राजस्थान
Jaipur: राज्य सरकार ने सेवाओं को और सुलभ बनाने के लिए कदम उठाए
Tara Tandi
11 Oct 2025 5:39 PM IST

x
Jaipur जयपुर । चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य और मेंटल वेल-बीइंग को प्रोत्साहित करना समय की आवश्यकता है। शारीरिक स्वास्थ्य के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य भी नितांत आवश्यक है। प्रदेश में मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं को और विस्तार देने के साथ ही सुदृढ़ बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं में भी मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजूबती दी जाएगी।
श्री खींवसर शुक्रवार को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया एवं भागदौड़ भरी कार्यशैली ने मानसिक स्वास्थ्य को प्रतिकूल रूप से प्रभावित किया है। शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य के बीच बेहतर तालमेल से चिंता, तनाव, अवसाद जैसे मानसिक विकारों को दूर किया जा सकता है।
श्री खींवसर ने कहा कि सामाजिक स्वीकार्यता कम होने के बावजूद, भावनात्मक और व्यवहारिक समर्थन देकर दूसरों के अवसाद को कम किया जा सकता है। हर व्यक्ति के जीवन में कभी न कभी ऐसा अवसर आता है, जब वह बहुत अधिक मानसिक तनाव से घिर जाता है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मानसिक विकार होने पर विशेषज्ञों की सहायता लेने में संकोच नहीं करना चाहिए।
मुख्य सचिव श्री सुधांश पंत ने कहा कि मानसिक बीमारी का पता देरी से चलता है। लोगों को मानसिक विकारों को सीमित न रखकर इन विषयों को साझा करना चाहिए है, इससे व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ रहता है। श्री पंत ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने के उद्देश्य से राज्य में टेली-मानस हेल्पलाइन (1800-891-4416) के माध्यम से नागरिकों को निःशुल्क परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। इस हेल्पलाइन पर कोई भी व्यक्ति तनाव, अवसाद, चिंता या मानसिक परेशानी की स्थिति में तुरंत विशेषज्ञ परामर्श प्राप्त कर सकता है।
मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में विभिन्न योजनाओं, कार्यक्रमों, हेल्पलाइन तथा काउंसलिंग के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य पर निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने आह्वान किया कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना आवश्यक है, जिन लोगों को मानसिक स्वास्थ्य लाभ की आवश्यकता है, उन्हें उपचार के लिए अधिक से अधिक जागरूक करें।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती गायत्री राठौड़ ने कहा कि सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से मानसिक तनाव में वृद्धि हो रही है। जब हमारी असीमित अपेक्षाएं, हमारी वास्तविक उपलब्धियों से अधिक होती हैं, और जो हमें प्राप्त होता है, उसमें अंतर रहता है, तो यही असंतुलन मानसिक अस्वस्थता का कारण बन जाता है। ऐसी परिस्थितियों में आत्म-जागरूकता और भावनात्मक स्थिरता बनाए रखना आवश्यक है।
श्रीमती राठौड़ ने कहा कि बदलते सामाजिक परिदृश्य को देखते हुए राज्य सरकार मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित नीतियों और कार्ययोजनाओं को विशेषज्ञों के सुझावों एवं सहयोग से और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में निशुल्क दवा वितरण, जांच सुविधाएं तथा आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से हर स्तर पर लोगों तक सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। राज्य सरकार मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को व्यापक और सुलभ बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
शासन सचिव, स्वायत्त शासन विभाग, श्री रवि जैन ने कहा कि वर्तमान जीवनशैली में बढ़ते तनाव, अवसाद और अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं आम हैं। इन समस्याओं पर नियंत्रण के लिए समय पर परामर्श, सकारात्मक सोच, नियमित व्यायाम, स्पोर्ट्स, संगीत तथा परिवार और मित्रों से संवाद आवश्यक है।
शासन सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग, श्री अम्बरीष कुमार ने मानसिक स्वास्थ्य के मूलभूत कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तनाव, असंतुलित जीवन शैली, सामाजिक अलगाव आज मानसिक अस्वस्थता के प्रमुख कारण हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में मानसिक विकारों से उबरने के लिए अनेक सुविधाएं विकसित हुई हैं। ब्रेन के वर्किंग स्टाइल को समझ कर मानसिक विकारों को दूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नियमित योग एवं व्यायाम से मेंटल ट्रेनिंग कर व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ बने रह सकता हैै।
कार्यक्रम में सीनियर प्रो. डॉ. शिव गौतम ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं और उनके समाधान पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अपने प्रस्तुतीकरण में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के प्रारंभिक स्तर से लेकर वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डाला। साथ ही, इन सेवाओं के विस्तार की आवश्यकता व्यक्त की।
कार्यक्रम में यूनिसेफ की हेल्थ स्पेशलिस्ट डॉ. जोएना लाइ ने मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में यूनिसेफ द्वारा किए जा रहे प्रयासों और पहल से अवगत कराया। साथ ही, उन्होंने वैश्विक परिप्रेक्ष्य में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी प्रमुख जानकारियां और अनुभव साझा किए।
अलख फाउंडेशन की श्रीमती रानू पाराशर ने विद्यालयी पाठ्यक्रम की पुस्तकों में टेलीमानस हेल्पलाइन नम्बर का प्रकाशन करने एवं मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए राज्य सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इससे मानसिक स्वास्थ्य के प्रति बच्चों और युवाओं में जागरूकता बढ़ेगी।
निदेशक जनस्वास्थ्य श्री रवि प्रकाश शर्मा ने स्वागत उद्बोधन किया। इस दौरान मन दर्पण, तथा टोबेको फ्री यूथ कैम्पेन 3.0 के पोस्टर का विमोचन भी किया गया।
इससे पहले कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने तथा इस क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली विभूतियों, विभिन्न महाविद्यालयों तथा विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. एसएम स्वामी ने बताया कि आज के कार्यक्रम में 800 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में चिकित्सा शिक्षा आयुक्त श्री इकबाल खान, एनएचएम के मिशन डायरेक्टर डॉ. अमित यादव, निदेशक आईईसी श्री शाहीन अली खान, खाद्य सुरक्षा आयुक्त डॉ. टी शुभमंगला, विषय विशेषज्ञ, शोधकर्ता, विद्यार्थियों सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
TagsJaipur राज्य सरकारसेवाओं सुलभ बनानेकदम उठाएJaipur State Government takessteps to make services accessibleजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताजनता से रिश्ता.कॉमआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperजनताjantasamachar newssamacharहिंन्दी समाचार
Next Story





