
जोधपुर: केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार के परिणाम पहले से तय हैं। चुनाव की घोषणा से पहले ही यह स्पष्ट था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए गठबंधन प्रचंड बहुमत से विजय प्राप्त करेगा। बिहार की जनता इस बार भी विकास, स्थिरता और सुशासन के पक्ष में मतदान करेगी और एनडीए एक बार फिर पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगा।
रविवार को अपने निवास पर पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में शेखावत ने कहा कि देश की राजनीति का विश्लेषण करने वाले सभी जानकार इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि बिहार की जनता अभी भी माफिया राज, गुंडा राज और जंगल राज के दौर को भूली नहीं है। लोगों के दिलों में उस अराजक काल का दंश अब भी ताजा है। इसके विपरीत, पिछले वर्षों में बिहार की जनता ने सुशासन और विकास के दौर को अनुभव किया है। राज्य में शिक्षा, सडक़, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था में सुधार दिखा है। शेखावत ने कहा कि बिहार की जनता पूरी तरह से सुशासन और विकास के साथ है। एनडीए के साथ है, मोदीजी के साथ है, नीतीश कुमार के साथ है, उपेंद्र कुशवाहा और जीतनराम मांझी के साथ है। केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि महागठबंधन की स्थिति अत्यंत अव्यवस्थित है। जिस पार्टी के घटक दल भी उसे गंभीरता से नहीं लेते, जहां सीट बंटवारे और टिकट वितरण को लेकर सिरफुटव्वल मची हो, जहां एक ही गठबंधन के प्रत्याशी एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हों, ऐसी पार्टी अगर किसी को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित भी करे तो उसका कोई राजनीतिक वजूद नहीं होता। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस और राजद के नेता भ्रम फैला रहे हैं, जबकि जनता सब जानती है। जब उनके पर्यवेक्षक पटना पहुंचते हैं तो ‘टिकट चोर वापस जाओ’ के नारे लगते हैं। ऐसे दल की घोषणाओं का न कोई महत्व है, न वजन।
तेजस्वी यादव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, जिसमें उन्होंने नीतीश कुमार को बुजुर्ग बताते हुए कहा था कि बीजेपी ने उन्हें हाईजैक कर लिया है, पर शेखावत ने कहा कि यह हास्यास्पद है। नीतीश का अनुभव और एनडीए की एकजुटता ने बिहार को सुशासन और विकास का नया अध्याय दिया है। बिहार की जनता इसे भली-भांति जानती और समझती है।
अशोक गहलोत पर तीखा कटाक्ष
कांग्रेस नेता अशोक गहलोत के राजनीतिक जादू पर कटाक्ष करते हुए शेखावत ने कहा कि राजस्थान के जादूगर पहले गुजरात गए थे, वहां उनका जादू नहीं चला। अब बिहार जा रहे हैं, वहां भी नतीजे वही होंगे। गहलोत तीन बार मुख्यमंत्री बने, लेकिन हर बार किसी और के चेहरे या रणनीति का इस्तेमाल करके। उन्हें बस इतना जादू आता है कि चुनाव के बाद जो चेहरा सामने होता है, उसे हटाकर खुद मुख्यमंत्री बन जाते हैं। बिहार में ऐसी कोई संभावना नहीं है।
मगरमच्छी रुदन कर भ्रम फ़ैलाने का विफल प्रयास कर रही कांग्रेस
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने निकाय चुनाव पर कांग्रेस द्वारा जानबूझकर भ्रम फ़ैलाने पर कहा कि कांग्रेस मगरमच्छी रुदन कर जनता में भ्रम फैलाने का असफल प्रयास कर रही है, जो न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि विपक्ष की व्यावसायिक नैतिकता पर भी एक प्रश्न है। शेखावत ने कहा कि पूर्व में राज्यभर में सभी निकायों के चुनाव चाहे वह पंचायत निकाय हो या वह शहरी निकाय हो, अलग-अलग तिथियों को होते थे, कभी किसी पालिका के चुनाव तो कभी किसी पालिका के चुनाव और इधर कभी किसी पंचायत के चुनाव तो कभी किसी पंचायत के चुनाव होते थे। निकाय चुनावों को लेकर कभी एकरूपता का भाव राज्य में पैदा ही नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि कह सकते हैं कि राज्य में निकायों के चुनाव आज तक किस्तों में हुए थे, किन्तु इस बार की भजनलाल सरकार ने दृढ राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाते हुए इन सब निकायों के चुनावों को एक साथ करने का निर्णय लिया। इस दिशा में कदम उठाए और अंतत: अब निकाय चुनाव एक साथ होने का मार्ग लगभग प्रशस्त हो गया, जो काफी कठिन और चुनौती पूर्ण कार्य था।
शेखावत ने कहा कि कांग्रेस यह जानते हुए भी कि सभी निकायों के चुनाव एक साथ करवाने के लिए जहां जिस निकाय का कार्यकाल पूरा हो है, उसे अन्य निकायों के कार्यकाल के पूरे होने तक रुकना ही होगा, फिर भी कांग्रेसी नेता जनता को मीडिया में अनर्गल तर्क देते हुए उकसाने करने की कोशिश कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जनता को संयम रख एक तिथि में चुनाव करवाने के आशय को स्पष्ट करने की जगह कांग्रेस अपने रटे-रटाए संविधान खतरे में है, के तर्क को ही दोहराती रही, ताकि राज्य की जनता अधीर हो जाए। भजनलाल सरकार की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाए, किन्तु जनता कांग्रेस के बहकावे में कतई नहीं आई और संयम के साथ एक राज्य-एक चुनाव की राज्य सरकार की इच्छाशक्ति को समझा है।
शेखावत ने कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के संविधान खतरे में है, जैसे वक्तव्यों पर निशाना साधते हुए कहा कि स्वयं पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने अपने पिछले कार्यकाल में जोधपुर, जयपुर और कोटा नगर निगम के चुनाव अपने राजनीतिक स्वार्थों के चलते प्रशासक लगाकर एक वर्ष देर से करवाए थे। हो सकता है कि पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत इन चुनावों की देरी की वजह कोरोना को बताए, किन्तु निगम के चुनाव नवम्बर 2019 में होने थे, जिसे गहलोत ने प्रशासक लगा पहले से ही लम्बित कर दिए थे, जबकि कोरोना का आगमन मार्च 2020 में हुआ था।
पूर्व मुख्यमंत्री को तब संविधान खतरे में नहीं दिखा
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अपनी तरफ से की गई इस एक सालाना देरी में तो गहलोत को संविधान खतरे में नजर नहीं आया, किन्तु राज्य की वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा पुनीत लक्ष्य और राज्य हित में एक साथ चुनाव करवाने के प्रयास में इन्हें संविधान खतरे में दिख रहा है। शेखावत ने चुटकी लेते हुए कहा है कि गहलोत और कांग्रेस को इन चुनावों में अपना अस्तित्व खतरे में दिख रहा है। इसलिए वो अनर्गल रुदन कर अपने बचाव की भूमिका बांध रहे हैं।





