राजस्थान

दिवाली से पहले बढ़ा प्रदूषण, मंडल अलर्ट

Rajeshwari Nishad
4 Nov 2026 2:31 PM IST
दिवाली से पहले बढ़ा प्रदूषण, मंडल अलर्ट
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बीकानेर। राजस्थान के बीकानेर में दीपावली से पहले वायु प्रदूषण ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। शहर की हवा लगातार प्रभावित हो रही है और एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) खराब श्रेणी में पहुंच गया है। जानकारी के अनुसार, बीकानेर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 235 तक दर्ज किया गया है। वहीं, भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के वायु गुणवत्ता निगरानी पोर्टल पर बुधवार, 4 नवंबर को बीकानेर के एमएम ग्राउंड निगरानी केंद्र का AQI करीब 239 दर्ज हुआ। यह स्तर खराब वायु गुणवत्ता की श्रेणी में आता है। दीपावली पर आतिशबाजी के कारण प्रदूषण और बढ़ने की आशंका को देखते हुए राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने निगरानी बढ़ाने की तैयारी की है।
दीपावली का त्योहार नजदीक आने के साथ ही शहर में पटाखों की बिक्री और खरीदारी की गतिविधियां बढ़ रही हैं। ऐसे में वायु प्रदूषण की स्थिति को लेकर चिंता जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, पटाखों से निकलने वाला धुआं हवा में सूक्ष्म कणों की मात्रा बढ़ा सकता है। यदि हवा की गति कम रहती है, तो प्रदूषक लंबे समय तक वातावरण में बने रह सकते हैं।
बीकानेर में सामान्य दिनों में भी सड़क की धूल, वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्य और कुछ औद्योगिक गतिविधियां वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं। दीपावली के दौरान आतिशबाजी से होने वाला अतिरिक्त उत्सर्जन मौजूदा प्रदूषण को और बढ़ा सकता है। हालांकि, किसी निश्चित दिन प्रदूषण बढ़ने में अलग-अलग स्रोतों का कितना योगदान है, यह विस्तृत आंकड़ों से ही स्पष्ट हो सकता है।
वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI के माध्यम से हवा में मौजूद विभिन्न प्रदूषकों के आधार पर वायु गुणवत्ता की स्थिति बताई जाती है। भारत के राष्ट्रीय AQI मानकों के अनुसार, 0 से 50 तक का स्तर अच्छा, 51 से 100 तक संतोषजनक, 101 से 200 तक मध्यम, 201 से 300 तक खराब, 301 से 400 तक बहुत खराब और 401 से 500 तक गंभीर श्रेणी में माना जाता है।
इस आधार पर बीकानेर में 235 के आसपास AQI दर्ज होना चिंता का विषय है। खराब श्रेणी की हवा में लंबे समय तक रहने से विशेष रूप से संवेदनशील लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से सांस संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।
प्रदूषण बढ़ने पर हवा में मौजूद पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे सूक्ष्म कणों की मात्रा महत्वपूर्ण हो जाती है। पीएम 2.5 अत्यंत बारीक कण होते हैं, जो सांस के माध्यम से फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं। वहीं, पीएम 10 में अपेक्षाकृत बड़े धूल और अन्य प्रदूषक कण शामिल होते हैं। इनकी अधिक मात्रा से सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और खांसी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
दीपावली के मद्देनजर प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी एजेंसियां वायु गुणवत्ता की निगरानी पर विशेष ध्यान दे रही हैं। राज्य में आतिशबाजी के दौरान वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और उससे उत्पन्न कचरे को नियंत्रित करने के लिए पर्यावरणीय नियमों के पालन पर जोर दिया जा रहा है। बीकानेर में भी निगरानी के लिए विशेष टीमों की व्यवस्था किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, इन टीमों की संख्या और क्षेत्रवार तैनाती का आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं हुआ है।
प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सामने सबसे बड़ी चुनौती दीपावली की रात और उसके अगले दिन वायु गुणवत्ता में होने वाले संभावित बदलाव पर नजर रखने की होगी। आतिशबाजी के बाद हवा में प्रदूषक कणों की सांद्रता बढ़ सकती है। इसके साथ ही मौसम की परिस्थितियां भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं।
यदि हवा तेज चलती है, तो कुछ प्रदूषक फैल सकते हैं, लेकिन हवा की गति कम होने और वातावरण में ठहराव की स्थिति बनने पर प्रदूषण का असर अधिक समय तक बना रह सकता है। इसलिए दीपावली के दौरान लगातार वायु गुणवत्ता की निगरानी जरूरी मानी जा रही है।
शहरवासियों के लिए भी सावधानी बरतना महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि खराब वायु गुणवत्ता वाले दिनों में अनावश्यक बाहरी गतिविधियों को सीमित रखना चाहिए। विशेष रूप से सांस और हृदय रोगों से पीड़ित लोगों को अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार चिकित्सकीय सलाह का पालन करना चाहिए।
बच्चों और बुजुर्गों को अत्यधिक धुएं वाले स्थानों से दूर रखना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी, लगातार खांसी, सीने में दर्द या असामान्य बेचैनी महसूस होती है, तो चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
दीपावली पर पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी महत्वपूर्ण है। कम धुएं वाले उत्सव को प्राथमिकता देना, अनावश्यक आतिशबाजी से बचना और कचरे का उचित निपटान करना प्रदूषण कम करने में सहायक हो सकता है।
बीकानेर जैसे शहरों में सड़क की धूल भी वायु गुणवत्ता से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। निर्माण सामग्री का खुले में भंडारण, सड़कों पर उड़ती धूल और कचरा जलाने जैसी गतिविधियों पर नियंत्रण से प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है। इसके लिए प्रशासन के साथ नागरिकों की सहभागिता भी आवश्यक है।
वायु प्रदूषण का असर केवल त्योहार के दिनों तक सीमित नहीं रहता। लगातार खराब वायु गुणवत्ता लोगों के स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकती है। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को नियमित रूप से जारी रखना आवश्यक है।
फिलहाल बीकानेर में AQI खराब श्रेणी में पहुंचने से प्रशासन और नागरिकों के सामने सतर्कता बरतने की चुनौती है। आने वाले दिनों में आतिशबाजी और मौसम की परिस्थितियों के अनुसार वायु गुणवत्ता में बदलाव हो सकता है। इसलिए लोगों को नियमित AQI अपडेट देखने और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां अपनाने की सलाह दी जा रही है।
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