राजस्थान

भक्ति में डूबा जयपुर, गणपति बप्पा मोरया के जयघोष से गूंजा शहर

Admindelhi1
26 Sept 2026 3:54 PM IST
भक्ति में डूबा जयपुर, गणपति बप्पा मोरया के जयघोष से गूंजा शहर
x
गणपति बप्पा की विदाई पर जयपुर में भक्तिमय माहौल, जयकारों से गूंजा शहर

जयपुर: गुलाबी नगरी में दस दिवसीय गणेशोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी पर श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ हुआ। घर-घर, पूजा पंडालों और आवासीय सोसायटियों में मंगल मूर्ति के रूप में विराजे भगवान गणेश को शनिवार को भक्तों ने नम आंखों से विदाई दी। शहरभर में ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ और ‘जय गणेश, जय गणेश देवा’ के जयघोष गूंजते रहे।

सुबह से ही परकोटे से लेकर बाहरी कॉलोनियों तक अलग-अलग समूहों में श्रद्धालु गणेश प्रतिमाओं को सजाई गई ट्रैक्टर-ट्रॉलियों, पिकअप और लोडिंग टेम्पो में लेकर विसर्जन स्थलों की ओर रवाना हुए। ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों, डीजे और पारंपरिक ढोल-ताशों की थाप पर युवा, महिलाएं और बच्चे नाचते-गाते नजर आए। कई जगह श्रद्धालु मराठी पारंपरिक वेशभूषा में गणेश भजनों पर नृत्य करते दिखाई दिए। आतिशबाजी के बीच निकली शोभायात्राओं ने माहौल को उत्सवी बना दिया।

मोदक और छप्पन भोग से किया पूजन

विसर्जन से पहले श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। धूप-दीप से पूजन के बाद बप्पा को मोदक और छप्पन भोग अर्पित किए गए। कई पूजा पंडालों में विशेष आरती और धार्मिक आयोजन हुए। इसके बाद भक्तों ने भक्ति गीत गाते और गणपति के जयकारे लगाते हुए प्रतिमाओं को विसर्जन स्थलों तक पहुंचाया।

गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन जलमहल झील, मावठा सागर, आमेर मावठा, कानोता बांध, चंदलाई बांध, गोनेर बंधा सहित शहर में बनाए गए विभिन्न कृत्रिम जलाशयों और अन्य जलस्रोतों पर किया गया। घाटों पर गणपति बप्पा मोरया के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने प्रतिमाओं का विधि-विधान से विसर्जन किया। विसर्जन के दौरान भक्तों ने बप्पा से शहर की सुख-समृद्धि, खुशहाली और शांति की कामना की तथा अगले वर्ष फिर जल्दी आने का निमंत्रण दिया।

गणेशोत्सव के दौरान कई गणपति पंडालों में वृंदावन से आए कलाकारों ने धार्मिक नाट्य मंचन किए। विभिन्न आवासीय सोसायटियों में स्थापित गणेश प्रतिमाओं का भी विशेष पूजन किया गया। भक्तों ने भजन-कीर्तन के साथ उत्साह और उमंग से गणेश आराधना की।

अनंत चतुर्दशी पर दिनभर चले विसर्जन कार्यक्रमों के बाद जयपुर में उत्सव का समापन भावुक माहौल में हुआ। ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच बप्पा को विदाई देते समय श्रद्धालुओं की आंखें नम थीं, लेकिन मन में अगले वर्ष फिर गणपति के आगमन की आस थी।

Next Story