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राजस्थान में महिला विधायकों का बड़ा सम्मेलन, राष्ट्रपति मुर्मू को किया आमंत्रित

Rajeshwari Nishad
26 Oct 2026 1:05 PM IST
राजस्थान में महिला विधायकों का बड़ा सम्मेलन, राष्ट्रपति मुर्मू को किया आमंत्रित
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जयपुर। राजस्थान विधानसभा के 75वें वर्ष के अमृत महोत्सव के अवसर पर दिसंबर 2026 में देश का पहला महिला विधायक सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। यह आयोजन महिला जनप्रतिनिधियों की भूमिका, लोकतंत्र में उनकी भागीदारी और राजनीतिक नेतृत्व को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर उन्हें इस ऐतिहासिक सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। इस सम्मेलन के माध्यम से देशभर की महिला विधायकों को एक मंच पर लाने और विधायी कार्यों में महिलाओं की भूमिका को लेकर विचार-विमर्श करने का अवसर मिलने की उम्मीद है।
दिसंबर में आयोजित होगा ऐतिहासिक सम्मेलन
राजस्थान विधानसभा अपने 75वें वर्ष के उपलक्ष्य में अमृत महोत्सव मना रही है। इसी क्रम में दिसंबर 2026 में महिला विधायक सम्मेलन आयोजित करने की योजना तैयार की गई है।इस आयोजन को देश में महिला जनप्रतिनिधियों के लिए एक विशेष मंच के रूप में देखा जा रहा है। सम्मेलन का उद्देश्य महिला विधायकों के अनुभवों, उपलब्धियों और चुनौतियों को सामने लाना हो सकता है।देश की विभिन्न विधानसभाओं में महिला जनप्रतिनिधि शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय, महिला सुरक्षा और विकास से जुड़े मुद्दों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं। ऐसे में यह सम्मेलन उनके अनुभवों के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान कर सकता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को दिया गया निमंत्रण
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर उन्हें सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का निमंत्रण दिया है।राष्ट्रपति मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन होने वाली दूसरी महिला हैं। उनका राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन महिलाओं के नेतृत्व तथा लोकतांत्रिक भागीदारी की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।यदि राष्ट्रपति इस सम्मेलन में शामिल होती हैं, तो आयोजन का महत्व और बढ़ जाएगा। हालांकि, राष्ट्रपति की ओर से कार्यक्रम में शामिल होने की अंतिम स्वीकृति और विस्तृत कार्यक्रम की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
विधानसभा के 75 वर्षों की यात्रा का उत्सव
राजस्थान विधानसभा का इतिहास राज्य के लोकतांत्रिक विकास से जुड़ा हुआ है। स्वतंत्रता के बाद राजस्थान में लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थापना और उनके विस्तार में विधानसभा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।राजस्थान की पहली विधानसभा का गठन वर्ष 1952 में हुआ था। इसके बाद से विधानसभा राज्य की नीतियों, कानूनों और जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा का प्रमुख मंच रही है।अमृत महोत्सव के तहत प्रस्तावित महिला विधायक सम्मेलन विधानसभा की लोकतांत्रिक यात्रा में महिलाओं के योगदान को रेखांकित करने का अवसर बन सकता है।
महिला जनप्रतिनिधियों को मिलेगा साझा मंच
भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। स्थानीय निकायों से लेकर विधानसभाओं और संसद तक महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया जाता रहा है।प्रस्तावित सम्मेलन में महिला विधायकों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने और अपने क्षेत्रों में किए गए कार्यों की जानकारी साझा करने का अवसर मिल सकता है।महिला जनप्रतिनिधियों के सामने आने वाली चुनौतियों में राजनीतिक अवसरों की कमी, सामाजिक बाधाएं और नेतृत्व के स्तर पर सीमित प्रतिनिधित्व जैसे विषय शामिल हैं।इन मुद्दों पर संवाद लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में उपयोगी साबित हो सकता है।
महिला आरक्षण कानून पर भी हो सकती है चर्चा
देश में महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के उद्देश्य से वर्ष 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया गया था। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का संवैधानिक प्रावधान किया गया है।
हालांकि, इसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया संवैधानिक शर्तों और परिसीमन से जुड़ी हुई है।महिला विधायक सम्मेलन जैसे आयोजन में राजनीतिक प्रतिनिधित्व, नेतृत्व क्षमता और महिलाओं की निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदारी जैसे विषय प्रासंगिक हो सकते हैं।हालांकि, सम्मेलन के आधिकारिक एजेंडे में महिला आरक्षण कानून पर चर्चा शामिल होगी या नहीं, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है।
महिलाओं के नेतृत्व को मिलेगी नई पहचान
भारतीय लोकतंत्र में महिला नेताओं ने विभिन्न स्तरों पर महत्वपूर्ण योगदान दिया है। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष और राज्यपाल जैसे महत्वपूर्ण पदों पर महिलाएं अपनी नेतृत्व क्षमता साबित कर चुकी हैं।इसके बावजूद विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कई राज्यों में सीमित बना हुआ है।ऐसे में महिला विधायकों का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मेलन आयोजित करना राजनीतिक नेतृत्व में महिलाओं की भूमिका को प्रमुखता देने की पहल माना जा सकता है।यह आयोजन नई पीढ़ी की महिलाओं को सार्वजनिक जीवन और राजनीति में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी कर सकता है।
लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत बनाने की पहल
विधानसभा केवल कानून बनाने का मंच नहीं है, बल्कि यह जनसमस्याओं को सरकार तक पहुंचाने और नीतिगत फैसलों पर चर्चा करने की महत्वपूर्ण संस्था भी है।महिला विधायकों की सक्रिय भागीदारी से महिलाओं, बच्चों, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण से जुड़े मुद्दों को अधिक प्रभावी तरीके से उठाने में मदद मिल सकती है।सम्मेलन में विभिन्न राज्यों की महिला जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद स्थापित होने से विधायी प्रक्रियाओं और जनहितकारी योजनाओं से जुड़े अनुभव साझा किए जा सकेंगे।इस प्रकार के आयोजनों से विभिन्न विधानसभाओं के बीच सहयोग और लोकतांत्रिक संवाद को भी बढ़ावा मिल सकता है।
तैयारियों और कार्यक्रम पर रहेगी नजर
दिसंबर में प्रस्तावित सम्मेलन को लेकर राजस्थान विधानसभा की ओर से आगे की तैयारियां महत्वपूर्ण होंगी।कार्यक्रम की सटीक तारीख, भाग लेने वाली महिला विधायकों की संख्या, विभिन्न सत्रों के विषय और अन्य अतिथियों की जानकारी विस्तृत कार्यक्रम जारी होने के बाद स्पष्ट होगी।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की संभावित उपस्थिति को देखते हुए कार्यक्रम के आयोजन और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा सकता है।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
राजस्थान विधानसभा के अमृत महोत्सव के अवसर पर प्रस्तावित महिला विधायक सम्मेलन को महिला नेतृत्व और लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ावा देने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है।विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करना इस आयोजन के महत्व को दर्शाता है।
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