राजस्थान

Kota: बाल कल्याण की प्राथमिकता, कलक्टर ने संस्थानों के निरीक्षण में दिए निर्देश

Tara Tandi
23 July 2025 6:46 PM IST
Kota: बाल कल्याण की प्राथमिकता, कलक्टर ने संस्थानों के निरीक्षण में दिए निर्देश
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Kota कोटा । जिला कलक्टर पीयूष समारिया ने बुधवार को कोटा शहर स्थित बाल संरक्षण संस्थानों कृ बाल कल्याण समिति कार्यालय, राजकीय बालिका गृह नान्ता, नारी निकेतन तथा राजकीय शिशु गृह कृ का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने बच्चों और महिलाओं के रहन-सहन, शिक्षा, पुनर्वास, स्वास्थ्य, पोषण एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
जिला कलक्टर समारिया ने बाल कल्याण समिति कार्यालय का दौरा किया, जहां उन्हें बच्चों की श्रेणियों, उनके आगमन के माध्यम, पुनर्वास की स्थिति, पोक्सो मामलों की संख्या, बाल श्रमिकों, ग्रामीण क्षेत्रों और अन्य राज्यों से लाए गए बच्चों के विषय में जानकारी दी गई। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सभी बच्चों के मामलों का समयबद्ध, पारदर्शी और मानवीय दृष्टिकोण से समाधान सुनिश्चित किया जाए ताकि बच्चों को सुरक्षित और स्थायी पुनर्वास उपलब्ध हो सके।
इसके पश्चात उन्होंने राजकीय बालिका गृह नान्ता का निरीक्षण किया, जहां उन्होंने बालिकाओं से संवाद किया और उनकी शिक्षा, भोजन की गुणवत्ता, वोकेशनल ट्रेनिंग और अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने बालिकाओं को प्रोत्साहित करते हुए उनसे संस्थान की व्यवस्थाओं में सुधार हेतु सुझाव भी आमंत्रित किए। जिला कलक्टर समारिया ने अधिकारियों से कहा कि बालिकाओं के लिए शिक्षा के साथ-साथ गैर-शैक्षणिक गतिविधियों जैसे कला, खेल, संगीत आदि को भी संस्थागत रूप से जोड़ा जाए ताकि उनके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास हो सके। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि संस्थान में प्रेरणादायक वातावरण विकसित किया जाए, जिससे बालिकाएं आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।
नारी निकेतन में जिला कलक्टर समारिया ने महिलाओं द्वारा निर्मित राखियों, सजावटी वस्तुओं एवं अन्य हस्तशिल्प उत्पादों की प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने महिलाओं के कार्यों की सराहना की और कहा कि इस प्रकार के प्रयास उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त बनाते हैं। अधीक्षिका श्रीमती अंशुल मेहन्दीरत्ता ने बताया कि नारी निकेतन में महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई, योग, हस्तकला आदि जैसे कौशलों का प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे संस्थान से बाहर जाने के बाद आत्मनिर्भर होकर गरिमापूर्ण जीवन यापन कर सकें। उन्होंने यह भी बताया कि नारी निकेतन की एक महिला योग कौशल में राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में रैंक प्राप्त कर चुकी है।
निरीक्षण के अंत में जिला कलक्टर समारिया ने राजकीय शिशु गृह का अवलोकन किया, जहां उन्होंने छोटे बच्चों की देखरेख, पोषण, रहन-सहन और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं की स्थिति जानी। उन्होंने निर्देश दिए कि बच्चों को संतुलित आहार प्रदान किया जाए और उनका नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जाए। उन्होंने कहा कि संस्थान की स्वच्छता, वातावरण और भावनात्मक सुरक्षा बच्चों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, अतः इनका विशेष ध्यान रखा जाए।
निरीक्षण के दौरान जिला कलक्टर समारिया ने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि सभी संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ हो तथा वहां रहने वाले बच्चों और महिलाओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रत्येक संस्थान में शिकायत पेटी की व्यवस्था सक्रिय रूप से होनी चाहिए। कलक्टर समारिया ने निर्देश दिए कि शिकायत पेटी को नियमित रूप से खोला जाए, उसमें डाले गए सुझावों और शिकायतों का रिकॉर्ड रखा जाए तथा प्राप्त बिंदुओं का समाधान समयबद्ध रूप से किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि सभी को चिकित्सा सुविधाएं नियमित रूप से प्राप्त हों और समय-समय पर विशेषज्ञ चिकित्सकों के माध्यम से स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन हो। साथ ही, सभी संस्थानों में कौशल प्रशिक्षण को व्यवस्थित ढंग से संचालित किया जाए ताकि यहां निवासरत बालिकाएं और महिलाएं भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि सभी निवासियों की मानसिक और भावनात्मक स्थिति को ध्यान में रखते हुए नियमित रूप से काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाएं।
निरीक्षण के दौरान सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई कोटा रामराज मीणा, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह राठौड़, सदस्य ऋषभ जैन, हरप्रीत कौर, अंजुमन बानो, अधीक्षक बाबूलाल शर्मा, नारी निकेतन की अधीक्षिका अंशुल मेहन्दीरत्ता तथा प्रोटेक्शन अधिकारी दिनेश शर्मा उपस्थित
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