राजस्थान

Kota: मानवीय मूल्यों के साथ प्रौद्योगिकी विकास के लिए आगे बढें युवा- राज्यपाल

Tara Tandi
25 March 2025 6:00 PM IST
Kota: मानवीय मूल्यों के साथ प्रौद्योगिकी विकास के लिए आगे बढें युवा- राज्यपाल
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Kota कोटा । माननीय राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे की अध्यक्षता में राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय का चतुर्दश दीक्षांत समारोह मंगलवार को कोटा विकास प्राधिकरण के ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। इस अवसर पर 9521 डिग्रियों, 1 कुलाधिपति एवं 1 कुलपति स्वर्ण पदक एवं सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले कुल 20 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और 36 पीएचडी डिग्री प्रदान की गई। राज्यपाल एवं कुलाधिपति ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और बौद्धिक क्षमताओं का विस्तार करते हुए भारत को विश्वगुरू के पद पर पुनःआसीन करने का आह्वान किया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री बागडे ने कहा कि वर्ष 2047 में भारत की आजादी को एक शताब्दी पूर्ण हो रही है। इस समय तक भारत सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धियां अर्जित करे, ऐसे हमारे प्रयास होने चाहिए। सबका साथ, सबका विकास ही हमारा ध्येय बने। प्राचीन भारत की मेधा, जीवन मूल्यों और पुरा वैभव की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि में देश का चित्र बदलने का महती दायित्व उनके कंधों पर है। आज का युग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, इंटरनेट आफ थिंग्स और रोबोटिक्स जैसी तकनीकों का है। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने ज्ञान का उपयोग केवल रोजगार प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि नवाचार और उद्यमिता के लिए भी करें। मानवीय मूल्यों के साथ प्रौद्योगिकी विकास के लिए आगे बढें।
माननीय राज्यपाल एवं कुलाधिपति ने कहा कि भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी में बहुत अग्रणी रहा है। पर यह विडम्बना रही है कि यूरोपीय देशों ने हमारी विज्ञान और प्रौद्योगिकी की विरासत को अपना बनाकर पेश किया। भारत की ज्ञान परम्परा के बारे में जानना बहुत जरूरी है। नई शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर आधारित है। इसमें बौद्धिक क्षमताओं के संवर्द्धन पर अधिक जोर है जिसके परिणाम लगभग 15 साल बाद परिलक्षित होंगे। यह समय ज्ञान संचार का है। केवल पाठ्यपुस्तकों को पढ़कर जीवन में सफल नहीं हो सकता।
दीक्षान्त अतिथि के रूप में गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमा शंकर दुबे ने कहा कि युवाओं में देश को बदलने का सामर्थ्य है। इसके लिए वे व्यापक अन्तर्दष्टि, प्रतिबद्धता, साहस, परिश्रम और समर्पण के साथ आगे बढें। उन्होंने विद्यार्थियों को महापुरूषों से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए सफलता के मंत्र भी बताए।
राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस. के. सिंह ने स्वागत भाषण में कहा कि राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय प्रदेश में तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार एवं अनुसंधान को बढ़ावा देकर अकादमिक उत्कृष्टता स्थापित कर रहा है। विश्वविद्यालय न केवल तकनीकी शिक्षा को सशक्त बना रहा है, बल्कि प्रदेश और देश में उच्च शिक्षा के वैश्विक मानकों को भी बढ़ावा देने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
प्रो. सिंह ने प्रगति प्रतिवेदन एवं विशेष कार्यों का विवरण भी प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष कुल 7487 छात्र और 2034 छात्राओं को उपाधि प्रदान की गईं। इनमें पीएचडी के 36, एमटेक के 212, एमआर्क के 1, एमबीए के 745, एमसीए के 595, बीटेक के 7817, बीआर्क के 113 और बीएचएमसीटी के 2 विद्यार्थी सम्मिलित हैं।
कुलाधिपति एवं कुलपति स्वर्ण पदक
14वें दीक्षांत समारोह में समारोह में कुलाधिपति स्वर्ण पदक कौटिल्य इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग, जयपुर के एमटेक (ट्रांसपोर्टेशन इंजीनियरिंग) पाठ्यक्रम के छात्र आदित्य शर्मा को प्रदान किया गया, जबकि कुलपति स्वर्ण पदक आर्या इंस्टिट्यूट ऑफ इंजिनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, जयपुर की बीटेक पाठ्यक्रम की छात्रा रश्मि कुमारी को दिया गया।
36 को पीएचडी, 20 को स्वर्ण पदक
विभिन्न पाठ्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 20 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए, जिनमें एमटेक के 4, एमबीए के 1, एमसीए के 1, बीटेक के 13 और बीआर्क के 1 विद्यार्थी शामिल हैं। इन 20 विद्यार्थियों में 11 छात्र एवं 9 छात्राएँ हैं।
विभिन्न पाठयक्रमों में अभियांत्रिकी संकाय के 28, प्रबंधन संकाय में 03 एवं कम्प्युटर एप्लीकेशन संकाय के 05 सहित कुल 36 विद्यार्थियों को पीएचडी की डिग्रियां प्रदान की गईं।
आरंभ में परम्परानुसार राज्यपाल एवं कुलाधिपति का शोभायात्रा के साथ आगमन एवं समापन पर प्रस्थान हुआ।
समारोह में कुलसचिव भावना शर्मा, विश्वविद्यालय के प्रबन्ध मण्डल एवं विद्या परिषद के सदस्यगण, अन्य विश्वविद्यालयों के कुलपति, राजभवन के अधिकारी, विश्वविद्यालय के समस्त अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, कुलसचिव, विभिन्न संबद्ध महाविद्यालयों के चेयरमैन, निदेशक, प्राचार्य, विश्वविद्यालय के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी, संकाय सदस्य, शिक्षक, विभिन्न शिक्षाविद, विद्यार्थी व उनके अभिभावक, प्रशासनिक अधिकारी, गणमान्य नागरिक एवं आमंत्रित विशिष्ट अतिथिगण उपस्थित रहे।
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