, समय 23ः59 तक एसएसओ आईडी के माध्यम से ऑनलाईन आवेदन कर सकता है। आवेदन केवल ऑनलाईन ही मान्य होंगे। राज्य सरकार के दिशा-निर्देशानुसार सभी नये ऑनबोर्ड होने वाले ऑपरेटर्स से 50,000/- रूपये की सिक्योरिटी राशि जमा करायी जायेगी, इसके अलावा लैपटॉप व आधार किट सहित तमाम व्यवस्थाऐं स्वयं करनी होगी। अन्तिम तिथि तक प्राप्त आवेदनों में से ऑपरेटर का चयन आधार जिला चयन कमेटी द्वारा किया जावेगा। पात्रता एवं अन्य शर्तें जिले की वेबसाईट https://pratapgarh.rajasthan.gov.in पद पर देखी जा सकती है।
इन कार्यालयों पर आधार नामांकन केन्द्र स्थापित होगा
उपनिदेशक ने बताया कि धरियावद पंचायत समिति के अन्तर्गत तहसील ऑफिस धरियावद, नगर पालिका धरियावद, बीएनआरजीएसके के मुंगाणा, देवला, झडोली, वजपुरा, नाड, भरकुंडी, सिंहाड, चरी, पारेल, गोठड़ा में आधार नामांकन केन्द्र स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। इसी तरह से अरनोद पंचायत समिति के बीएनआरजीएसके के कोटडी, हिंगलाट, लालगढ़, दलोट तहसील के बीएनआरजीएसके के भचुन्डला, कानगढ़, सालमगढ़, बड़ीसाखथली, छोटीसादड़ी पंचायत समिति के बीएनआरजीएसके के करजू, बसेड़ा, पीलीखेडा, मानपुरा जागीर, प्रतापगढ़ पंचायत समिति के जिला चिकित्सालय प्रतापगढ़, कार्यालय उपवन संरक्षक प्रतापगढ़, बीएनआरजीएसके के वरमंडल, बजरंगगढ़, धमोत्तर पंचायत समिति के बीएनआरजीएसके के थडा, जोलर, सुहागपुरा पंचायत समिति के बीएनआरजीएसके के सेमलिया, कचोटिया, रामपुरिया, सोडलपुर एवं पीपलखूंट पंचायत समिति के बीएनआरजीएसके के जेथलिया, डूंगलावानी, मोरवानिया व टामटिया में आधार नामांकन केन्द्र स्थापित किया जाना प्रस्तावित है।
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असाध्य रोग से ग्रसित गंभीर मरीजों को अब पैलिएटिव केयर वाहिनी से घर पर मिलेगा इलाज, मकसद- मरीज़ के अंतिम दिन दर्द में न गुजरें
मरीजों के घर पहुंचेंगे डॉक्टर, पहली बार पीड़ित मरीज़ों के लिए होम बेस्ड केयर होगी
प्रतापगढ़, 23 जुलाई। जिले के गंभीर रोगियों का अब फॉलोअप इलाज घर बैठे होगा। अब वे मरीज़ जो अस्पताल तक नहीं पहुंच सकते, उनके इलाज के लिए डॉक्टरों की टीम घर पहुंचेगी। स्वास्थ्य विभाग ने गंभीर रोगियों के लिए घर-आधारित देखभाल की सुविधा शुरू की है। इस सेवा के तहत पैलिएटिव केयर वाहन बुधवार कलेक्ट्रेट परिसर से रवाना किया गया। वाहन को जिला कलेक्टर डॉ. अंजली राजोरिया एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जीवराज मीणा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस पहल के तहत उन रोगियों को घर पर ही इलाज, देखभाल और परामर्श मिलेगा, जो कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक, एड्स, क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़, न्यूरोमस्कुलर व दीर्घकालिक श्वसन रोग जैसी असाध्य बीमारियों से पीड़ित हैं और अस्पताल तक आने में असमर्थ हैं।
जिला कलेक्टर डॉ. अंजली राजोरिया ने कहा कि यह सेवा ऐसे रोगियों के लिए जीवन रेखा साबित होगी, जो बड़े अस्पतालों से इलाज करवाकर लौट चुके हैं और अब उनके लिए निरंतर निगरानी एवं सहानुभूतिपूर्ण देखभाल आवश्यक है
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर जीवराज मीणा ने बताया कि प्रदेश के किसी भी बड़े अस्पताल से जिले के वे मरीज़ जो गंभीर बीमारी के इलाज के बाद लौटे हैं, उन सभी का स्वास्थ्य विभाग की ओर से रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। उन सभी मरीजों की देखभाल के लिए दो डॉक्टर तथा तीन नर्सिंग स्टाफ के साथ 15 दिन में एक बार पैलिएटिव केयर गाड़ी पहुंचेगी।
गाड़ी की शुरुआत के बाद मरीजों का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा जिसमें संबंधित को एक कॉल पर घर बैठे चिकित्सा सुविधा मिलेगी।
सीएमएचओ डॉ. मीणा ने बताया कि राष्ट्रीय पैलिएटिव केयर कार्यक्रम के तहत गाड़ी को शुरू किया गया है। पैलिएटिव केयर के माध्यम से जीवन को सीमित करने वाली और अंतिम चरण की बीमारियों - कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक, गुर्दे की बीमारी, एड्स, दीर्घकालिक श्वसन रोग से पीड़ित मरीज़ों की देखभाल की जाएगी। इसमें बिस्तर पर रहने वाले मरीज़, जिन्हें अस्पताल ले जाना संभव नहीं, उन मरीज़ों को अब घर पर ही इलाज मिलेगा। इसका उद्देश्य इलाज ही नहीं बल्कि लक्षणों को नियंत्रित कर मरीज़ और उसके परिजनों की जीवन गुणवत्ता में सुधार लाना है। इसमें स्टाफ को प्रशिक्षित किया गया हैं ताकि सूचना मिलते ही टीम मरीज़ों के घर जाकर उनके स्वास्थ्य की निगरानी के साथ देखभाल कर सके।
मरीज़ों को क्वालिटी ऑफ लाइफ मिलेगी, देखभाल के लिए परिजनों को ट्रेंड करेंगे: योजना के तहत जिन बीमारियों का इलाज संभव नहीं होता, उन मरीज़ों को पैलिएटिव केयर मिलेगी।
असाध्य रोग से ग्रस्त कैंसर, हार्ट डिजीज (हृदय रोग), न्यूरोमस्कुलर डिजीज, क्रॉनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) सहित बीमारी से ग्रसित मरीज़ों व परिजनों को समझाना, मानसिक शिक्षा देना, बीमारी से जूझने के लिए मरीज़ को तैयार किया जाएगा। मरीज़ के राइल्स ट्यूब, कैथेटर बदलना तथा अस्पताल में शिफ्ट करवाने का कार्य करेगी। टीम की ओर से परिजनों को भी प्रतिदिन मरीज़ की देखभाल के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। बेड रिडन (बिस्तर पकड़ने वाले) मरीज़ को क्वालिटी ऑफ लाइफ देने के लिए टीम पहुंचेगी। जिंदगी के जितने दिन शेष हैं, वे अच्छे बीतें। अंतिम दिन दर्द में न गुजरें।
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