Jodhpur: जेएनवीयू में प्रो. जैन ने स्त्री संस्कृति और उसके सही प्रकटीकरण पर जोर दिया

जोधपुर: महिला अध्ययन केंद्र जेएनवीयू के तत्वावधान में हिन्दी फिल्मी गीतों में नारी का प्रकटीकरण: स्त्री-सम्मान और मातृभूमि का भाव विषय पर एक विशेष संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जेएनवीयू के अकादमिक कौंसिल के पूर्व नामित सदस्य एवं राजकीय महाविद्यालय, सांभर के राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. संजय जैन थे।
अपने व्याख्यान में प्रो. संजय जैन ने कहा कि हिन्दी फिल्मी गीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक चेतना के निर्माण की महत्वपूर्ण शक्ति हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय समाज में स्त्री की छवि, प्रेम की मर्यादा, पारिवारिक संबंधों तथा राष्ट्रभक्ति की भावना पर फिल्मी गीतों का गहरा प्रभाव पड़ता है। उनके अनुसार स्त्री को समझने के लिए केवल विधिक प्रावधानों या सामाजिक संरचनाओं का अध्ययन पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोकप्रिय संस्कृति और विशेष रूप से फिल्मी गीतों का अध्ययन भी आवश्यक है।
उन्होंने अपने व्याख्यान में कहा कि हिन्दी सिनेमा के गीतों में नारी का चित्रण समय के साथ परिवर्तित हुआ है प्रारम्भिक दौर में त्यागमयी मां और आदर्श नारी के रूप में, बाद में प्रेमिका के रूप में तथा आधुनिक समय में एक ओर सशक्त व्यक्तित्व और दूसरी ओर बाज़ारवादी प्रभाव के कारण उसके वस्तुकरण के रूप में भी प्रस्तुत किया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय परंपरा में स्त्री केवल समाज की सदस्य नहीं, बल्कि समाज की संस्कृति की वाहक है, क्योंकि परिवार, भाषा, संस्कार और नैतिक मूल्यों की प्रथम शिक्षा मातृत्व से प्राप्त होती है।
केन्द्र की निदेशक डॉ विजयश्री ने कहा कि साहित्य, सिनेमा और संगीत समाज के केवल दर्पण ही नहीं बल्कि उसके निर्माणकर्ता भी हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को लोकप्रिय संस्कृति का आलोचनात्मक अध्ययन करने और स्त्री-गरिमा तथा सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति संवेदनशील बनने का आह्वान किया।





