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Jaipur: ‘मोदी सरकार इसरो की विरासत को निजी हाथों में देने पर तुली’: गहलोत

Admindelhi1
7 Sept 2026 1:38 PM IST
Jaipur: ‘मोदी सरकार इसरो की विरासत को निजी हाथों में देने पर तुली’: गहलोत
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इसरो के भविष्य को लेकर गहलोत ने मोदी सरकार पर उठाए सवाल

जयपुर: इसरो में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को लेकर कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम को खड़ा करने वाली संस्थागत विरासत को केंद्र सरकार धीरे-धीरे निजी हाथों में सौंपने की दिशा में बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इसरो केवल एक संस्था नहीं, बल्कि देश के वैज्ञानिक स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।

गहलोत ने कहा कि देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव पंडित जवाहरलाल नेहरू की दूरदृष्टि और इंदिरा गांधी के दृढ़ नेतृत्व में रखी गई। उन्होंने वैज्ञानिकों पर भरोसा किया, संसाधन उपलब्ध कराए और ऐसी संस्थाओं के निर्माण को प्राथमिकता दी, जिनकी बदौलत भारत आज अंतरिक्ष के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है।

उन्होंने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उसके करीब 12 वर्षों के कार्यकाल में एक भी नई राष्ट्रीय संस्था खड़ी नहीं की गई, बल्कि कांग्रेस शासन के दौरान स्थापित मजबूत संस्थाओं को कमजोर करने का काम किया जा रहा है। गहलोत ने आरोप लगाया कि अब इसरो की भूमिका को भी सीमित करने की कोशिश की जा रही है।

इसरो कर्मचारियों की चिंता को बनाया आधार

गहलोत ने अपने बयान में इसरो के कर्मचारी संगठनों की ओर से उठाई गई चिंताओं का भी उल्लेख किया। हाल ही में इसरो के नौ कर्मचारी संगठनों ने संगठन के निर्माण एवं संचालन से जुड़ी गतिविधियों को निजी क्षेत्र में स्थानांतरित किए जाने की संभावनाओं पर इसरो अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव से लिखित स्पष्टीकरण मांगा था।

कर्मचारी संगठनों की चिंता के बीच कांग्रेस ने केंद्र सरकार की अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़ी नीतियों पर सवाल उठाए हैं। गहलोत का आरोप है कि दशकों में विकसित की गई वैज्ञानिक एवं तकनीकी क्षमताओं को निजी कंपनियों को सौंपने से देश की सार्वजनिक वैज्ञानिक संस्थाओं की भूमिका कमजोर हो सकती है।

इसरो ने कहा- निजीकरण नहीं, अंतरिक्ष क्षेत्र का विस्तार

हालांकि, इस पूरे विवाद के बीच इसरो ने 6 सितंबर को आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कर साफ कहा कि इसरो का निजीकरण नहीं किया जाएगा और उसकी भूमिका या महत्व कम नहीं होगा। इसरो के अनुसार निजी क्षेत्र की भागीदारी का उद्देश्य संस्था की भूमिका घटाना नहीं, बल्कि परिपक्व तकनीकों के उत्पादन और व्यावसायीकरण में उद्योग की क्षमता बढ़ाते हुए इसरो को उन्नत अनुसंधान, नई प्रौद्योगिकियों और राष्ट्रीय मिशनों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बनाना है।

गहलोत ने इसके बावजूद केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो सरकार नई राष्ट्रीय संस्थाएं खड़ी नहीं कर पा रही है, वह कांग्रेस के दौर में निर्मित संस्थाओं की क्षमता को निजी क्षेत्र के हवाले करने में लगी है। उन्होंने इसे केवल इसरो से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि देश के वैज्ञानिक स्वाभिमान से जुड़ा सवाल बताया।

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