राजस्थान

Jodhpur: बारिश नहीं हुई फिर भी काजरी की मोठ किस्मों ने दिखाया बेहतर परिणाम

Admindelhi1
3 Sept 2026 10:55 AM IST
Jodhpur: बारिश नहीं हुई फिर भी काजरी की मोठ किस्मों ने दिखाया बेहतर परिणाम
x
काजरी की मोठ किस्मों ने विपरीत मौसम में भी दिखाई क्षमता

जोधपुर: पश्चिमी राजस्थान में गंभीर नमी तनाव के बावजूद भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केन्द्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) जोधपुर द्वारा विकसित मोठ की चार किस्में काजरी मोठ-4, मोठ-5, मोठ-6 और मोठ-7 उल्लेखनीय तनाव-अनुकूलन क्षमता प्रदर्शित कर रही हैं। काजरी अनुसंधान फार्म पर लगभग 50 दिन की फसल पिछले करीब 30 दिनों से वर्षा नहीं होने के बावजूद हरी-भरी, स्वस्थ और भरपूर फलियों से युक्त है। फसल की बुवाई 10 जुलाई को की गई थी तथा अंतिम बारिश 2 अगस्त को हुई थी। इसके बाद भी फसल में अच्छी वृद्धि एवं फलियों का विकास देखा जा रहा है।

दरअसल इन किस्मों में विकासीय प्लास्टिसिटी की विशेषता है। ये लगभग 30 दिन में फूल आना शुरू करती हैं तथा मिट्टी में उपलब्ध नमी के अनुसार अपनी वृद्धि अवधि और परिपक्वता को समायोजित कर सकती हैं। इन चारों किस्मों का बीज उत्पादन 7 हेक्टेयर क्षेत्र में किया जा रहा है। इन किस्मों का विकास काजरी में एक दशक से अधिक समय से चल रहे मोठ आनुवंशिक सुधार कार्यक्रम का परिणाम है, जिसका उद्देश्य शुष्क क्षेत्रों की कठोर एवं अनिश्चित परिस्थितियों के लिए अनुकूल किस्में विकसित करना है। काजरी निदेशक डॉ. एचएस जाट ने बताया कि वर्तमान फसल केवल बीज उत्पादन कार्यक्रम नहीं, बल्कि काजरी के दीर्घकालीन प्रजनन एवं आनुवंशिक सुधार प्रयासों की उपलब्धियों का प्रत्यक्ष जीवंत प्रदर्शन है। उन्होंने कहा कि इन किस्मों के गुणवत्तापूर्ण बीज की व्यापक उपलब्धता से मोठ उत्पादन को बढ़ाने तथा किसानों की आय वृद्धि में मदद मिल सकती है।

राजस्थान सरकार के अतिरिक्त निदेशक कृषि, डॉ. जीआर मटोरिया, डॉ. जेआर भाकर, संयुक्त निदेशक कृषि तथा डॉ. नेमाराम चौधरी, सहायक निदेशक कृषि, ने इन किस्मों के प्रदर्शन का अवलोकन एवं सराहना करते हुए इन्हें शीघ्र बीज श्रृंखला में शामिल करने, गुणवत्तापूर्ण बीज का त्वरित गुणन तथा किसानों तक व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराने पर जोर दिया। इन किस्मों के व्यापक प्रसार एवं व्यावसायीकरण के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी के अंतर्गत सहयोग करने के इच्छुक निजी क्षेत्र के भागीदार काजरी से संपर्क कर सकते हैं। इससे गुणवत्तापूर्ण बीज का त्वरित गुणन एवं किसानों तक व्यापक स्तर पर उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी। खरीफ 2026 में इन किस्मों का प्रदर्शन पश्चिमी राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में जलवायु-सहिष्णु आनुवंशिक विकल्प के रूप में उनकी क्षमता को दर्शाता है तथा सूखे से जुड़े उत्पादन जोखिमों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

Next Story